बॉलीवुड की सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर लिजेंड दिलीप कुमार को अपना मुंहबोला भाई मानती थीं. केवल शब्दों से ही नहीं बल्कि लता ने कई बार दिलीप साहब को राखी भी बांधी है. अपने मुंहबोले भाई के यूं चले जाने से लता काफी दुखी हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान अपना दुख व्यक्त करते हुए दिलीप साहब संग कई अनोखे किस्से भी शेयर किए हैं.
इंटरव्यू में लता कहती हैं, इस खबर ने मुझे दुखी कर दिया है. लेकिन यही दुनिया की रीत है. इस सच को नकारा भी नहीं जा सकता है.
दिलीप साहब की आवाज पर बात करते हुए लता कहती हैं, वे बहुत अच्छा गाते हैं लेकिन पहली बार माइक पकड़ काफी घबरा गए थे. महबूब स्टूडियो में फिल्म मुसाफिर के गाने की रेकॉर्डिंग चल रही थी. वे माइक लेते ही घबरा से गए, तब सलिल चौधरी ने उनसे कहा, तुम घबराओ नहीं यूसुफ आंख बंद कर गाना गाओ. उन्होंने प्रैक्टिस के तौर पर एक क्लासिकल गाना शुरू किया. दिलीप भईया की आंखे बंद थी और वे गाना गाए जा रहे थे. ऐसे में सलिल जी बार-बार उन्हें रुकने का इशारा कर रहे थे, लेकिन वे नहीं रूके. बाद में उन्हें सलिल साहब ने आकर कहा कि इस गाने को जाने देते हैं, पहले तुम फिल्म का गाना गाओ. लागी छूटे नहीं रामा, चाहे जिया जाए, गाना दिलीप जी ने गाया था.
एक और दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए लता कहती हैं, दिलीप साहब में गजब ही हिम्मत थी. एक बार मुझपर और दिलीप भईया पर एक प्रोड्यूसर ने आरोप लगा दिया था कि हम उनसे ब्लैक मनी लेते हैं. ऐसे में यह बात दिलीप साहब को खल गई. उन्होंने मामले को कोर्ट ले जाने का फैसला किया. उन्होंने इस केस को खुद वकील बन लड़ने की ठान ली थी.
आगे कहती हैं, दिलीप साहब ने अपने असिस्टेंट को बुलवाकर कोर्ट से एक महीने का वक्त मांगा. इस दौरान उन्होंने वकालत की तमाम किताबें पढ़ीं और केस लड़े. एक दिन मुझे फोन कर कहा कि तुम मस्त रहो मेरी बहना, हमलोग केस जीत गए हैं. उस प्रोड्यूसर ने मुझपर 600 रुपये, दिलीप भईया पर एक हजार और एक आदमी पर भी 600 रुपये खाने का आरोप लगाया था. उस दौर में 600 रुपये भी बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी.
लता कहती हैं, उन्होंने मुझे अपनी छोटी बहन बना लिया था. मैं उन्हें राखी बांधा करती थी. कई बार वे मुझसे आकर कहते थे कि कुछ जरूरत हो, तो मुझे बताना. एक बार की बात है, लंदन में शो के दौरान दिलीप साहब ने मेरी तारीफ में इतने अच्छे अल्फाज कहे कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा. आज भी वो वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद है. मैं उनके नॉलेज व उर्दू की कायल थी. कई बार लोग उनसे मिलकर हैरान हो जाते थे कि इंडस्ट्री में ऐसे भी कलाकार हैं.
सोशल मीडिया पर भी लता जी ने दिलीप साहब के लिए पोस्ट कर अपना दुख व्यक्त किया है. इस पोस्ट के साथ उन्होंने कई सारी पुरानी तस्वीरें भी शेयर की हैं.
अपने पोस्ट पर लता लिखती हैं, यूसुफ भाई, आज आप अपनी छोटी सी बहन को छोड़कर चले गए. उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है. मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है. मैं निशब्द और दुखी हूं. अपने पीछे वे कई यादें और बातें छोड़कर चले गए. वे एक लंबे समय से बीमार थे, लोगों को पहचान नहीं पाते थे. ऐसे में सायरा भाभी ने खुद को भूलाकर भईया की दिनरात सेवा की है. ऐसी महिला को मैं प्रणाम करती हूं. यूसुफ भाई को शांति मिले. बस यही दुआ है.