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जब इमरान हाशमी की 'आवारापन' के खिलाफ पाकिस्तान में निकला फतवा, दर्शकों में था बम धमाकों का डर

इमरान हाशमी के करियर में 'आवारापन' वो फिल्म बनकर आई थी जिसकी हाईलाइट उनकी एक्टिंग थी. आज इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इमरान की इस फिल्म को लेकर पाकिस्तान में कितना विवाद हुआ था? आइए बताते हैं...

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'आवारापन' के खिलाफ पाकिस्तान में निकला था फतवा
'आवारापन' के खिलाफ पाकिस्तान में निकला था फतवा

2007 में आई फिल्म 'आवारापन' के सीक्वल की अनाउंसमेंट उन बॉलीवुड फैन्स के लिए एक बड़े सरप्राइज की तरह आई जो सोमवार को इमरान हाशमी का बर्थडे मना रहे थे. 'आवारापन 2' के लिए फैन्स की इस एक्साइटमेंट के पीछे एक ठोस वजह भी है. करियर के शुरुआती दौर में इमरान जब 'एक सीरियल किसर' के टैग और लवर बॉय की इमेज के साथ आगे बढ़ रहे थे तब 'आवारापन' वो फिल्म बनकर आई जिसकी हाईलाइट उनकी एक्टिंग थी. 

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18 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म जब रिलीज हुई थी तो इंडियन बॉक्स ऑफिस पर करीब 8 करोड़ का ही नेट कलेक्शन कर सकी और फ्लॉप रही थी. लेकिन डीवीडी और फिर टीवी पर आने के बाद धीरे-धीरे इस फिल्म को इसके हिस्से की फैन फॉलोइंग मिल गई और आज इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इमरान की इस फिल्म को लेकर पाकिस्तान में कितना विवाद हुआ था? आइए बताते हैं... 

इमरान के करियर में एक अलग फिल्म थी 'आवारापन'
2003 में 'फुटपाथ' से डेब्यू के बाद इमरान को 2004 में आई 'मर्डर' से जमकर पॉपुलैरिटी मिली. वो एक नए तरह के हीरो थे, जिसके प्यार में कमिटमेंट से ज्यादा फिजिकल एक्सप्रेशन और रोमांच था. वो प्यार-व्यार से ज्यादा रोमांस का खिलाड़ी यानी प्लेबॉय था. इमरान अगले कुछ सालों में 'जहर', 'आशिक बनाया आपने' और 'अक्सर' जैसी फिल्मों से यंग ऑडियंस के बीच इसी टाइप के किरदारों में पॉपुलैरिटी कमाते रहे. लेकिन ये कामयाबी हर बार उनकी फिल्मों को नहीं मिल रही थी. 

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2005-06 में इमरान कुल 9 फिल्में कर चुके थे जिसमें से 4 ने ठीकठाक कमाई की मगर 5 फ्लॉप हुईं. उनके किरदार लगभग एक जैसे होते जा रहे थे और अब कुछ उनसे कुछ अलग करने की उम्मीद होने लगी थी. ये मौका इमरान को दिया 'आवारापन' ने, जो शायद उस दौर में पहली फिल्म थी जिसमें उनका किसिंग सीन नहीं था. 

'आवारापन' में इमरान एक नास्तिक गैंगस्टर शिवम पंडित के रोल में थे जिसकी प्रेमिका की हत्या बड़े ट्रैजिक तरीके से हो चुकी है. उसे एक लड़की पर नजर रखने का जिम्मा मिला है, जो ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार थी और उसकी एक सीक्रेट लव स्टोरी है. अपनी प्रेमिका और उससे सीखी बातों को याद करते हुए शिवम फैसला करता है कि वो इस लड़की की प्रेम कहानी पूरी करवाएगा और इसे अपने गैंगस्टर बॉस से मुक्ति दिलाएगा भले ऐसा करते हुए उसकी जान चली जाए. 

शिवम पंडित का ये किरदार, उस दौर में इमरान के किरदारों से बहुत अलग था और वो अपनी प्रेमिका के मर जाने के बावजूद उसके इश्क में पूरी तरह कमिटेड था. ऊपर से ये नास्तिक गैंगस्टर जिस तरह अपनी प्रेमिका के प्यार में स्पिरिचुअल होने लगता है, वो भी रूटीन बॉलीवुड कहानियों से अलग थी. इमरान ने 'आवारापन' में काम भी अच्छा किया था जिसकी तारीफ क्रिटिक्स ने भी जमकर की. इस फिल्म की कहानी एक कोरियन फिल्म से बहुत ज्यादा इंस्पायर थी फिर भी इसे सराहा गया. 'अवारापन' की एक और ताकत इसके बेहतरीन गाने थे. इसके एल्बम से 'तेरे मेरा रिश्ता', 'तो फिर आओ', 'माहिया' और 'मौला मौला' जमकर पॉपुलर हुए. 

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29 जून 2007 को जब 'आवारापन' थिएटर्स में रिलीज हुई तो दो ऐसी फिल्मों से क्लैश हुई जिनका शोर कई फ्लॉप देकर आ रहे इमरान हाशमी की फिल्मों से कहीं ज्यादा था. अपने धमाकेदार गानों से तहलका मचा चुके हिमेश रेशमिया की डेब्यू फिल्म 'आप का सुरूर' इसी दिन थिएटर्स में पहुंची. इसी दिन 'अपने' भी रिलीज हुई जिसमें पहली बार बॉलीवुड के तीनों देओल हीरो- धर्मेंद्र, सनी और बॉबी एक साथ थे. इनके बीच तब 'आवारापन' खो गई लेकिन वक्त के साथ इस फिल्म को ऑडियंस में कल्ट का दर्जा मिल गया. देखिए 'आवारापन 2' की अनाउंसमेंट:

पाकिस्तान में 'आवारापन' का बवाल 
'आवारापन' का बड़ा हिस्सा हांगकांग, बैंकाक और मॉस्को में शूट हुआ था और कुछ हिस्से लाहौर, पाकिस्तान में शूट हुए थे. ये उन गिनी चुनी भारतीय फिल्मों में से है जो पाकिस्तान में शूट हुई हैं. फिल्म रिलीज होने के बाद पाकितान के एक प्रोड्यूसर ने लाहौर हाई कोर्ट में फिल्म की रिलीज को लेकर केस कर दिया. 

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोड्यूसर ने 'आवारापन' की रिलीज रोकने के खिलाफ ये तर्क दिया कि पाकिस्तान में, भारत में प्रोड्यूस हुईं और भारतीय आर्टिस्ट्स की फिल्मों पर ऑफिशियली बैन है. लेकिन पाकिस्तान की मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर और सेंसर बोर्ड ने कोर्ट को दिए जवाब में कहा कि 'आवारापन' की प्रोड्यूसर UAE की अल-आलम प्लास्टिक फैक्ट्री है और इसके डिस्ट्रीब्यूटर सोहेल खान ने पाकिस्तान में फिल्म स्क्रीनिंग की इजाजत ली है. हालांकि फिल्म के क्रेडिट्स में प्रोड्यूसर महेश भट्ट और मुकेश भट्ट ही बताए गए हैं.

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सोहेल खान ने कोर्ट में डॉक्यूमेंट्स पेश करते हुए बताया कि UAE में अजमान चैम्बर्स ने 'आवारापन' का ऑरिजिन सर्टिफिकेट वेरीफाई किया है और फिल्म का प्रिंट भी वहीं से इम्पोर्ट किया गया है. पाकिस्तान सरकार ने लाहौर हाई कोर्ट में ये भी कहा कि सेंसर बोर्ड के एक नियम के तहत भारत के अलावा, विदेश में प्रोड्यूस हुई फिल्मों को, भारतीय आर्टिस्ट होने के बावजूद, पाकिस्तान में रिलीज किया जा सकता है. इसी नियम के तहत हांगकांग और पाकिस्तान में शूट हुई 'आवारापन' को रिलीज की इजाजत दी गई है. 

'आवारापन' के खिलाफ लाल मस्जिद ने जारी किया फतवा 
सरकार से इजाजत मिलने के बावजूद 'आवारापन' की पाकिस्तान रिलीज में एक बड़ा पंगा हुआ. फिल्म के रिलीज होने की खबर आते ही इस्लामाबाद, पाकिस्तान की लाल मस्जिद की शरीअत अदालत से 'आवारापन' के खिलाफ फतवा जारी हो गया. 

मौलाना अब्दुल रशीद गाज़ी ने फतवे में कहा कि ये फिल्म पाकिस्तानियों की भावनाओं को आहत करेगी क्योंकि इसमें एक हिन्दू लड़के (इमरान हाशमी का किरदार) और पाकिस्तानी लड़की (मृणालिनी शर्मा का किरदार) की प्रेम कहानी दिखाई गई है. फिल्म में लव स्टोरी इन किरदारों की नहीं थी लेकिन ये अंदाजा ट्रेलर देखकर लगाया गया होगा. फतवा जारी करने की एक और वजह ये थी कि इसमें 'काफिर' हैं. 

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क्या थी लाल मस्जिद से आए फतवे की वैल्यू?
उस दौर में लाल मस्जिद से आया फतवा पाकिस्तान में एक बड़ी चीज थी क्योंकि यहां से आतंकवादियों का एक संगठन चलता था जो पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करने का हिमायती था. इस संगठन ने खुलेआम पाकिस्तानी सरकार को गिराने की अपील की थी. लाल मस्जिद के लड़ाके लगातार किडनैपिंग, हत्याओं, आगजनी और दंगों की घटनाओं में शामिल थे. पाकिस्तानी सेना ने एक हफ्ते से ज्यादा चली लड़ाई (ऑपरेशन सनराइज) के बाद लाल मस्जिद को आतंकियों के कब्जे से छुड़ाया था. 

पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान के घरेलू आतंकियों के बीच सबसे बड़ी लड़ाई कहे जाने वाले इस ऑपरेशन में 154 आतंकी मारे गए थे और 50 को गिरफ्तार किया गया था. ऑपरेशन सनराइज के खिलाफ कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध छेड़ने की अपील की थी. लाल मस्जिद से जुड़े दूसरे लड़ाके भी बदला लेने की फिराक में थे. 

रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऑपरेशन सनराइज के अगले एक साल में पाकिस्तान में 88 बम धमाके हुए और लगभग 1200 लोगों की जान गई. ये जानकारी ये बताने के लिए है कि जुलाई की शुरुआत से ही पाकिस्तान में चरमपंथी आतंकवाद किस लेवल पर था. उधर इमरान हाशमी की 'आवारापन' पाकिस्तान में ऑपरेशन सनराइज (3 जुलाई-11जुलाई) के बीच, 6 जुलाई को पाकिस्तानी थिएटर्स में रिलीज हुई.  

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में 'आवारापन' के शोज में कम दर्शक जुटने को लेकर थिएटर मालिकों ने बात की थी. उनका मानना था कि लोगों में इस बात का डर है कि सिनेमा हॉल सुसाइड बॉम्बिंग का निशाना बन सकते हैं. ये भी एक विडंबना ही है कि जिस फिल्म का लीड गैंगस्टर किरदार हथियार छोड़ने की तरफ बढ़ता नजर आया था, उसे लेकर पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं का डर था. 

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