एक्टर प्रियांशु पेनयुली अपने करियर के शुरुआती फेज में हैं. इस दौरान उन्हें कई बड़े दिग्गजों संग काम करने का मौका मिला है. प्रियांशु इसका क्रेडिट अपने पेशेंस और थिएटर की तरबियत को देते हैं. इस मुलाकात में वो हमसे बता रहे हैं कि डायरेक्टर विशाल भारद्वाज और नसीरुद्दीन शाह संग काम करने का एक्सपीरिंयस उनका कैसा रहा.
डायरेक्टर विशाल भारद्वाज संग काम करने के एक्सपीरियंस पर प्रियांशु कहते हैं- उनके साथ मेरा काम करने का एक्सपीरियंस पहली बार था. मैंने तो कुछ समय पहले थिएटर शुरू किया था. जब सिनेमाहॉल में जाकर ओमकारा और कमीने फिल्म देखी थी, तब से मैं उनके साथ काम करना चाहता था. मेरा मन था कि एक्टर बनूंगा, तो ऐसे ही इंसान के साथ काम जरूर करूंगा. भले ही रोल छोटा ही क्यों न हो. उनके कहानी को कहने का तरीका बहुत अलग है. मैं तो कहूंगा कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री एक तरफ और विशाल भारद्वाज एक तरफ हैं. उनके साथ काम के दौरान महसूस हुआ कि वो इतने चालाक और जीनियस इंसान हैं कि आपके अंदर अपने मिजाज की फिल्म का रस कब घोल देंगे, एहसास ही नहीं होगा. हर दिन सेट पर नया होता था. उनके साथ काम करने का मजा ही कुछ और था.
इतनी जहीन कास्ट के साथ काम करने के एक्सपीरियंस पर प्रियांशु बताते हैं, हमें जब पता चला कि चार्ली चोपड़ा में नसीर साहब, रत्ना मैम, नीना मैम, गुलशन ग्रोवर जैसे दिग्गज एक्टर्स हैं, तो सोचा था कि पता नहीं इनके लेवल पर एक्टिंग करने में जाने कितने सालों की ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी. आप उनके प्रभाव में होते हो. आपने गुलशन ग्रोवर को बैड मैन के रूप में बचपन से देखा है. अब उनके साथ एक्टिंग करना बहुत बड़ी बात हो जाती है. सेट पर जाते ही उनसे जब मिला, तो उनकी नम्रता देखकर मैं तो इमोशनल हो गया था.
मनाली में जब मैं पहुंचा, तो देखता हूं नीना मैम पास्ता बना रही थीं और उन्होंने हमसे पूछा खाओगे क्या. वहीं रत्ना मैम अपनी कहानियां हमसे शेयर करती थी. उनके साथ बैठना ही आपके लिए स्कूल की ट्रेनिंग जैसी चल रही थी. जब नसीर साहब के साथ पहला सीन था. उस वक्त तो मेरे पेट में चूहे से कूद रहे थे. मैं मन में सोचने लगा कि चाहे कुछ हो जाए, यहां मुझे एक्टिंग भूलनी नहीं है. आपका प्रेशर में होना जरूरी होता है ताकि आप अपने काम को बेहतर तरीके से कर पाओ.