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'चमकीला' की फिल्मी कहानी में गायब थीं, असल जिंदगी से जुड़ी ये 5 चीजें, धर्मेंद्र कनेक्शन है शॉकिंग!

बायोपिक्स में लीड किरदार को हीरो दिखाने के नजरिए से कहानी कही जाती है. ऐसे में अक्सर बहुत सारी बातें और किरदार नैरेटिव को सधा हुआ रखने के लिए, किनारे कर दिए जाते हैं. इसी तरह 'चमकीला' में भी, अपने हीरो का कद संभालने के लिए कई बातें और किरदारों को साइड रख दिया गया है.

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चरणजीत आहूजा, दिलजीत दोसांझ, वीरेंद्र
चरणजीत आहूजा, दिलजीत दोसांझ, वीरेंद्र

दिलजीत दोसांझ और परिणीति चोपड़ा की फिल्म 'चमकीला' की चर्चा हर तरफ है. डायरेक्टर इम्तियाज अली की ये फिल्म जबसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है, तभी से इसकी तारीफों से सोशल मीडिया भरा पड़ा है. दोनों एक्टर्स के काम और इम्तियाज की स्टोरीटेलिंग को बहुत सराहा जा रहा है. 

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बायोपिक्स में लीड किरदार को हीरो दिखाने के नजरिए से कहानी कही जाती है. ऐसे में अक्सर बहुत सारी बातें और किरदार नैरेटिव को सधा हुआ रखने के लिए, किनारे कर दिए जाते हैं. इसी तरह 'चमकीला' में भी, अपने हीरो का कद संभालने के लिए कई बातें और किरदारों को साइड रख दिया गया है. आइए बताते हैं ऐसी ही 5 चीजें जो थीं तो बहुत दिलचस्प, मगर 'चमकीला' में इन्हें जगह नहीं मिली:

स्पोर्ट्स में टॉप अमरजोत कौर
'चमकीला' की कहानी में अमरजोत कौर का किरदार परिणीति चोपड़ा ने बहुत खूब निभाया है. मगर इस किरदार को पूरी तरह सिर्फ चमकीला के कॉन्टेक्स्ट में ही लिमिटेड रखा गया है. हालांकि, अमरजोत का चमकीला के साथ पॉपुलर होने का सफर, उनकी पहले की जिंदगी से एक अच्छा कंट्रास्ट पेश करता है. 

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अमर सिंह चमकीला और अमरजोत कौर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में अमरजोत की बड़ी बहन, जसवंत कौर ने बताया कि उनकी छोटी बहन स्पोर्ट्स में बहुत अच्छी थीं. वो पढ़ाई के दौर में भाला फेंक, डिस्कस थ्रो और शॉटपुट की खिलाड़ी रही थीं. स्पोर्ट्स में उन्होंने कई मैडल जीते थे और एक बार तो लेजेंड एथलीट मिल्खा सिंह ने उन्हें सम्मानित किया था. 

चमकीला और अमरजोत के बेटे जयमन ने आजतक डॉट इन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें पढने का भी बहुत शौक था. ये बात फिल्म में उन्हें हमेशा नॉवेल हाथ में लिए दिखाने से भी पता चलती है. मगर शायद स्पोर्ट्स से जुड़ा होने से ही अमरजोत की आवाज को वो थ्रो और ऊंचा स्केल मिला था, जो बाद में चमकीला की आवाज से मैच करने में उन्हें कामयाब बनाता है. 

अमरजीत का परिवार 
'चमकीला' में अमरजोत, के पेरेंट्स को इस तरह दिखाया गया है कि उनकी नजर अपनी बेटी की कमाई पर टिकी रहती थी. फिल्म के अंत में एक सीन है जिसमें चमकीला-अमरजोत की डेडबॉडी घर में रखी है, और अमरजोत के पेरेंट्स अंदर के कमरे में जाकर दोनों सिंगर्स के कमाए पैसे वगैरह समेट रहे हैं. 

जयमन ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें कहानी में ये चीज दिखाना नहीं पसंद आया. उन्होंने बताया, 'ऐसा तो नहीं था जैसा उन्होंने दिखाया है. अगर ऐसी कोई बात होती तो मुझे पता ही होता, मुझे तो पाला ही उन लोगों ने है. मेरे जितने भी हक हैं मुझे उन लोगों ने ही दिलाए हैं. तो ये थोड़ा मुझे लगा कि उन्होंने गलत दिखाया है.'

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अमरजोत की बहन ने भी इंटरव्यू में बताया है कि उनके पिता, जनसंपर्क विभाग की सरकारी नौकरी में थे. यानी वो ठीकठाक कमाई वाले व्यक्ति थे. चमकीला ने अमरजोत से शादी, अपनी पहली शादी छिपाते हुए की थी, मगर इसपर अमरजोत के परिवार का रिएक्शन फिल्म में नहीं है. पूरी सिचुएशन देखें तो अमरजोत के पिता का पॉइंट ऑफ व्यू इस कहानी के लिए इंटरेस्टिंग होता.  

चरणजीत आहूजा 
फिल्म में जब चमकीला को पहला गाना रिकॉर्ड करते दिखाया गया है, तो स्टूडियो में एक म्यूजिक डायरेक्टर उसके लिरिक्स का मजा लेते, और बेहतर गाइडेंस देते नजर आते हैं. ये किरदार रियल लाइफ शख्स चरणजीत आहूजा से इंस्पायर्ड है. चरणजीत को पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का लेजेंड कहा जाता है. 

चरणजीत आहूजा

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में पंजाब यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कुमूल अब्बी ने बताया है कि सुरिंदर शिंदा, सरदूल सिकंदर, हंस राज हंस, साबर कोटी, सतविंदर बग्गा और लेजेंड गुरदास मान को आहूजा की नजरों ने ही स्पॉट किया था. उन्होंने ही HMV के जरिए इन सभी को लॉन्च किया और बड़ी ऑडियंस तक पहुंचाया. 

इसी रिपोर्ट में फिल्म क्रिटिक बॉबी सिंह ने बताया कि जिन रिकॉर्ड्स और कैसेट्स के जरिए चमकीला को पंजाब के दूर-दराज की भी ऑडियंस मिली, वो ज्यादातर चरणजीत के डायरेक्शन में ही रिकॉर्ड किए गए थे. 

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धर्मेंद्र के कजिन वीरेंद्र
फिल्म में चमकीला और अमरजोत की हत्या के बाद एक फिल्म 'पटोला' थिएटर्स में चलती दिखाई गई है. इसके पोस्टर पर चमकीला-अमरजोत की जोड़ी नजर आती है. लेकिन इंडिया टुडे के अनुसार, 'पटोला' असल में मार्च 1988 में रिलीज हुई फिल्म है, जिसमें धर्मेंद्र के कजिन वीरेंद्र हीरो थे. चमकीला और अमरजोत फिल्म के एक छोटे से सीन में लाइव परफॉर्म करते नजर आए थे. दो दर्जन से ज्यादा फिल्मों में नजर आए वीरेंद्र, पंजाबी के पॉपुलर स्टार थे. 

'पटोला' फिल्म के पोस्टर में वीरेंद्र और दलजीत कौर

उनकी कहानी में ऐसा ही ट्विस्ट था जैसा अमर सिंह चमकीला की कहानी में. मार्च 1988 में जहां चमकीला की हत्या हुई थी, वहीं 9 महीने बाद दिसंबर में, एक फिल्म सेट पर गोली मारकर वीरेंद्र की भी हत्या कर दी गई थी. चमकीला की लास्ट फिल्म होने के नाते, फिल्म में 'पटोला' का जिक्र तो आया, मगर वीरेंद्र का कहीं जिक्र नहीं था. जबकि चमकीला और उनकी जान एक ही तरह से गई.  

गुरमेल कौर 
'चमकीला' की पूरी कहानी में उनकी पहली पत्नी गुरमेल कौर का किरदार बिल्कुल नदारद दिखता है. वो बस एक सीन में अपने बच्चे को गोद में लिए दिखती हैं. अपनी दूसरी शादी को लेकर चमकीला, पहली पत्नी से किसी तरह की कोई कन्वर्सेशन करते नहीं दिखते. हालांकि, उनकी कहानी में गुरमेल एक बहुत बड़ा किरदार हैं. 

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कुछ दिन पहले लव पंजाब यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू में गुरमेल ने बताया कि चमकीला, अपने पिता से उनकी बहुत तारीफ करते थे. उन्होंने गुरमेल की समझदारी की दाद दी थी कि उन्होंने उनकी दूसरी शादी का बहुत बड़ा मुद्दा न बनाते हुए उनकी बात समझी. वरना वो चाहतीं तो उन्हें जेल पहुंचा सकती थीं. चमकीला की गुरमेल के साथ दो बेटियां भी हुईं, जिन्हें उन्होंने अकेले ही पाला. उन्होंने चमकीला एक पिता का भी ध्यान रखा. चमकीला के निधन के बाद भी उन्होंने काफी स्ट्रगल किया. 'चमकीला' में इस किरदार को भी थोड़ा सा स्पेस तो मिल ही सकता था.

इंडिया टुडे से बात करते हुए खुद इम्तियाज ने कहा कि उन्होंने अमर सिंह चमकीला के 'ज्यादा ड्रामेटिक और यूनीक स्ट्रगल' को हाईलाइट करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा, 'जब एक तयशुदा समय की फिल्म बनाई जाती है तो बहुत कुछ छूट जाता है और वो चीजें जो फिल्म की स्टोरी और थीम से ज्यादा जुड़ी होती हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है.' मगर ऊपर बताए लोगों और बातों को पढ़ने के बाद तो आप भी मानेंगे कि फिल्म में इन्हें देखना दिलचस्प होता. 

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