
Mahima Chaudhary breast cancer: एक्ट्रेस महिमा चौधरी (Mahima Chaudhary) इस समय ब्रेस्ट कैंसर को लेकर सुर्खियों में आई हुई हैं. हालांकि, वह इससे निजात पा चुकी हैं, लेकिन अपनी दर्द भरी इस दास्तां को हाल ही में महिमा चौधरी ने एक इंटरव्यू में बयां किया. अनुपम खेर ने भी उनका एक वीडियो शेयर किया और बताया कि वह जब एक्ट्रेस से प्रोजेक्ट के सिलसिले में बात कर रहे थे, तब उन्हें महिमा चौधरी ने अपने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जानकारी दी थी.
90 के दशक की बॉलीवुड स्टार महिमा चौधरी की जिंदगी हमेशा एक पहेली की तरह नजर आई. महिमा चौधरी अपने करियर में ऊंचाइयां छू रही थीं, जब जिंदगी ने उन्हें झटका दिया. पूरा स्टारडम रातोरात खत्म हो गया. 'परदेस', 'दाग द फायर', 'दिल है तुम्हारा', 'प्यार कोई खेल नहीं' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से लोहा मनवाने वाली एक्ट्रेस महिमा चौधरी काफी लंबे समय से बॉलीवुड से गायब हैं. जबकि अपने जमाने में महिमा चौधरी ग्लैमरस एक्ट्रेस में शुमार की जाती थीं. महिमा चौधरी ने सुभाष घई की फिल्म 'परदेश' से शाहरुख खान संग डेब्यू किया था. दर्शकों की नजरों में यह पहली ही फिल्म से चढ़ गई थीं. एक्टिंग काफी दमदार नजर आई थी, लेकिन फिर यह अचानक गायब हो गईं.
अचानक हो गईं बड़े पर्दे से गायब
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि महिमा चौधरी ने आठ साल तक टेनिस स्टार लिएंडर पेस को डेट किया, लेकिन जब उन्हें पता चला कि लिएंडर पेस का रिया पिल्लई के साथ भी अफेयर है, तब वह काफी हैरान हो गई थीं. लिएंडर पेस ने रिया संग शादी रचा ली और इधर महिमा चौधरी टूटीं. इसके बाद साल 2006 में महिमा ने बिजनेसमैन बॉबी मुखर्जी से शादी की, जिससे उनकी एक बेटी है. इनका नाम अरियाना चौधरी है. हालांकि, यह रिश्ता ज्यादा नहीं चल पाया और साल 2011 से एक्ट्रेस बिना तलाक के अपने पति से अलग हो गईं. सिंगल मदर होने की वजह से महिमा चौधरी ने फिल्मों से दूरी बनाई.
एक इंटरव्यू के दौरान महिमा ने बताया था कि किसी भी फिल्म में काम करने में ज्यादा समय लगता है और सिंगल मदर होने के चलते वह लंबे समय तक बाहर नहीं रह सकती थीं, इसलिए उन्हें इंडस्ट्री छोड़नी पड़ी. इसके साथ ही स्क्रिप्ट्स में इतना दम नहीं, जिसमें उनके लिए कोई मजबूत किरदार डाला जा सके. ऐसे में महिमा चौधरी ने अपना पूरा वक्त बेटी अरियाना को देना सही समझा. बता दें कि साल 2008 में Gumnaam: The Mystery करने के बाद वह लंबा ब्रेक लेकर गायब हो गईं. बाद में आठ साल के बाद 2016 में 'डार्क चॉकलेट' से उन्होंने फिर कमबैक किया और उसके बाद से वह फिर से बड़े पर्दे से गायब हैं.
हुआ कार एक्सीडेंट
90 और 2000 के दशक में उन्होंने 'दाग द फायर', 'प्यार कोई खेल नहीं', 'धड़कन', 'खिलाड़ी 420' जैसी कई फिल्मों में काम किया. एक कार एक्सीडेंट में महिमा चौधरी बुरी तरह से घायल हो गईं थीं. महिमा चौधरी साल 1999 में फिल्म 'दिल क्या करे' की शूटिंग कर रही थीं, जब ट्रक से उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था. इस एक्सीडेंट में महिमा चौधरी का चेहरा काफी खराब हो गया था. एक्ट्रेस ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी सर्जरी की गई और चेहरे से 67 कांच के टुकड़ों को निकाला गया. एक्ट्रेस ने कहा कि मुझे लगा कि मैं मर रही हूं, कोई मुझे अस्पताल ले जाने वाला नहीं था. अस्पताल पहुंचने के कई वक्त बाद मेरी मम्मी और अजय देवगन वहां पहुंचे. जब मैं उठी तो मैंने अपना चेहरा आइने में देखा और बुरी तरह से डर गई. मेरी फिल्म 'दिल क्या करे' के प्रोड्यूसर अजय और काजोल ने पूरी कोशिश की कि मेरे इस एक्सीडेंट के बारे में किसी को पता न चल सके, क्योंकि उस समय यह बात मेरा पूरा करियर बर्बाद कर सकती थी.
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क्यों टूटी शादी?
महिमा चौधरी ने अपनी बिखरी हुई शादी को लेकर भी एक इंटरव्यू में खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया था कि बॉबी मुखर्जी से शादी के बाद उनके दो मिसकैरिज हुए थे. छोटी-छोटी बातों पर बहस हो जाती थी, जिसके बाद उन्होंने बॉबी से अपने रास्ते अलग करने सही समझे. महिमा और बॉबी ने 2006 में शादी के बंधन में बंधे और 2013 में दोनों का तलाक हो गया. महिमा ने कहा था कि कहती हैं कि शादी टूटने के पीछे कई छोटी-छोटी वजहें रहीं. पति संग मेरी कई बातों को लेकर बहस हो जाती थी. इन बातों के बारे में मैं घर पर किसी को नहीं बताती थी. इसके बाद मेरे दो मिसकैरिज भी हुए.
महिमा कहती हैं कि शायद मैं अंदर से खुश नहीं थी या मैं एक हैप्पी स्पेस में नहीं थी, इसके कारण ऐसे हुआ. मैं शोज करना चाहती थी. मैं अपनी बेटी को मां के घर पर छोड़ती थी तो मुझे वहां रहना अच्छा लगता था. मैं वहां आरामदायक महसूस करती थी. मैं परेशान थी तो मेरी मां और बहन ने साथ दिया. मुझे लगा मेरे बच्चे के ग्रो करने के लिए यह जगह बेहतर साबित हो सकती है. जब मेरे मिसकैरिज हुए तो मुझे पति का सपोर्ट नहीं मिला. कई बार लोग इनसेंसिटिव हो जाते हैं. मेरी मां ने मेरा बहुत साथ दिया. जब मैं इवेंट्स के लिए बाहर जाती थी तो वह बेटी की जिम्मेदारी उठाती थीं. उन्हें पार्किंसन की समस्या थी, उसके बावजूद. मेरे भाई ने बताया कि मां के पास अब कुछ साल हैं, वह फेज मेरे लिए काफी डिप्रेस्ड रहा. कोई मुझे कुछ भी बोलता था, फिर वह छोटी-सी बात भी क्यों न हो, मैं रोने लगती थी.
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बेटी की कस्टडी पर बात करते हुए महिमा ने कहा कि जब मैं बाहर जाती थी तब वह आता था और बोलता था कि मैं अपनी बेटी को लेकर जा रहा हूं. लेकिन जब मैं मुंबई में होती थी तो वह पूछता भी नहीं था. बेटी को वह कहां लेकर जाता था मुझे नहीं पता होता था. मैं कई ड्राइवर्स को कॉल करती थी और पूछती थी कि क्या साहब आपके साथ हैं? फिर जब मुझे पता चलता था तो मैं कॉन्टैक्ट करती थी. मैं इन चीजों को बार-बार करते तंग आ चुकी थी. मेरी दोस्त पूजा ने मेरी मदद की. उसने कहा कि तुम्हें ये सब बंद करना होगा. कोर्ट जाओ और चीजें करनी शुरू करो. मैंने सतीश मानाशिंदे से बात की, वह डिवोर्स नहीं बल्कि क्रिमिनल लॉयर हैं, मैंने उन्हें सब बताया. उन्होंने तसल्ली दी. मुझे पता चला था कि वह एक एक्स्पेंसिव वकील हैं, जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं आपसे कोई चार्ज नहीं लूंगा, आप स्ट्रेस में हैं और मुझे वह लोग पसंद नहीं जो महिला की इज्जत करना न जानते हों. एक ही मीटिंग के बाद मेरे पति सीधे हो गए थे, मैं केवल शांति चाहती थी.