एक खोया लड़का जिसकी तलाश उसके घरवाले कर रहे हैं. उसके बारे में पता लगाने का जिम्मा एक पत्रकार ने उठाया है, जिसे कई चैलेंज का सामना करना पड़ेगा. फिल्म 'लॉस्ट' की कहानी सिर्फ इतनी-सी है, लेकिन इसकी परतें काफी गहरी हैं. हम सभी को पता है कि सिनेमा और राजनीति सबसे पावरफुल सब्जेक्ट्स हैं. इनके इर्द-गिर्द घूमती कई कहानियां हम सभी ने पर्दे पर देखी हैं. इसी तरह सच्ची घटना पर बनी फिल्म 'लॉस्ट' भी अच्छी मिस्ट्री और परफॉरमेंस के साथ कुछ नया आपको परोसने आई है.
क्या है कहानी?
कोलकाता में सेट इस फिल्म में पत्रकार विधि साहनी (यामी गौतम) एक यंग थिएटर आर्टिस्ट ईशान भारती (तुषार पांडे) के गायब होने की स्टोरी को फॉलो कर रही है. उसे ईशान के साथ अंकिता चौहान (पिया बाजपेयी) नाम की लड़की के रिश्ते का पता चलता है. अंकिता अब एमएलए की सीट पर अपनी नजरें गढ़ाए है और रंजन वर्मन (राहुल खन्ना) नाम के नेता के साथ काम कर रही है. क्या ईशान के गायब होने में अंकिता और रंजन का हाथ है? क्या ईशान को विधि ढूंढ पाएगी? ईशान भागा है या सही में लापता है? ये सभी सवाल फिल्म उठाती है. लेकिन क्या आपको इनके जवाब भी मिलेंगे यही 'लॉस्ट' में देखने वाली बात है.
इस फिल्म में कई बढ़िया सीन्स हैं. लेकिन फिर भी इसकी कमियां इसे नीचे लेकर जाती हैं. 'लॉस्ट' का फर्स्ट हाफ काफी बढ़िया है, जबकि इसका सेकंड हाफ मोमेंटम को तोड़ देता है. 'लॉस्ट' में कई परतें हैं. डायरेक्टर अनिरुद्ध रॉय चौधरी की इस फिल्म में सिर्फ एक पत्रकार कहानी के पीछे नहीं भाग रही, यहां क्लास और जाति के बीच फर्क आपको देखने मिलता है. यामी को पितृसत्तात्मकता सोच वाले लोगों से लड़ते देखने मिलता है, जिसे बताया जाता है कि क्राइम जर्नलिज्म 'मर्दों वाली फील्ड' है. सोच की लड़ाई भी इस फिल्म में है, जहां कहा जाता है कि पत्रकार भी एक्स्ट्रीमिस्ट जैसे ही होते हैं. दोनों ही एक वाकये को अपने हिसाब से सच बताकर दिखाने की कोशिश करते हैं. इसकी कहानी अच्छी है, लेकिन ये फिल्म आपके ऊपर उतना गहरा असर नहीं डालती, जितना इससे उम्मीद थी.
परफॉरमेंस
इस अधपकी फिल्म में कुछ एक्टर्स ने अच्छा काम भी किया है. एक क्राइम जर्नलिस्ट के रोल में यामी गौतम छाई हैं. उन्होंने अपने किरदार की नब्ज को पकड़ा और अपने रोल को काफी बढ़िया अंदाज में निभाया. ऐसा कोई सीन नहीं था जब आपको लगे कि यामी ने यहां कुछ ज्यादा ही कर दिया. साथ ही इमोशनल सीन्स में उनका काम काफी सही था. राहुल खन्ना एक नेता के रोल में काफी कमाल लगे हैं. उनका काम देखने के बाद आपका मन उन्हें और देखने को करता है. लेकिन पंकज कपूर, वो एक्टर हैं, जिन्हें देखते हुए आपको ज्यादा मजा आएगा. इस फिल्म में वो यामी को कई लाइफ लेसन देते हैं. दोनों के बीच के सीन्स ही इस फिल्म की जान हैं.
'लॉस्ट' कई सवालों के जवाब आपको अंत में नहीं मिलते. कई चीजें हैं, जो एक साथ फिल्म में चल रही हैं, लेकिन उनका अंत सही से देखने नहीं मिलता. फिल्म की रफ्तार भी इसकी कमी है. काभी तेज तो कभी बेहद स्लो चलती ये फिल्म अपना मोमेंटम तोड़ती है. साथ ही इसका क्लाइमैक्स भी काफी जल्दबाजी में दिखाया गया है, जो इसे और नीचे गिराता है. कुल मिलाकर ये फिल्म और अच्छी हो सकती थी. लेकिन अगर आप इस देखना चाहें तो जी 5 पर ये स्ट्रीम हो रही है.