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आशा पारेख का नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की उन एक्ट्रेसेज में शामिल है, जिन्हें लेजेंड्स में गिना जाता है. हिंदी के साथ-साथ पंजाबी, गुजराती और कन्नड़ में भी हिट और पॉपुलर फिल्मों का हिस्सा रहीं आशा पारेख को सिनेमा का कोई भी सम्मान मिलना हैरानी की बात नहीं होती. लेकिन 2022 में जब फिल्म इंडस्ट्री में 'असाधारण योगदान' के लिए 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड' दिए जाने की अनाउंसमेंट सामने आई, तो एक बड़ा कन्फ्यूजन पैदा हो गया.
वजह ये थी कि उन्हें 2020 में, सिनेमा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े अवार्ड्स- नेशनल फिल्म अवार्ड्स, में दादासाहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका था. ये अवार्ड भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंडर, इंडियन सिनेमा में 'असाधारण योगदान' के लिए दिए जाते हैं. अब सवाल ये था कि आशा पारेख को 2 साल बाद फिर से ये लाइफटाइम अचीवमेंट वाला अवार्ड क्यों दिया जा रहा है? जवाब ये निकला कि दोनों अवार्ड्स ही अलग-अलग हैं!
किसी भी कलाकार को उसकी कला के लिए, उसके योगदान के लिए अवार्ड मिलना उसकी मेहनत का एक सम्मान होता है. फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के काम को सम्मानित करने के लिए हर साल तमाम अवार्ड्स दिए जाते हैं. इस साल भी अवार्ड सीजन की शुरुआत हो चुकी है और 2023 का पहला अवार्ड शो बनकर वही 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड' चर्चा में है, जिसमें आशा पारेख को सम्मानित किया गया था. 2020 वाला नहीं, 2022 वाला!
'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स 2023'
अगर आप सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज की खबर रखते हैं तो सोमवार की शाम से ही आपकी फीड में तमाम बॉलीवुड सेलेब्रिटीज 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स 2023' में आते-जाते-ट्रॉफी उठाते-फोटो खिंचाते दिख रहे होंगे. फैन्स ने भी अपने फेवरेट सेलेब्स और फिल्मों को मिले अवार्ड्स का सेलेब्रेशन शुरू कर दिया है. जैसे फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने 'द कश्मीर फाइल्स' को 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स 2023' में 'बेस्ट फिल्म' का अवार्ड मिलने की खुशखबरी ट्विटर पर फैन्स के साथ शेयर कर दी है. और 'नागिन 6' के लिए टेलीविजन सीरीज में बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड पाने वाली तेजस्वी प्रकाश को फैन्स ने बधाइयां भेजनी शुरू कर दी हैं.
जो अवार्ड 2022 में आशा पारेख को दिया गया था, वो इस साल वेटरन एक्ट्रेस रेखा को दिया गया है. 2023 में ये अवार्ड्स पाने वालों में आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, वरुण धवन जैसे नाम हैं. सोशल मीडिया से लेकर बहुत सारी न्यूज हेडलाइन्स देखने पर भी आपको बिल्कुल फील होगा कि ये 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स' हैं. लेकिन ये कहना सरासर गलत है क्योंकि इन अवार्ड्स का पूरा रियल नाम है- दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स. 'भारतीय सिनेमा के जनक' दादासाहेब फाल्के का नाम दोनों अवार्ड्स में हैं इसलिए हर साल ये कन्फ्यूजन क्रिएट होता है.
परंपरा... प्रतिष्ठा... और सम्मान!
कलाकारों को मिलने वाला अवार्ड सिर्फ उनके टैलेंट और मेहनत का सम्मान ही नहीं करता, बल्कि उनकी फील्ड में उनकी ब्रांड वैल्यू को भी बढ़ाता है. तारीफ छोटी या बड़ी नहीं होती, लेकिन किससे मिल रही है इसका बड़ा फर्क पड़ता है. इसी तरह अवार्ड्स के मामले में एक शब्द खूब इस्तेमाल होता है- प्रतिष्ठित.
भारत सरकार के सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने देश के सबसे 'प्रतिष्ठित' माने जाने वाले फिल्म अवार्ड्स, नेशनल फिल्म अवार्ड्स की शुरुआत की थी. ये अवार्ड भारत के राष्ट्रपति के हाथ से दिया जाता है. देशभर में सिनेमा से जुड़े नामी लोगों की एक ज्यूरी बनाई जाती है, जो फिल्मों को परखते हैं और फिर अवार्ड्स देने के लिए बेस्ट फिल्मों, कलाकारों और टेक्नीशियन को चुनते हैं. यही वजह है कि ये फिल्म अवार्ड्स बेहद प्रतिष्ठित कहे जाते हैं. नेशनल फिल्म अवार्ड्स में फिल्मों और कलाकारों को दिए जाने जाने वाले अवार्ड्स को 'रजत कमल' और 'स्वर्ण कमल' कहा जाता है. और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड का नाम 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स' है. मगर पिछले कुछ सालों में दादासाहेब फाल्के के नाम पर कई और दूसरे अवार्ड्स शुरू हो चुके हैं.
'प्रतिष्ठा' नापने का वैसे तो कोई थर्मामीटर नहीं होता. लेकिन किसी भी अवार्ड को चलाने वाली संस्था क्या है, उसकी ज्यूरी में कौन बैठता है और लिगेसी क्या है... ये सब चीजें अवार्ड्स की वैल्यू बढ़ाती हैं. आज आपको नेशनल अवार्ड्स के अलावा दादासाहेब फाल्के के नाम पर चल रहे कुछ पॉपुलर अवार्ड्स की जानकारी देते हैं. जानकारी के हिसाब से आप स्वयं तय कर लें कि कौन सा अवार्ड 'सेलिब्रेट' करने लायक है.
दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स
शुरू करते हैं उस अवार्ड से जो फिलहाल सेलिब्रेट किया जा रहा है. दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DPIFF) की ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है कि इसकी 'फाउंडेशन' 2012 में हुई और ये 'एस्टेब्लिश' 2016 में हुआ. इसमें हिंदी का 'स्थापना' शब्द किस साल पर फिट होता है ये क्लियर नहीं है, इसलिए हम आपको अंग्रेजी में ही बता रहे हैं.
वेबसाइट पर इसे 'भारत का एकमात्र इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' बताया गया है. ऑफिशियल वेबसाइट पर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर, 2023 में गृहमंत्री अमित शाह से मिले शुभकामना संदेश भी हैं. अवार्ड्स के फाउंडर अनिल मिश्रा और सीईओ अभिषेक मिश्रा हैं. इन दोनों ही लोगों के बारे में और कोई जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है.
अवार्ड्स देने वाली ज्यूरी में सिर्फ दादासाहब फाल्के के पोते चंद्रशेखर पुसालकर का नाम मिलता है. इसके अलावा ज्यूरी के अन्य किसी सदस्य, या DPIFF की मैनेजमेंट में दिख रहे लोगों का सिनेमा से कनेक्शन बताने वाली कोई जानकारी नहीं मिलती.
अवार्ड्स के क्राइटेरिया के नाम पर, वेबसाइट पर केवल 'बेस्ट शॉर्ट फिल्म' कैटेगरी के लिए अवार्ड और एक लाख रुपये कैश, और रनर-अप्स के लिए ट्रॉफी की जानकारी दी गई है. बाकी फिल्मों को केवल उनकी 'ऑरिजिनल भाषा में होना जरूरी है', और अगर ऑरिजिनल भाषा इंग्लिश नहीं है तो सबटाइटल होने चाहिए. इसके अलावा कहीं ये भी नहीं लिखा है कि फिल्म को सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट मिला होना चाहिए या नहीं. क्राइटेरिया वगैरह भले न दिखे लेकिन आपको वेबसाइट पर ये दावा जरूर दिखेगा कि 'एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के इतिहास में, पहली बार 10 प्रतिष्ठित टूरिज्म स्टेट एक इवेंट के साथ जुड़े हैं'. इस बात को कन्फर्म करने के लिए महाराष्ट्र टूरिज्म, पंजाब टूरिज्म, मध्य प्रदेश टूरिज्म वगैरह के नाम भी हैं.
इस अवार्ड शो की कैटेगरीज में भी हर साल बदलाव होते दिखते हैं. वेबसाइट पर विनर्स लिस्ट में 2020, 2021 और 2022 की लिस्ट उपलब्ध है. 2023 के जो अवार्ड्स बंट चुके हैं, उसकी लिस्ट 'विनर्स लिस्ट' क्लिक करने पर नहीं मिलती. वेबसाइट पर चूँकि 'बेस्ट शॉर्ट फिल्म' कैटेगरी के लिए अवार्ड का क्राइटेरिया स्पष्ट है तो वहीं से शुरू करते हैं. 2020 में तीन अलग-अलग शॉर्ट फिल्म्स को अवार्ड्स मिले. बेस्ट शॉर्ट फिल्म- कार्बन, क्रिटिक्स बेस्ट शॉर्ट फिल्म- योर्स ट्रूली और बेस्ट डायरेक्टर शॉर्ट फिल्म- कबीर थापर और केविन कैलाश मुथैया (मोह के लिए) चुने गए.
2021 में तो DPIFF अवार्ड्स ने 'पैरासाईट' के लिए 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म' का अवार्ड घोषित किया हुआ है. इस कैटेगरी में अवार्ड्स न इससे पिछले साल 2020 में दिए गए, और न अगले साल 2022 में. 2020 तक 'क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर' नाम का अवार्ड नहीं था. ये कैटेगरी 2021 में पहली बार आई और पहला अवार्ड सुशांत सिंह राजपूत को दिया गया. 2022 में ये अवार्ड मिला सिद्धार्थ मल्होत्रा को 'शेरशाह' के लिए. 2023 में वरुण धवन को इस अवार्ड शो में 'भेड़िया' के लिए 'क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर' अवार्ड मिलने की खबर आपको मिल ही गई होगी.
दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड्स
2018 में कार्तिक आर्यन, शाहिद कपूर, दिलजीत दोसांझ समेत कई बड़े नामों को 'दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड' मिला था. कई बॉलीवुड स्टार्स तो अवार्ड सेरेमनी में थे ही, करण जौहर जैसे बड़े नाम तक पहुंचे थे. 2019 में ईशान खट्टर और जाह्नवी कपूर को 'धड़क' के लिए यही दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड मिला था. कुबरा सैत, अहाना कुमरा और नवाजुद्दीन सिद्दीकी को भी 2019 में इस अवार्ड सेरेमनी में सम्मानित किया गया था.
कमाल ये है कि इस अवार्ड शो की ऑफिशियल वेबसाइट तक गूगल पर झट से खोज पाना मुश्किल है. इनका फेसबुक पेज जरूर आराम से मिल जाता है, जहां एक जीमेल आईडी और एक फोन नंबर मौजूद है, जो बंद है. फेसबुक पेज पर भी ऑफिशियल वेबसाइट का लिंक नहीं दिखता, लेकिन इस अवार्ड शो की मीडिया कवरेज के लिंक और वीडियो बड़ी लगन और मेहनत से लगातार शेयर किए गए हैं. फेसबुक पेज पर मौजूद जानकारी बताती है कि कोरोना के बाद से ये अवार्ड्स बंद हैं और जल्द ही वापस लौटकर फिर से कलाकारों को 'सम्मान देने' का पक्का इरादा भी जताया गया है.
दादासाहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवार्ड्स
इस अवार्ड शो की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कम से कम दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन की ऑफिशियल वेबसाइट पर 'ज्यूरी' का जिक्र है. इनकी ज्यूरी में फिल्ममेकर्स अब्बास मस्तान, अनीस बज्मी, ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन वगैरह के नाम हैं. हालांकि, 2018 में अतुल मोहन ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा था कि वो अवार्ड्स देने वालों को जानते तो हैं, मगर उन्हें कभी इसकी ज्यूरी में शामिल होने को ही नहीं कहा गया.
ज्यूरी के साथ एडवाइजरी बोर्ड में- डेविड धवन, असरानी, सचिन पिलगांवकर, शबीना खान, मेहुल कुमार जैसे नाम भी हैं जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं. दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन की ऑफिशियल वेबसाइट पर ये बात खासतौर पर मेंशन है कि एकमात्र उन्हीं का अवार्ड शो है जिसे फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयी (FWICE) का सपोर्ट हासिल है.
ऑफिशियल वेबसाइट पर दी हुई जानकारी बताती है कि 2016 में फिल्म MSG (मेसेंजर ऑफ गॉड) के स्टार बाबा राम रहीम सिंह को इंडियन सिनेमा में 'असाधारण योगदान' के लिए दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड दिया गया था. इसी साल मनोज बाजपेयी को 'क्रिटिक्स बेस्ट एक्टर' का अवार्ड भी दिया गया.
दादासाहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन के कमिटी मेम्बर्स और ट्रस्टीज में कुछेक नाम ऐसे हैं जो कभी न कभी, किसी रूप में तो फिल्म इंडस्ट्री से जरूर जुड़े रहे हैं. मगर इनके साथ ही ऐसे लोग भी हैं जिनमें से कोई NGO से है, कोई बॉडीबिल्डर है तो कोई इवेंट मैनेजमेंट और फिल्म मीडिया से जुड़ा हुआ है.
2016, 2017, और 2018 में इन अवार्ड्स की सेरेमनी से तस्वीरें ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद हैं. इनमें मनीषा कोइराला, राखी सावंत जैसे सेलेब्स को आप तुरंत पहचान जाएंगे, लेकिन कईयों को पहचानने में थोड़ा समय लग सकता है. एक्टर रोहित रॉय की एक अवार्ड शो होस्ट करने की भी तस्वीर मौजूद है.
दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स साउथ
'दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' वाले ही 'दादासाहेब फाल्के अवार्ड्स' (साउथ) भी देते हैं. धनुष, अजित कुमार, नागार्जुन और रॉकिंग स्टार यश तक को ये अवार्ड्स दिए दिए जा चुके हैं.
सिनेमा, भारतीय जनता के खून में बहता है. हम लोग फिल्मों के लिए जिस कदर दीवाने हैं उसकी मिसाल देते हुए तो फिल्मों में डायलॉग लिखे जाते हैं. इसलिए कम से कम एक बार, दादासाहेब फाल्के के बारे में जरूर पढ़ना चाहिए, भले केवल विकिपीडिया पेज पर ही पढ़ें.
दादासाहेब के बारे में पढ़ने के बाद आपको समझ में आएगा कि देश की पहली फीचर फिल्म बनाने के पीछे उन्होंने कितना संघर्ष किया था. कितने ही लोन लिए, लंदन में फिल्में बनाने का ऑफर छोड़ा, बहुत बड़े कर्जे में आ गए मगर फिल्में जरूर बनाईं. उनकी पूरी कहानी जानने के बाद समझ आता है कि दादासाहेब एक ही थे और एक ही रहेंगे. लेकिन उनके नाम पर भारत सरकार वाले 'प्रतिष्ठित' अवार्ड्स के अलावा जिस तरह नए अवार्ड्स उग रहे हैं उनसे फिल्मों, एक्टर्स और उनके करियर को कितना फायदा होगा पता नहीं!