मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं हैं. उनके जाने के बाद इंडस्ट्री के इस खालीपन को शायद ही कोई भर पाएगा. राजू अपने पीछे कई यादें छोड़ गए हैं. राजू के जाने के बाद उनके परिवार ने खुद को कैसे संभाला है? आज तक संग बातचीत में कॉमेडियन की पत्नी, शिखा श्रीवास्तव ने खास बातें बताई हैं.
राजू जी के जाने के बाद जिंदगी कैसे बदली है, चीजों को कैसे देखती हैं?
जिंदगी तो पूरी बदल गई है... मैं शायद इसे कभी बयां नहीं कर पाऊंगी. मेरी जिंदगी का लगभग पूरा हिस्सा राजू जी के साथ गुजरा है. मैं उन्हें बचपन से जानती हूं. मेरी कजिन सिस्टर की शादी उनके बड़े भाई से हुई है. उनकी शादी में ही पहली बार मुलाकात हुई थी. बस तभी से धीरे -धीरे हम दोनों एक दूसरे की जिंदगी बनते चले गए.
शरीर उनका गया है, लेकिन जिंदगी मेरी चली गई है. मेरी लाइफ लाइन थे वो...मेरा पूरा फोकस बच्चों और राजू जी पर ही होता था. लखनऊ से जब मुंबई आई थी, तो मेरे मन में बहुत उधेड़-बुन चलता था. मैंने एक ऐसे इंसान से शादी की थी, जो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से है, जिसका रेगुलर जॉब टाइमिंग नहीं है. मेरे लिए राजू जी की दुनिया किसी एलियन वर्ल्ड से कम नहीं थी. मैंने इसे एडवेंचर की तरह लिया. राजू काम संभालते थे और मैं उनका घर. हमने साथ में समय को जिया है. सफलता की ऊंचाइयों को छुआ है, तो कई ऐसे डाउन मोमेंट भी रहे हैं, जब मैं उनके साथ डट कर खड़ी रही थी. अपने काम को लेकर राजू जी का पागलपन एक अलग लेवल का होता था. मुझे उनकी खुशी को देखकर खुशी मिलती थी. राजू जी के जाने के बाद मुझे नहीं समझ आ रहा था कि मैं क्या करूंगी, खुद को कैसे संभालूंगी... लेकिन शायद यह बुरा वक्त ही आपको परखता है कि आप कितने स्ट्रॉन्ग हैं. अपने बच्चों के लिए अपनी फैमिली के लिए और सबसे ज्यादा राजू जी के लिए.. मेरा वक्त आ गया है कि मैं स्ट्रॉन्ग बनूं.
राजू जी हमेशा कहते थे कि तुम ऑफिस का काम संभालों, तब इन सब चीजों में मुझे इंटरेस्ट नहीं आता था. मैं टालती रहती थी कि ठीक है न, आप तो हैं ही, सब संभालेंगे. वो चाहते थे कि मैं हमेशा कुछ न कुछ करूं. आज अगर वो कहीं से मुझे देख रहे होंगे, तो जरूर हंस रहे होंगे कि चलो मोनी (राजू द्वारा पुकारा नाम) अब जिम्मेदारी लेने लगी है और जरूर कर लेगी.
उनकी इस दुनिया में जाने के लिए कितनी तैयार हैं आप?
ये जो कुछ भी हुआ है, वो इतना अचानक हुआ है कि मुझे अभी तक कुछ समझ नहीं आ रहा है. ऐसा लग रहा है कि सब सपने जैसा चल रहा है. कोई बुरा सपना, जिससे मेरी नींद टूट जाए और सबकुछ पहले जैसा हो जाए. खैर...काम तो करना है.. और हिम्मत तो आ रही है...पता नहीं कहां से ये स्ट्रेंथ मिल रही है. शायद वो ऐसा ही चाहते हैं.
यकीन मानें, वो जितनी भी कॉमेडी करें, लेकिन निजी जिंदगी में वो अपने काम को लेकर बहुत डिसिप्लिन थे. वैसा ही हमसे चाहते थे. अब ऐसा लग रहा है कि वो खुद सब काम करवा रहे हैं. जैसा वो चाहते थें वैसा ही बच्चे भी कर रहे हैं और मैं भी अंजाने में वैसा ही करती जा रही हूं. बहुत चैलेंजेस हैं, वो सबकुछ अधूरा छोड़कर गए हैं. मुझे उन्हें पूरा करना है. बच्चों को सेटल करना है, उनका काम संभालना है.
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अब बच्चों के साथ लीगेसी आगे बढ़ानी है?
राजू जी ने बचपन से ही बच्चों को हमेशा टफ ट्रेनिंग दी है. दरअसल, अपने करियर के इस मुकाम पर भी काफी रूट्स से जुड़े हुए थे. उन्होंने वो स्ट्रगल देखा है, जहां चीजें आसानी से आपको सर्व नहीं की जाती हैं, बल्कि उसके लिए कड़ी मेहनत करनी होती है. उनकी जर्नी और स्ट्रगल से तो हर कोई वाकिफ है. वो चाहते थे कि हमारे दोनों बच्चों को ग्राउंड रियलिटी पता हो. उन्हें असल जिंदगी का अहसास हो. वो अक्सर हमसे अपने एक्सपीरियंस शेयर करते थे.
दुनिया को हंसाने वाले राजू श्रीवास्तव कैसे पति थे? वक्त को लेकर शिकायत किया करती थीं?
मैं उनको तबसे जानती हूं, जब वो मुंबई नहीं आए थे. धीरे-धीरे उनका सक्सेस देखा, लेकिन राजू जी ने खुद को कभी नहीं बदला. उनकी लाइफस्टाइल बहुत ही सिंपल थी. बेसिक सा नेचर बहुत ही डाउन टू अर्थ था. अभी भी वो अपने घर, अपने गांव से बहुत जुड़े हुए थे. वो अक्सर वहां जाते रहते थे. इमोशनली भी उनका जुड़ाव बहुत था. रही बात वक्त को लेकर शिकायत की, तो उन्हें मनाना आता था. वो मेरे लिए वक्त निकाल ही लेते थे. हां, कभी-कभी इस चीज का मलाल होता था कि पब्लिकली कभी घुमने जाए, तो लोग आकर तस्वीरें खिंचवाने लगते थे या फैंस की भीड़ हो जाती थी. तो एक आम कपल की तरह हम कभी बाहर नहीं घूम पाते थे. फेस्टिवल के वक्त उनकी कोशिश होती थी कि वो साथ रहें, लेकिन बहुत बार ऐसा भी हुआ है करवाचौथ के वक्त वो पास नहीं होते थे. उस टाइम हम फोन पर या वीडियो कॉल कर व्रत मना लेते थे.
राजू जी कई बार मुझसे कहते थे कि हम लोग कितने लकी हैं कि जिसको देखा और चाहा उसी से शादी हो गई. हालांकि हमारे यहां भी शादी के दौरान दिक्कतें हुई थीं. मां-पापा राजी नहीं थे. हालांकि पर्सनल तौर पर इनको बहुत पसंद करते थे. लेकिन फिल्मी दुनिया से घबराते थे और कॉमेडी तो ठीक है, लेकिन काम क्या करते हो ? जब हम दोनों ने शादी के लिए ख्वाहिश जताई, तो मेरे बड़े भईया मुंबई आए, उन्होंने छानबीन की ताकि वो पता लगा सकें कि राजू फाइनेंशियली स्टेबल हैं या नहीं. तब तक राजू मुंबई में सेटल हो चुके थे. मालाड में एक छोटा फ्लैट ले लिया था, उनके पास मारूती 800 कार भी थी. जब गाड़ी खरीदी थी, तो उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम्हारे लिए ली है. वो मुंबई से चिट्ठीयां लिखते थे, लेकिन वो मेरे पापा-मम्मी, भाई के नाम की होती थी, मेरा जिक्र तो इन डायरेक्टली होता था.
राजू श्रीवास्तव की ग्लैमरस दुनिया से आपने खुद को इतना दूर क्यों रखा था?
घर में एक ही स्टार काफी था. नहीं, दरअसल मैं अपनी रूटीन में काफी खुश थी. बच्चों और राजू को संभालना ही मेरा रूटीन था. हां, बस एक बार मैंने नच बलिए 6 किया था. हालांकि उस ऑफर को लेकर मैं बिल्कुल भी सहज नहीं थी. डांस, सिंगिंग इन चमकती चीजों से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता ही नहीं रहा था. राजू ने मुझसे शो को लेकर बस यही कहा कि मिल लो, मना कर देना. दो-तीन बार मैंने उन्हें मना भी किया, लेकिन पता नहीं, कब मैं राजू जी की बातों में आ गई और वो शो किया. अब जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है कि बहुत अच्छा किया. उस वक्त मैं राजू के साथ डांस रिहर्सल एन्जॉय करती थी. हम बहुत वक्त साथ गुजारते थे. अब उन्हीं डांस के वीडियो को देखकर खुश हो जाती हूं. उनके साथ किया हुआ वो डांस मेरी बेस्ट मेमोरीज में से एक हैं, इन्हें जिंदगीभर सहेज कर रखूंगी.