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हिंदी फिल्मों के 'महानायक' अमिताभ बच्चन की मिमिक्री के लिए पहचाने जाने वाले हर कलाकार ने उनकी दमदार आवाज की नकल करते हुए फिल्म 'अग्निपथ' (1990) से उनका डायलॉग जरूर बोला है. 'विजय दीनानाथ चौहान... पूरा नाम' अमिताभ ने फिल्म 'अग्निपथ' में जिस अंदाज में ये डायलॉग बोला, वो उनका सिग्नेचर बन गया. ये डायलॉग बोलते हुए फिल्म में अमिताभ की आवाज उससे भी ज्यादा गहरी थी, जितनी रियल में है.
लेकिन क्या आपको पता है कि अमिताभ ने जिस तरह ये डायलॉग फिल्म में बोला, आवाज बदलने का उनका वो अंदाज शुरुआत में जनता को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था. लोगों को इस आवाज से इतनी समस्या थी कि फिल्म रिलीज होने के तुरंत बाद अमिताभ को अपनी डबिंग दोबारा करनी पड़ी थी. गैंगस्टर ड्रामा फिल्मों के मामले में आज बॉलीवुड की कल्ट-क्लासिक बन चुकी 'अग्निपथ' से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प बातें हैं जिन्हें जानने के बाद ये फिल्म दोबारा देखने में आपको और मजा आने लगेगा.
अमिताभ को कैसे आया आवाज बदलने का आईडिया?
'कौन बनेगा करोड़पति' के एक एपिसोड में अमिताभ ने बताया था कि 'अग्निपथ' के लिए उन्होंने अपनी आवाज में जो बदलाव किया, उसका आईडिया कहां से आया था. फिल्म के शूट का पहला दिन था और अमिताभ मेकअप रूम में बैठे थे. उन्हें ये समझ नहीं आ था कि ये किरदार कैसे निभाया जाए.
'अग्निपथ' के डायरेक्टर मुकुल आनंद ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें इस किरदार के लिए एक बहुत अलग, भारी आवाज में डायलॉग बोलने चाहिए. अमिताभ ने आगे बताया, 'फिल्म के कंपोजर कल्याण जी-आनंद जी से मिलने उनके घर एक आदमी आया करता था, जिसकी आवाज बहुत भारी थी. तो मुझे लगा कि क्यों ना विजय की आवाज इस आदमी के अंदाज में निकाली जाए. बाद में मुझे पता लगा कि वो आदमी अंडरवर्ल्ड बैकग्राउंड से था.'
लेकिन ये आवाज ऑडियंस को पसंद नहीं आई. अमिताभ ने कहा, 'जब फिल्म रिलीज हुई तो प्रोड्यूसर ने मुझे ये बताने के लिए कॉल किया कि थिएटर्स में बवाल मचा हुआ है. दर्शक सीटें फाड़ रहे हैं और साउंड डिपार्टमेंट से कह रहे हैं- 'ये अमिताभ की आवाज नहीं है, साउंड सिस्टम ठीक करो.' तो इस समस्या का हल निकालने के लिए मुझे नॉर्मल आवाज में पूरी फिल्म दोबारा से डब करनी पड़ी. लेकिन वो पहली आवाज बहुत असरदार थी.'
'जुम्मा' का अधूरा वादा
1991 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म 'हम' का गाना 'जुम्मा चुम्मा' आज भी बहुत पॉपुलर है. मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ये गाना कंपोज किया था. लेकिन ये गाना असल में 'हम' के लिए नहीं, बल्कि 'अग्निपथ' के लिए लिखा गया था. फिल्म के डायरेक्टर मुकुल आनंद को शूट के बीच में ये महसूस हुआ कि अमिताभ के किरदार में किसी भी तरह का लाइट मूड नहीं है और पूरी फिल्म में ये किरदार बहुत गंभीर टोन लिए हुए है.
ऐसे में 'जुम्मा चुम्मा' विजय दीनानाथ चौहान के किरदार के साथ फिट नहीं होगा. इसलिए उन्होंने 'अग्निपथ' के लिए बना ये गाना छोड़ दिया और इसकी जगह आइटम नंबर के तौर पर 'अली बाबा' गाना फिल्म में इस्तेमाल किया, जिसमें अर्चना पूरण सिंह थीं. हालांकि, आज 'अली बाबा' शायद ही लोगों को याद हो, जबकि 'जुम्मा चुम्मा' आइकॉनिक बन चुका है.
आखिरकार अमिताभ के सामने विलेन बने डैनी
'अग्निपथ' को लोग जितना विजय दीनानाथ चौहान के लिए याद रखते हैं, उतना ही विलेन कांचा चीना के लिए भी. विलेन का ये रोल डैनी डेनजोंग्पा ने निभाया था. अमिताभ अपने दौर के जितने बड़े हीरो रहे, डैनी उतने ही बड़े विलेन थे. लेकिन लंबे समय से इन्हें किसी फिल्म में आमने-सामने देखने का ऑडियंस का सपना पूरा नहीं हो पा रहा था.
'शोले' (1975) में पहले गब्बर सिंह का रोल डैनी को ऑफर किया गया था. लेकिन इस फिल्म का शूट टलने और अपने बीजी शिड्यूल की वजह से डैनी को बाहर होना पड़ा. आखिरकार, 'शोले' में गब्बर का रोल न्यूकमर अमजद खान के पास गया. इसी तरह अमिताभ बच्चन स्टारर 'कुली' भी पहले डैनी को ऑफर हुई थी. मगर डैनी इस बार भी अमिताभ के सामने स्क्रीन पर नहीं आ सके और विलेन का रोल कादर खान ने निभाया. कई सालों तक इंडस्ट्री में टॉप हीरो रहे अमिताभ और टॉप विलेन रहे डैनी फाइनली 'अग्निपथ' में साथ काम कर पाए थे. और फिल्म देखने वाले हर दर्शक को अच्छे से याद होगा कि इन दो आइकॉन्स की ऑनस्क्रीन टक्कर से कैसी चिंगारियां उठी थीं.
अमिताभ को मिला नेशनल अवॉर्ड लेकिन फ्लॉप हो गई फिल्म
'अग्निपथ' एक महंगी फिल्म थी और प्रोड्यूसर यश जौहर के लिए ये एक पैशन प्रोजेक्ट की तरह थी. फिल्म में अमिताभ की परफॉरमेंस को क्रिटिक्स ने बहुत सराहा और इसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म फ्लॉप साबित हुई. इससे यश जौहर को बहुत नुक्सान हुआ था.
यश के बेटे करण जौहर आज बॉलीवुड के टॉप फिल्ममेकर्स में से एक हैं. उन्होंने अपने एक पुराने इंटरव्यू में ये बताया था कि उन्हें 'अग्निपथ' बहुत अच्छी लगी थी. करण को हमेशा ये लगता रहा कि इस कहानी को जनता से वो प्यार नहीं मिला जो मिलना चाहिए था. इसीलिए उन्होंने 2012 में 'अग्निपथ' टाइटल से ही अपने पिता की इस फिल्म का रीमेक बनाया, जिसमें ऋतिक रोशन हीरो थे और संजय दत्त विलेन. 'अग्निपथ' के रीमेक ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से ज्यादा कलेक्शन किया और सुपरहिट साबित हुआ.
किसी और फिल्म के लिए लिखा गया था ये यादगार सीन
'अग्निपथ' में मास्टर दीनानाथ चौहान (आलोक नाथ) की मौत का सीन कोई दर्शक कभी नहीं भूल सकता. मास्टर की मौत के बाद कोई उसकी लाश को कंधा देने नहीं आता और उसका बेटा विजय, अकेले ही एक ठेले पर पिता की लाश ढोता है.
अग्निपथ के राइटर कादर खान ने असल में ये सीन, एक दूसरी फिल्म 'जाहिल' के लिए लिखा था. इस फिल्म से वो बतौर डायरेक्टर डेब्यू करने वाले थे और इसके लिए वो अमिताभ से बात भी कर चुके थे. लेकिन 'कुली' वाले एक्सीडेंट के बाद जब अमिताभ हॉस्पिटल से लौटे तो उन्हें अपने पुराने प्रोजेक्ट पूरे करने थे. इस चक्कर में 'जाहिल' पहले अटकी, फिर कुछ और कारणों की वजह से बन ही नहीं सकी. डायरेक्टर मुकुल आनंद ने जब 'अग्निपथ' के वक्त कादर खान से इन सीन्स के लिए बात की, तो वो इन्हें फिल्म में इस्तेमाल करने के लिए तैयार हो गए.
'अग्निपथ' जिस समय बनी, उस समय अमिताभ की ज्यादा फिल्में हिट नहीं चल पा रही थीं. उनकी 'गंगा जमुना सरस्वती' को बहुत नेगेटिव रिव्यू मिले थे और ये फिल्म फ्लॉप होते-होते बची थी. जबकि 'तूफान', 'जादूगर' और 'मैं आजाद हूं' कोई कमाल नहीं कर सकी थीं. 'अग्निपथ' के लिए अमिताभ ने खुद को पूरी तरह डायरेक्टर मुकुल आनंद के हाथों में सौंप दिया था और कहा था कि ऐसी फिल्म बनाएं जो इंडस्ट्री के फिल्म मेकिंग स्टाइल से हटकर कुछ नया लेकर आए. 'अग्निपथ' ने उस समय के स्टाइल से हटकर तो बहुत कुछ किया लेकिन शायद तब ऑडियंस अमिताभ को इतने एक्स्परिमेंट करते देखने के लिए तैयार नहीं थी. ये फिल्म तब भले फ्लॉप हो गई, लेकिन समय के साथ इसे अपने हिस्से का प्यार और फैन फॉलोइंग दोनों मिल गए.