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AIR में रिजेक्शन, 12 फ्लॉप फिल्में, एक रात में बॉलीवुड के 'शहंशाह' नहीं बने अमिताभ बच्चन

अमिताभ को फिल्में भी मिलनी शुरू हुईं. शुरुआत में उन्हें जो फिल्में मिलतीं उसमें वे या तो सपोर्टिंग रोल में रहते और या फिर अगर लीड रोल में रहते तो वे फिल्में चलती ही नहीं. अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी से लेकर सफलता का स्वाद चखने के लिए उन्हें 12 फिल्मों का इंतजार करना पड़ा.

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अमिताभ बच्चन
अमिताभ बच्चन

फिल्म इंडस्ट्री में लगभग 5 दशक पूरा कर चुके बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपना 78वां जन्मदिन मना रहे हैं. अमिताभ ने अपने अभिनय और कला के जरिए इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है कि अब उन्हें देख कर ऐसा लगता ही नहीं है कि उन्होंने कभी संघर्ष भी किया होगा. मगर संघर्ष के बिना किसी भी इंसान को इतना बड़ा मुकाम हासिल भी नहीं होता. अमिताभ खुद भी इस चीज को बेखूबी समझते हैं और अपने काम की रिस्पेक्ट करते हैं. प्रशंसकों का ढेर सारा प्यार उन्हें मिलता है. जहां जाते हैं लोगों की भीड़ लग जाती है. देश ही नहीं दुनियाभर में उन्हें पसंद किया जाता है. मगर अमिताभ के जीवन का भी एक संघर्ष रहा है जो भले ही उनकी सफलताओं के बीच कहीं धुंधला पड़ गया हो मगर कभी मिटाया नहीं जा सकता. 

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अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को प्रयागराज में हुआ था. उनके पिता हरिवंश राय बच्चन पहले से ही एक जाने माने कवि थे. अमिताभ यूं तो बचपन में इंजीनियर बनना चाहते थे मगर अभिनय का शौक भी उन्हें बचपन से था. अमिताभ पढ़ाई में भी बहुत अच्छे थे. जिस बुलंद आवाज और लंबे कद की वजह से अमिताभ को शोहरत मिली एक समय ऐसा भी था जब इसी वजह से उन्हें बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा था.

ऑल इंडिया रेडियो ने किया था रिजेक्ट

शुरुआत में उनकी आवाज को मोटी बताकर ऑल इंडिया रेडियो से उन्हें निकाल दिया गया. उस समय की एक्ट्रेस भी इतनी लंबी नहीं हुआ करती थीं ऐसे में उनके साथ किसी जोड़ी का फिट बैठना भी मुश्किल था. डॉयरेक्टर्स और प्रड्यूसर्स रिस्क लेने से कतराते थे. उनका सबसे पहला काम फिल्मों में जो रहा वो था मृणाल सेन की फिल्म भुवन शोम के लिए वॉइस नेरेटर का. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों का वॉइस नैरेशन किया. इन संघर्ष के दिनों में कुछ लोगों ने बच्चन साहब की खूब मदद की. इनमें से एक नाम महमूद का लिया जाता है.

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सपोर्टिंग रोल में किया काम

अमिताभ को फिल्में भी मिलनी शुरू हुईं. शुरुआत में उन्हें जो फिल्में मिलतीं उसमें वे या तो सपोर्टिंग रोल में रहते और या फिर अगर लीड रोल में रहते तो वे फिल्में चलती ही नहीं. अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी से लेकर सफलता का स्वाद चखने के लिए उन्हें 12 फिल्मों का इंतजार करना पड़ा. फिर आई फिल्म जंजीर जिसने अमिताभ बच्चन के साथ-साथ पूरे बॉलीवुड की रूपरेखा ही बदल कर रख दी. एंग्री यंग मैन का इजाद हुआ, कॉमन मैन का गुस्सा अमिताभ के किरदारों में देखने को मिला, उन्होंने रोमांस किया, एक्शन किया, और कॉमेडी की. यहां तक कि कुछ संवेदनशील रोल भी प्ले किए और 70 के दशक में उनका प्रभाव इतना तगड़ा रहा कि इंडस्ट्री को अमिताभ बच्चन के पहले और अमिताभ बच्चन के बाद का बॉलीवुड कहा जाने लगा.  

आज अमिताभ बच्चन जिस मुकाम पर हैं वहां तक पहुंचने की कल्पना करना भी किसी के बस की बात नहीं. वे लगातार फिल्में कर रहे हैं. विज्ञापन कर रहे हैं. कोरोना को मात देकर काम में फिर से जुट गए हैं. अपने पॉपुलर शो कौन बनेगा करोड़पति के 12वें सीजन को होस्ट कर रहे हैं. आज अमिताभ 78 की उम्र में भी युवाओं की प्रेरणा है. इससे बड़ी बात भला और क्या हो सकती है.

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