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'मेरा सक्सेफुल होना, बाकी लोगों के लिए परेशानी बन गया है', क्यों बोले रैपर बादशाह

रैपर बादशाह अपने म्यूजिक टूर पागल को लेकर खासे उत्साहित हैं. इस टूर के साथ-साथ बादशाह बॉयकॉट बॉलीवुड ट्रेंड, खुद पर लगे फेक फॉलोअर्स के इल्जाम आदि कई मुद्दों पर हमसे बातचीत की.

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बादशाह
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बॉलीवुड इंडस्ट्री के नंबर वन रैपर, सिंगर बादशाह जल्द ही अपने इंडियन म्यूजिकल टूर की शुरुआत करने जा रहे हैं. बादशाह ने अपने इस टूर का नाम 'पागल' रखा है. अपने इस टूर और करियर, सोशल मीडिया निगेटिविटी पर बादशाह हमसे ढेर सारी बातचीत करते हैं. 

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कभी जिंदगी में ऐसी पागलपन वाली हरकतें की हैं, जो बाकी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया हो?
-मुझे लगता है, मेरा सक्सेसफुल बनना... बहुत लोगों के लिए परेशानी बन गया है. सच्चाई यही है कि मैंने किसी को परेशान नहीं किया है, लेकिन कुछ लोग खुद ही परेशान हो रहे हैं, तो इसका मैं कुछ नहीं कर सकता. मैंने हमेशा अपने दिल को बस फॉलो किया है, बाकि किसी की परवाह नहीं है. 

तो आपकी डिक्शनरी में 'पागल' की परिभाषा क्या है?
- बस यही कि अपने दिल की सुनते जाओ, इसकी परवाह ही मत करो कि लोग क्या कहते हैं. पागल शब्द को दुनिया वालों के समझ से परे है. कोई भी चीज इंसान के समझ के बाहर होती है, तो उसे यही कहते हैं कि पागल है. लेकिन इसका कतई मतलब नहीं है कि आपका मेंटल स्टेटस खराब है. आप बस उनसे और बाकी लोगों से डिफरेंट होते हैं. 

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आर्टिस्ट के तौर पर म्यूजिक को रेकॉर्डिंग रूम में ज्यादा इंजॉय करते हो या स्टेज परफॉर्मेंस ?
- मेरा जवाब हर बार स्टेज ही होगा. स्टेज में परफॉर्म करते वक्त आपको फैंस से तुरंत रिएक्शन मिलता है. वहीं स्टूडियो में जब गाना र‍िकॉर्ड होता है, तो वो कब बाहर निकलेगा इस पर आपका कंट्रोल नहीं होता है. स्टेज पर आप जो कुछ भी करते हैं, उसका नशा अलग होता है. लाइव ऑडियंस को देखना, उनको महसूस करना, वो आर्टिस्ट के लिए एक अलग तरह का इमोशन है. 

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आपने कहा कि इस टूर में फैंस आपको और करीब से जान पाएंगे, आपका इमोशनल साइड देखेंगे?
- हां, मेरे बारे में बहुत कुछ है, जिसकी जानकारी फैंस को नहीं है. कहीं इंटरनेट पर लिखा है कि मैं बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ा हूं, जो गलत है. मैं सेंट स्टीफन दिल्ली में कुछ समय के लिए पढ़ा. इसके बाद मैंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से अपनी इंजीनियरिंग की है. हालांकि ये तो बाहरी इंफोर्मेशन है, वैसे फैंस जान पाएंगे कि मैं इंसान कैसा हूं. काफी लोग मुझे ऐसे देखते हैं कि अच्छा ये तो फैंसी कपड़े पहनकर गाने गाता है. मैं कैसा इंसान हूं, ये बात बहुत कम लोगों को पता है. बस वही कोशिश होगी कि मैं टूर के दौरान फैंस के आमने-सामने बैठकर बात करूं. 

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 हमारे जरिए थोड़ा बताना चाहेंगे कि असल में कैसे इंसान हैं?
-देखो, जैसे मेरे गाने हैं, मैं वैसा तो बिलकुल भी नहीं हूं. मैं ताबड़-तोड़ पार्टी वार्टी नहीं करता हूं. बहुत ही रिलैक्स और शांत रहने वाला इंसान हूं. मुझे तो पार्टी के नाम से ही थकान हो जाती है. मैं अकेले गाड़ी में बैठकर म्यूजिक सुनता रहता हूं, अकेले डांस करता हूं. मुझे लगता है कि बातचीत बहुत जरूरी होती है, आइडियाज शेयरिंग जरूरी है. 

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म्यूजिक के स्तर पर वर्ल्ड मैप में हमने वेस्ट कल्चर की तरह खुद को स्टैबलिश नहीं किया है. यहां रॉकस्टार कल्चर दिखता नहीं है. इसकी क्या वजह मानते हैं आप?
-कहीं न कहीं बॉलीवुड का डोमिनेशन रहा है. हालांकि अब पिछले कुछ सालों में बदलाव जरूर आया है. बहुत बड़ा कारण यह है कि हमारे यहां, जो किरदार आप देखते हैं, लोग उस किरदार के प्यार में पड़ते हैं. वहीं वेस्ट में लोग अपनी निजी स्टोरी बताते हैं, जिससे  बाहर की ऑडियंस उनकी ओरिजनैलिटी के प्यार में पड़ने लगते हैं. जब ऑडियंस उनसे अटैच हो जाते हैं, तो वो अपने आपमें ही रॉकस्टार बन जाते हैं. यहां पर अब जाकर वो कल्चर डेवलप होना शुरू हुआ है. लोग अपनी कहानियां बताने से हिचक नहीं रहे हैं. मैं अगर गाना गा रहा हूं, तो मैं ही हूं और कोई नहीं है, तब जाकर लोग फैन बनते हैं. वीडियो देखने के बाद वो आपकी तरह बनना चाहते हैं, आपको देखना चाहते हैं, आपको छूना चाहते हैं. यह कल्चर भी धीरे-धीरे चल पड़ा है. 

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इंडस्ट्री में बनने वाले म्यूजिक को लेकर लगातार कंपलेन है कि मेलोडी मिसिंग है. आपकी राय?
-ऐसी बात नहीं है. यहां हर तरह का म्यूजिक है. आपको मेलोडी चाहिए, तो वो भी आपको मिलेगा. आज इतने प्लैटफॉर्म है कि आपके पास ऑप्शन बहुत है. आप ढूंढे, जरूर मिलेंगे. हमारे यहां के आर्टिस्ट्स तो हर तरह की म्यूजिक बना रहे हैं, क्लासिकल, मेलोडी, शोर सबकुछ बन रहे हैं. आपको अपने मिजाज का म्यूजिक मिल जाएगा. आपको मेलोडी सुनना है या शोर, ये आप पर निर्भर करता है. आप कंपलेन मत करो. 

सोशल मीडिया पर बायकॉट बॉलीवुड जैसी कई निगेटिविटी चल रही हैं. आप इन निगेटिविटी को कैसे हैंडल करते हैं?
- जो इंटरनेट पर है, वो इंटरनेट तक ही सीमित है. असली दुनिया बहुत अलग है. इंटरनेट पर ये भी न्यूज चल रही है कि मेरे फेक फॉलोअर्स हैं. अब मेरे कॉन्सर्ट में जो 7 से 8 हजार फैंस आने वाले हैं, वो भी फेक ही होंगे. मैं तो कहूंगा कि इंटरनेट को भूलकर आप असली दुनिया में रहें. अपने मां-बाप से प्यार करें, उनके साथ रहें, जो आपको मैटर करते हैं. वही आपके असली फॉलोअर्स और लाइक्स हैं. 


 

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