जीशान अयूब इन दिनों अपनी फिल्म हड्डी को लेकर चर्चा में हैं. यहां उनका का किरदार भी बड़ा दिलचस्प है, वो फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का लव इंट्रेस्ट प्ले कर रहे हैं. उन्होंने हमसे अपनी इस फिल्म और अपने करियर की जर्नी पर खुलकर बातचीत की है.
अब प्यार की परिभाषा को लेकर क्लीयर हूं
हड्डी के लिए हामी भरने के कारण पर जीशान कहते हैं, मुझे अपने किरदार को समझाना सबसे मुश्किल काम लगता है. फिल्म में वो एक एनजीओ चलाता है, वकील है.. उसकी अपनी एक लड़ाई है... वो नवाजुद्दीन सिद्दीकी का लवर है. उसके प्यार में है. इस किरदार को लेकर मेरे जेहन में यह था कि ये आदमी एकदम आम सा लगना चाहिए. जैसे आपको लगे कि अरे ये हमारे ही बीच का ही है. दफ्तर, मेट्रो जैसी जगहों में यह मिलता है. किरदार बहुत ही सादा है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता है. इस किरदार से मेरा टेकअवे यही रहा है कि मुझे पहले पता नहीं था कि एक ट्रांसजेंडर को प्यार के लिए कैसे अप्रोच किया जा सकता है, वो अब समझ आ गया है. मैंने समझा है कि प्यार एक फिजिकल चीज नहीं है. आप उस आदमी के रूह से प्यार करते हैं. मैं अगर किसी के साथ एक घंटा बिना कुछ बोले वक्त गुजार सकता हूं, इसका मतलब कि बॉन्डिंग कमाल की है. यह प्यार रूहानी है.
नवाज भाई ने सहज कर दिया था
नवाज के साथ रोमांस करने के एक्स्पीरियंस पर जीशान कहते हैं, सेट पर वो अक्सर कहते थे कि अरे चलो कोना पकड़ लेते हैं. एक दोनों ही एनएसडी से थे. हम दोनों का गिव ऐंड टेक बहुत ही स्मूथ था. हमारा पहला सीन भी कुछ ऐसे ही शूट हुआ, जहां हम शादी कर रहे हैं. इतना ही ब्रीफ दिया गया था कि कोर्ट मैरिज है और आप दोनों की शादी हो रही है. हम वहां बहुत ही नैचुरल तरीके से एक्शन-रिएक्शन कर रहे थे. हमें कुछ बताया नहीं गया था, वहीं से केमिस्ट्री बननी शुरू हो गई थी. उन्होंने कंफर्ट दिया कि जिससे मैं खुलकर खुद को एक्सप्रेस कर पाया था. उन्होंने दरअसल मेरे किरदार को बहुत आसान बना दिया था.
एक वक्त के बाद फर्क नहीं पड़ता है
जीशान एक लंबे समय से इंडस्ट्री में हैं. जमीन तलाशने पर कहते हैं, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट को बहुत बड़े एसेट के तौर पर नहीं माना जाता है. ये क्रूर सच्चाई है. हां, आपके अंदर टैलेंट है, तो बेशक आपको जगह मिल जाएगी, लेकिन भेदभाव तो होता ही है. फिर खुद ही एहसास होता है कि यार इनको चाहिए ही नहीं. इन्हें जरूरत ही नहीं है. ये ऐसे लोग हैं कि आपने एक्टिंग कर ली, तो बहुत बढ़िया और नहीं की, तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. ये मीडियोक्रिटी सेलिब्रेट करने पर यकीन रखते हैं. उसे देखकर आपको बुरा लगता है. एक पॉइंट के बाद हंसी आने लगती है और अब तो फर्क ही नहीं पड़ता है. पहले फ्रस्ट्रेशन था, फिर गुस्सा, हंसी और अब फर्क नहीं पड़ने वाला एटीट्यूड आ चुका है. आप यह जानते हो कि इसे बदला नहीं जा सकता है. आप घुसकर कोई क्रांति ला देंगे, ये ऐसा करने नहीं देंगे. यहां क्रांती तो नहीं आ पाएगी. हां, यहां ये होगा कि जो सेंसिबल लोग काम कर रहे हैं और आपके टैलेंट को तवज्जों दे रहे हैं, वो बढ़ जाएंगे. देखो, मास लेवल पर जो चल रहा है, उसे बदलने में वक्त तो लगेगा ही. एक वक्त होगा, जब सेंसिबल लोगों की तादाद बढ़ेगी और मीडियोक्रिटी सेलिब्रेट करने वाले घटेंगे. बस इसी उम्मीद से आप आगे बढ़ते जाते हैं.