एक्टर जुगल हंसराज ने हाल ही में अपने बॉलीवुड सफर, शाहरुख खान के साथ काम करने के अनुभव और मोहब्बतें की 25वीं एनिवर्सरी पर बड़े पर्दे पर लौटने के बारे में बात की. वो हाल ही में नादानियां फिल्म में इब्राहिम अली खान के पिता के रोल में दिखे थे. आजतक से बातचीत में जुगल ने बताया कि वो इस बात से कितना हैरान होते हैं कि उनके काम को आइकॉनिक माना जाता है. उन्हें आज भी मासूम, मोहब्बतें और बाकी फिल्मों-गानों के लिए याद किया जाता है.
आज भी आइकॉनिक हैं फिल्में
जुगल बोले कि "मुझे नहीं पता कि मासूम के अलावा मेरी कौन सी फिल्म समय की कसौटी पर खरी उतरती. मैं गानों के मामले में भाग्यशाली रहा हूं. लोग अभी भी मेरे गाने याद करते हैं, लेकिन उन फिल्मों के मामले में जो काफी पुरानी हो चुकी हैं, मुझे लगता है कि मासूम ही एकमात्र ऐसी फिल्म है. फिर, जाहिर है, मोहब्बतें है- मुझे अभी भी इसके लिए बहुत पहचाना जाता है. ये एक बहुत ही रेप्यूटेटेड फिल्म है, इसलिए ये निश्चित रूप से लोगों से जहन में बनी हुई है.''
मोहब्बतें के लिए बने न्यूकमर
मोहब्बतें की शूटिंग के अपने अनुभव को याद करते हुए जुगल कहते हैं "ये एक लंबा सफर था. जब मुझे फिल्म के लिए साइन किया गया, तब तक मैं लीड एक्टर के तौर पर तीन या चार फिल्में कर चुका था. लेकिन मुझसे कहा गया कि 'अब खुद को एक न्यूकमर समझो. कोई और फिल्म साइन मत करो और पूरी तरह से इस पर ध्यान दो, जैसे कि ये तुम्हारी पहली फिल्म हो. क्योंकि ये यशराज फिल्म्स के साथ एक बड़ा ब्रेक था, इसलिए मैं भी सहमत हो गया. हमने छह महीने तक एक्टिंग वर्कशॉप, डांस ट्रेनिंग और बोलचाल की प्रैक्टिस की. ये सीखने का एक शानदार अनुभव था. फिल्म की शूटिंग में ही लगभग 100-130 दिन लग गए, और मैं उनमें से 80-90 दिनों तक सेट पर रहा. मेरी सबसे पसंदीदा याद यश चोपड़ा की फिल्म का हिस्सा बनना और हर दिन उन्हें सेट पर देखना था. ये वाकई खास था.''
शाहरुख ने सिखाया टीम-स्पिरिट
मोहब्बतें की एक खास बात बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ काम करना था. शाहरुख के काम करने के तरीके के बारे में बात करते हुए जुगल ने कहा कि "शाहरुख खान के साथ काम करना शानदार रहा. उनके बारे में मैं ऐसा कुछ नहीं कह सकता जो पहले न कहा जा चुका हो. वो एक कम्प्लीट टीम प्लेयर्स में से एक हैं. मैंने उनसे जो सीखा वो ये है कि ये सिर्फ आपके अपने प्रदर्शन के बारे में नहीं है, वो सुनिश्चित करते हैं कि पूरा सीन और उसमें मौजूद हर कोई चमके. उनका मानना ये है कि सिर्फ उनका हिस्सा ही नहीं, बल्कि पूरी फिल्म शानदार होनी चाहिए. मोहब्बतें बनने के समय वे पहले से ही एक बड़े स्टार थे, फिर भी वे हम तीन लड़कों में से एक की तरह थे. वो इतनी ऊर्जा और कड़ी मेहनत लेकर आए कि उनके साथ काम करना शानदार था.''
री-रिलीज हो मोहब्बतें
बॉलीवुड में फिर से फिल्मों के रिलीज होने का चलन है, जुगल हंसराज का मानना है कि मोहब्बतें सिनेमाघरों में वापसी के लिए एक मजबूत दावेदार हो सकती है. 'ये अक्टूबर 2000 में रिलीज हुई थी, इसलिए इस साल इसकी 25वीं सालगिरह है. ये फिर से रिलीज होने का एकदम सही समय हो सकता है. ये एक मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्म है."