इंडियन सुपरस्टार शाहरुख खान ने हाल ही में अपना 59वां जन्मदिन सेलिब्रेट किया. उन्होंने फैन्स के साथ एक खास इवेंट में अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया और उनके साथ खूब बातचीत की. 30 साल से भी ज्यादा वक्त से फैन्स को एंटरटेन करते आ रहे शाहरुख ने अपने बर्थडे पर भी फैन्स को एक यादगार शाम दी और उनके साथ कई किस्से शेयर किए.
इसी सिलसिले में उन्होंने एक बहुत इमोशनल बात भी शेयर की और अपने पहले फिल्मफेयर अवॉर्ड का किस्सा शेयर किया. शाहरुख ने बताया कि क्यों ये अवॉर्ड जीतने पर उन्हें वो मोमेंट याद आया जब उन्होंने तीसरी क्लास में अपना पहला मैडल जीता था.
शाहरुख ने बताई पहले फिल्म अवॉर्ड की इमोशनल कहानी
शाहरुख ने फैन्स के साथ इवेंट में जो बर्थडे सेलिब्रेट किया, उसके वीडियो क्लिप्स अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इस इवेंट के एक हिस्से में शाहरुख ने फैन्स के साथ अपनी कुछ तस्वीरों के साथ जुड़ी कहानियां भी बताईं. उनकी जो तस्वीरें दिखाई गईं उनमें से एक उनके पहले फिल्म अवॉर्ड की थी.
शाहरुख को अपनी पहली फिल्म 'दीवाना' के लिए 1993 में फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. उन्हें 'बेस्ट डेब्यू' (मेल) कैटेगरी में अवॉर्ड मिला था. शाहरुख ने इस अवॉर्ड सेरेमनी को याद करते हुए बताया, 'ये बहुत स्पेशल था क्योंकि जब मैं यहां पर काम करने आया था, मुंबई तो यहां मेरे एक दोस्त हैं विवेक वासवानी जिन्होंने मुझे फिल्म एक्टर बनने के लिए कन्विंस किया था. वो मुझे के फिल्मफेयर अवॉर्ड शो में लेकर गए और हम एकदम आखिरी लाइन में कहीं बैठे हुए थे, सेंटॉर होटल में, बहुत सारे लोग थे. मैं गलत नहीं हूं तो विनोद चोपड़ा जी को अवॉर्ड मिला था, या किसी और को जिन्हें मैं जानता था. मेरे दिल में ऐसा था कि यार मुझे भी अवॉर्ड मिलेगा और यही सब. तो मुझे दीवाना के लिए ये (फिल्मफेयर) मिला.'
शाहरुख ने बताया कि जब वो अवॉर्ड लेने आगे जा रहे थे तो उन्होंने अपने दिमाग में एक स्पीच तैयार कर रखी थी. उन्होंने बताया, 'मैंने अपने दिमाग में एक स्पीच तैयार कर रखी थी. एक्टिंग को लेकर, फिल्मों को लेकर और एक्टिंग का एक्सपीरिएंस कैसा रहा, इसी तरह की इंटेलेक्चुअल टाइप बातें करूंगा.' लेकिन जब वो स्टेज तक पहुंचे तो उनके दिमाग से वो स्पीच गायब हो गई और उन्हें बचपन की एक बात याद आ गई.
शाहरुख ने बताया, 'मैं स्टेज पर चढ़ा तो मुझे याद है कि... मुझे तीसरी क्लास में एक बार ब्रॉन्ज मेडल मिला था, पहली बार मुझे एक मेडल मिला था रेस में, जो तीसरी पोजीशन थी. और मुझे बहुत प्राउड फील हुआ, मैं घर आया अपनी मॉम को दिखाने के लिए. लेकिन मेरे मां-बाप जो थे बेचारे गरीब से थे, काम में ही लगे रहते थे, कोई था ही नहीं घर पर. मुझे अभी भी याद है मेरा कुत्ता था हनी, उसके साथ बैठकर मैंने ऐसा विश किया कि काश मॉम घर पर होतीं. और उस दिन जब मैं स्टेज पर गया कि मेरी लाइफ का ये जो पहला ढंग का अवॉर्ड है, जिसका कोई मीनिंग है, क्योंकि मैं फिल्म एक्टर बन गया हूं और अब भी मेरी मां साथ नहीं हैं. तो मुझे याद है कि मैंने ये अवॉर्ड शायद अपनी मां को डेडिकेट किया था.
पहले किया इमोशनल फिर बदला माहौल
शाहरुख की एक खूबी ये भी है कि वो माहौल को समझकर बात करते हैं और अपने बात करने के लहजे से चीजें लाइट बना देते हैं. उनके बचपन और पहले अवॉर्ड के किस्से का इमोशन जब माहौल में घुलने लगा तो शाहरुख ने फिर एक बार लाइट अंदाज में कहा, 'अब तो भगवान की दया से इतने हो गए हैं कि मम्मी वापस करने लग गई हैं... 'ये वाला रख ले यार, डैडी को दे दे अपने ये अवॉर्ड, मुझे ही दिए जा रहा है सारे अवॉर्ड.''
शाहरुख के वर्क फ्रंट की बात करें तो वो अब अपनी बेटी सुहाना खान के साथ फिल्म कर रहे हैं. डायरेक्टर सुजॉय घोष की इस फिल्म का टाइटल 'किंग' है और शाहरुख इसमें एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं.