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Sahitya Aajtak Lucknow 2024: 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मेकर्स पर शैलेश का तंज, बोले- उनके जीवन के चश्मे मैं उतार चुका

साहित्य आजतक लखनऊ 2024 के मंच पर टीवी के पॉपुलर एक्टर, लेखक और कवि शैलेश लोढ़ा आए. इन्होंने राम मंदिर पर होने वाली राजनीति, 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मेकर्स पर तंज कसते हुए अपनी बात रखी.

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शैलेश लोढ़ा
शैलेश लोढ़ा

साहित्य आजतक लखनऊ 2024 के मंच पर टीवी के पॉपुलर एक्टर, लेखक और कवि शैलेश लोढ़ा आए. इन्होंने राम मंदिर पर होने वाली राजनीति, 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मेकर्स पर तंज कसते हुए अपनी बात रखी. 

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गुडमॉर्निंग की जगह राम-राम कर रहे लोग?
नया बदलाव दिख रहा है. लोगों की जुबान पर राम ही राम है. आपके सवाल में ही जवाब छिपा है. राम को जहां होना चाहिए, वो राम सब जगह है. अयोध्या गया कल मैं, वहां जो भगवा रंग लहरा रहे हैं. श्री राम के चित्र हर जगह लगे हैं, जो धुन बज रही है 'मेरे घर राम आए हैं...'. नए युग की शुरुआत कब होती है. भीतर से निकलकर आता है. चेतना नहीं बदलती. सब बदल जाता है. हम भाग्यशाली हैं, जहां ये समय देखने का हमें सौभाग्य मिला. 

प्राण प्रतिष्ठा का मिला इन्विटेशन
22 जनवरी को हम सबकी राम जी से भेंट होने वाली है. कुछ घंटे बचे हैं. कुछ भाव ऐसे होते हैं जिन्हें हम शब्दों में ढाल नहीं सकते. दुनिया में मां की ममता को शब्दों में ढाल नहीं सकते. इसी तरह राम जी के स्वागत को लेकर जो मेरे दिल में चल रहा, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं. चुनिंदा लोगों में से हम भाग्यशाली लोग हैं जो अपनी आंखों से प्राण प्रतिष्ठा समारोह देख पाएंगे. वहां उपस्थित होंगे. ये क्षण दोबारा आएगा नहीं, ये क्षण अद्भुत होने वाला है. 

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शैलेश ने 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के मेकर्स पर तंज कसते हुए कहा कि जितने जीवन के चश्मे थे वो तो मैंने उतार दिए. इसलिए चश्मा उल्टा रखा जाए या सीधा, मुझे फर्क नहीं पड़ता. इतना बोलते हुए शैलेश अपना चश्मा पहन लेते हैं. 

22 जनवरी के बाद समाज में नए युग की शुरुआत देखते हैं?
शैलेश ने कहा- कल के बाद क्यों, शुरुआत तो हो चुकी है. कल तक का इंतजार करने की क्या जरूरत है. इस बार सिर्फ राम दरबार है. बात राम पर हो, नाम राम का हो तो नए युग की शुरुआत तो हो चुकी है. हमारी आस्था पर गर्व करने का समय आया है, तो गर्व करेंगे. क्यों ना जय बोला जाए, क्यों ना तिलक लगाया जाए. अपने धर्म पर आस्था रखने का हक तो हर किसी के पास है. 

प्राण प्रतिष्ठा के बीच लोग चुनाव के नतीजों को देख रहे?
पिछले दो चुनावों में क्या था. मेरे सवाल में और जवाब में सारी चीजें हैं. राम मंदिर समारोह को चुनाव से नहीं जोड़ना चाहिए. किसने अपने घोषणापत्र में लिखा था कि राम मंदिर बनवाएंगे. जिन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी, अगर वो कहते हैं तो ठीक कहते हैं. बात राजपाठ की नहीं है. बात स्वाभिमान की है जो इतने सालों तक लड़ी गई. जो गलत है उसे ठीक करना चाहते हैं, जिन्होंने ठीक किया, वो अच्छा हुआ. और इसपर हम में से किसी को चुनाव की बात नहीं करनी चाहिए. वोट उसको मिलते हैं जो दुनिया में अपनी छवि बनाता है. वोट उसको मिलते हैं जो दुनिया के लिए कुछ करता है. भारत की ताक बोलती है. भारत को दिखाई देता है. जब भारत सशक्त होता है तो मुझे बहुत खुशी मिलती है. 

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मुंबई में सनातन धर्म की बात पर लोग नाराज हो जाते हैं? 
जिसको नाराज होना हो, हो जाए. हां, कई बार संकीर्ण लोग जो हैं वो नाराज होते हैं. मैं नहीं बदलूंगा. मैं जो हूं, वो हूं. मैं नहीं बदलने वाले. किसी की सोच पर मैं हावी नहीं हो सकता. मैं किसी की सोच को बदल नहीं सकता. जो मेरा रंग है, वो मैं रंग में रंगूंगा. और जो रंग पहनने का मन होगा, वो पहनूंगा. मैं सब जगह अपना सिर झुकाता हूं. हर इंसान के भगवान की इज्जत करता हूं. पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं अपने संस्कार भूल जाऊं. 

मेरी आस्था मेरी है. मुझे किसी से दिक्कत नहीं है. मेरी आस्था की मैं इज्जत करता हूं. 

अपने जीवनकाल को दो अध्यायों में बाटें?
बस मैं यही कहूंगा की 22 जनवरी से पहले राम थे, जुबान पर, होठों पर. 22 जनवरी के बाद हम लोग उसने स्वागत की तैयारी कर रहे हैं. उनका स्वागत कर रहे हैं. प्रभु राम तो ऊपर बैठे हैं. वो सब देख रहे हैं. हर इंसान के अदंर अब राम है. जिसके साथ प्रभु राम हैं, उसे चिंता करने की जरूरत नहीं. जिसका साथ राम का है, उसके साथ सबकुछ अद्भुत है. प्रभु राम के नाम का तो चमत्कार है. हम लोग प्रभु राम के हाथों में हैं.

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