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'शेखर होम' रिव्यू: देसी शरलॉक के रोल में दमदार हैं के. के. मेनन, 'ब्योमकेश बक्शी' सा फील देगा मजेदार शो

ये हिंदी सिनेमा वालों में अचानक से सिरकटे भूतों के लिए इतना प्रेम कहां से उमड़ रहा है?! जहां 'स्त्री 2' का मेन विलेन ही एक सिरकटा भूत है, वहीं एक दूसरा सिरकटा भूत 'शेखर होम' की 6 कहानियों में से एक का विलेन बना है. शुक्र ये है कि दोनों कहानियों का दिमाग तो एकदम ठिकाने पर है.

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'शेखर होम' में के. के. मेनन
'शेखर होम' में के. के. मेनन
फिल्म:शेखर होम
3.5/5
  • कलाकार : के के मेनन, रणवीर शौरी, रसिका दुग्गल, कौशिक सेन
  • निर्देशक :सृजित मुखर्जी, रोहन सिप्पी

दूरदर्शन का क्लासिक शो 'ब्योमकेश बक्शी' जनता के दिमाग में इस कदर घर कर चुका है कि बाद में जब हमें शरलॉक होम्स का पता चला तो हमने उसे 'इंग्लिश ब्योमकेश बक्शी' कहा. हालांकि, लिटरेचर के सीन पर शरलॉक होम्स जहां 1887 में आ चुका था, वहीं ब्योमकेश बाबू 1932 में आए. 

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देसी-विदेशी लिटरेचर पढ़ने वालों में ये एक लंबी बहस भी रही है कि क्या ब्योमकेश बक्शी, शरलॉक होम्स से इंस्पायर्ड है? हालांकि इस सवाल का जवाब मोस्टली नेगेटिव ही पाया गया है. मगर इस सन्दर्भ में जियो सिनेमा की नई वेब सीरीज 'शेखर होम' देखते हुए मजा आता है. वो इसलिए कि लंदन के बैकग्राउंड वाले शरलॉक होम्स का, देसी बंगाली वर्जन वास्तव में दूरदर्शन के सीरियल 'ब्योमकेश बक्शी' की याद दिलाता है और बहुत पॉजिटिव तरीके से. 

'शेखर होम्स' रिलीज तो पिछले हफ्ते ही हुआ था. लेकिन जैसा आजकल अक्सर होता है, कंटेंट की बाढ़ में इधर-उधर थपेड़े खाते दर्शक को मुद्दे की जगह पहुंचने में कई बार समय लग जाता है. मगर बॉलीवुड के ट्रिपल क्लैश- 'स्त्री 2' बनाम 'खेल खेल में' बनाम 'वेदा'; से निकले कंटेंट की बाढ़ में 'शेखर होम्स' तक पहुंचने के बाद एक मजेदार सरप्राइज मिला.

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यहां एक दिलचस्प बात और याद आती है कि ये हिंदी सिनेमा वालों में अचानक से सिरकटे भूतों के लिए इतना प्रेम कहां से उमड़ रहा है?! जहां 'स्त्री 2' का मेन विलेन ही एक सिरकटा भूत है, वहीं एक दूसरा सिरकटा भूत 'शेखर होम' की 6 कहानियों में से एक का विलेन बना है. शुक्र ये है कि दोनों कहानियों का दिमाग तो एकदम ठिकाने पर है. 

शेखर-शरलॉक
जियो सिनेमा का शो, सर आर्थर कॉनन डॉयल के लिखे किरदार 'शरलॉक होम्स' और उसकी कहानियों का हिंदी एडाप्टेशन है. शरलॉक होम्स की लीगेसी और कहानियों की पॉपुलैरिटी कितनी तगड़ी है, ये तो शायद किसी को बताने की जरूरत नहीं है. इसलिए इसे हिंदी में एडाप्ट करना एक बड़ा चैलेंजिंग काम भी है. लेकिन 'शेखर होम' में सृजित मुखर्जी और अनिरुद्ध गुहा ने ये काम बड़े मजेदार तरीके से किया है. 

ये सोचने की गलती बिल्कुल न करें कि 'शेखर होम', शरलॉक की कहानियों की पूरी याद दिलाते हुए इन्हें बस एक इंडियन कॉन्टेक्स्ट में परोसने वाला हैं. बल्कि 'शेखर होम' इन कहानियों को बुनने वाले धागों को भी एकदम इंडियन तौर-तरीकों, सोशल बिहेवियर और स्टाइल में लेकर आता है. और ये बड़े खिलंदड़ अंदाज में ऑरिजिनल शो को रेफरेंस भी देता चलता है. जैसे- के. के. मेनन के लीड किरदार का नाम शेखर होम, जो शरलॉक होम्स को सीधा रेफरेंस है. शुरुआत में एक सपोर्टिंग किरदार मेनन से कहता भी है कि इंडिया में ऐसा नाम तो नहीं सुना. लेकिन क्या ये मेनन के किरदार का असली नाम है? ये राज आपको शो में ही पता चलेगा. 

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शरलॉक की लीडिंग लेडी का नाम 'आइरीन' था, 'शेखर होम' में ये नाम इरावती (रसिका दुग्गल) है. जैसे शरलॉक का साथी आर्मी रिटायर्ड डॉक्टर वाटसन था, वैसे ही शेखर का साथी रिटायर्ड सोल्जर जयव्रत सैनी (रणवीर शौरी) है. शरलॉक के प्रोफेसर मोरियार्टी की तरह यहां आपको एक विलेन मिलेगा जिसका नाम 'एम' (M) है.  

'शेखर होम' में के. के. मेनन, रणवीर शौरी (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

इंग्लिश शरलॉक की मिसेज हडसन 'शेखर होम' में मिसेज एच (H) बन जाती हैं. शरलॉक की बड़े भाई माइक्रोफ्ट की तरह, शेखर का बड़ा भाई मृणमयी है. और ब्रिटिश काल के कोलोनियल आर्किटेक्चर का बंगाली-यूरोपियन मिक्सचर, लंदन की रहस्यमयी सेटिंग को परफेक्ट अंदाज में हमारे देसी दिमागों को लोकल कनेक्शन देता है. 

फिर भी दिल है हिंदुस्तानी
ये सब सुनकर आपको लग सकता है कि कहीं इंग्लिश शरलॉक की याद ताजा रखने के चक्कर में देसी शो, सिर्फ नकल करने में ही तो खर्च नहीं हो गया. लेकिन 'शेखर होम' यहीं पर खेल कर जाता है. क्राइम-थ्रिलर शोज की राइटिंग में अक्सर ये चूक होती है कि राइटर अपनी इंटेलिजेंस दिखाने में इतनी मेहनत कर देता है कि उसे अपनी ऑडियंस के बहुत पहले ही पीछे छूट जाने का एहसास नहीं होता. जबकि 'शेखर होम' का जोर मामले को सिंपल रखने और ऑडियंस को जोड़े रखने पर ज्यादा है. और राइटिंग के मामले में ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि सादगी मेंटेन रखना सबसे कठिन काम होता है. 

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'शेखर होम' में कोलकाता के गली-कूचे, शहर-ट्राम... शेखर के बाटिक प्रिंट कुरते-शर्ट और किरदारों के कल्चर का अंदाज भरपूर देसी रंग लिए हुए है. 6 एपिसोड की इस सीरीज में कई जगह कहानी की पेस थोड़ी गिरती हुई मालूम होती है और कुछेक केस, बाकियों जितने दमदार नहीं हैं. फिर भी ओवरऑल पेसिंग करारी बनी रहती है और किसी भी पॉइंट पर मामला इतना ढीला नहीं पड़ता कि आपका मन कुछ और देखने का कर जाए. 

बिना मोबाइल, इंटरनेट और गाड़ियों के शोर वाले, 90s के कोलकाता का वाइब और सिंपल राइटिंग वो चीजें हैं जो 'ब्योमकेश बक्शी' की याद दिलाते हैं. लेकिन शेखर कहीं से भी ब्योमकेश नहीं, उसमें भद्रलोक की वो फॉर्मल विनम्रता नहीं है. वो रूखा, अड़ियल, चिढ़चिढ़ा, बेचैन और एक तरह का बदतमीज आदमी है, जिसपर आपको गुस्सा आ सकता है. उसमें ब्योमकेश बाबू का वो गुण नहीं है कि मीठी बात करके किसी की भावनाओं को जड़ से हिलाए बिना अपना केस सॉल्व करने के बाद अपना पॉइंट प्रूव करेगा. आदमी को आहत करना उसके खेल का पहला कदम है. और ये अंदाज शेखर को, अपने ऑरिजिनल इंग्लिश साथी शरलॉक से मिला है. यहां देखें 'शेखर होम' का ट्रेलर:

दमदार परफॉरमेंस का कमाल
'शेखर होम' से एपिसोड दर एपिसोड जुड़े रहने की एक वजह के. के.मेनन की एक्टिंग भी है. वो सालों पहले उस लेवल से काफी ऊपर आ चुके हैं जहां उनके टैलेंट को डिस्कस किया जाए. मगर उन्होंने शरलॉक को देसी बनाने में कुछ बहुत देसी हाव-भाव दिए हैं. उनकी गर्दन और आंखों की मूवमेंट, कंधों का झुकाव और चाल एक बहुत इंडियन टेक्सचर वाली है. 

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कुर्तों और हाफ शर्ट्स में कैजुअल नजर आ रहे शेखर ने जैसे ही कपड़े बदलकर, फॉर्मल पैंट-शर्ट पहने... वैसे ही आपको समझ जाना है कि पिछले 5 एपिसोड में 'शेखर होम' ने आपको जितना कुछ दिखाया है, असल में उससे बहुत ज्यादा छुपा लिया है. इस शो का क्लाइमेक्स कमाल है और आपको 40 मिनट के अंदर कई बार सरप्राइज करता है और एक फाइनल रिवील देखने के बाद तो आपका मुंह खुला रह जाएगा. 

रणवीर शौरी ने भी शो में दमदार काम किया है और वो के. के. मेनन के परफेक्ट साथी हैं. रसिका दुग्गल 'शेखर होम' में लुभावनी, आकर्षक फीमेल लीड के रोल में कमाल लगती हैं. उनकी आंखों से सावधान रहना है... कीर्ति कुल्हाड़ी का रोल शो में काफी दिलचस्प है और वो उसमें पूरी तरह फिट लगती हैं. सपोर्टिंग एक्टर्स में वो खूबियां हैं कि वो ध्यान टिकाए रखते हैं. हालांकि कुछेक एक्शन सीक्वेंस थोड़े से ढीले लगते हैं और बीच में एक गाना भी हल्का सा ध्यान बंटाता है, मगर शो में इतना कंटेंट तो है कि मजा बरकरार रह जाता है. और हां, शेखर अंत में शरलॉक वाली आइकॉनिक कैप में भी नजर आता है! 

कुल मिलाकर 'शेखर होम' एक ऐसा शो है जो दूरदर्शन के ब्योमकेश बक्शी वाले सिंपल-सरल-सहज स्टाइल में, अंग्रेजी के शरलॉक वाले थ्रिलर स्टाइल को मिलकर एक मजेदार एडाप्टेशन डिलीवर करता है. इसका लीड किरदार आपको पसंद आएगा और सपोर्टिंग किरदारों के साथ इतना दिल तो लगा ही रहेगा कि आप नए सीजन्स में इन्हें और ज्यादा देखना चाहेंगे.

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