scorecardresearch
 

डेब्यू से पहले 40 फिल्में साइन कर चुके थे सुनील शेट्टी, बताया कैसे 1 दिन में 3 सेट पर करते थे काम

एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने बताया कि कैसे डेब्यू से पहले एक्टर को निराशा का सामना करना पड़ा था. कैसे उन्हें फिल्मों का ऑफर मिला और पहली फिल्म के रिलीज होने से पहले उन्होंने 40 फिल्में साइन कर ली थीं. 

Advertisement
X
सुनील शेट्टी
सुनील शेट्टी

सुनील शेट्टी बॉलीवुड के बेस्ट एक्शन हीरो में से एक रहे हैं. सुनील ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत 90 के दशक में की थी. उन्होंने फिल्म 'बलवान' से अपना डेब्यू किया. अब एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि कैसे डेब्यू से पहले एक्टर को निराशा का सामना करना पड़ा था. कैसे उन्हें फिल्मों का ऑफर मिला और पहली फिल्म के रिलीज होने से पहले उन्होंने 40 फिल्में साइन कर ली थीं. 

Advertisement

कैसे एक्शन हीरो बने सुनील शेट्टी?

भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया की पॉडकास्ट में सुनील शेट्टी ने बताया कि उन्हें फिल्मों में काम का मौका कैसे मिला. उन्होंने कहा, '11 या 12 साल की उम्र से मैं मर्शियल आर्ट्स करता था. मैंने ब्रूस ली को देखकर सोचा कि मर्शियल आर्ट्स करना है, ब्रूस ली बनना है. मैं उसमें अच्छा था. मैं ऐसा था कि कोई भी स्पोर्ट आप मुझे दे दो, मैं दो दिन में सीख जाऊंगा. तो मर्शियल आर्ट्स करते-करते दो साल में ही उन्होंने मुझे सीनियर बना दिया, 14-15 साल की उम्र में. और मैं इंडो-तिबेटन बॉर्डर पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस को ट्रेन करता था सेंसेई परवेज मिस्त्री के अंडर.'

उन्होंने आगे बताया, 'एक बार काफी टाइम बाद महाराष्ट्र पुलिस के डेमो में राजीव राय (डायरेक्टर) ने मुझे देखा और शब्बीर मेरा दोस्त था. राजीव ने कहा कि ये लड़का कौन है, बढ़िया एक्शन करता है. तब वीडियो का दौर था, फिल्में नहीं चल रही थीं. तो फिल्में बनती नहीं थीं और उनको चाहिए थीं मास फिल्में. एक्शन मास था तो मुझे वो मौका मिला. राजीव ने कहा मैं फिल्म करूंगा लेकिन वो फिल्म नहीं हुई, क्योंकि जो उनके हीरो थे, वो बीमार थे. तो वो ठीक हो गए, तो मुझे रखा गया कि हम करेंगे फिल्म.'

Advertisement

जब एक्टर को हाथ लगी निराशा

सुनील शेट्टी को कई फिल्मों के ऑफर मिले थे, लेकिन एक के बाद एक पिक्चर बंद होती जा रही थी. इस बारे में उन्होंने बताया, 'जेपी दत्ता ने, मेरी फोटो रिलीज थी तब, उन्होंने मेरे बड़े-बड़े पोस्टर बनाए थे तो काफी डायरेक्टर्स ने मुझे देखा गया. प्रहलाद (कक्कड़) जी ने मुझे साइन किया. प्रहलाद जी के साथ मेरी फिल्म शुरू हुई 'आरजू', दीपक शिवदसानी के साथ. मैं, दीपक शिवदसानी, राज बब्बर, शत्रु (शत्रुघ्न सिन्हा) जी... फिल्म 99 परसेंट शूट हो चुकी थी और फिर कुछ प्रॉब्लम हुई और फिल्म बंद हो गई. वो थी मेरी एक्टिंग क्लास वरना मैं कभी एक्टिंग एकैडेमी गया ही नहीं था.'

वो आगे बोले, 'फिर प्रहलाद जी ने 'एक और फौलाद' अनाउंस की. फिर डायरेक्टर की फिल्म हिट हो गई थी तो उसने बोला मुझे बड़े हीरो मिल रहे हैं, नए हीरो के साथ काम नहीं करूंगा, तो वो बंद हो गई. फिर आया 'वक्त हमारा है' और साथ-साथ 'बलवान'. वहां से फिर जर्नी शुरू हुई. फेलियर नहीं कहूंगा लेकिन निराशा कितनी देखी मैंने. लेकिन मेंटली स्ट्रॉन्ग था, क्योंकि एथलीट था मैं. हारना जानता था. समझता था कि कभी हारूंगा, कभी जीतूंगा. ये मेंटल डिप्रेशन, एंग्जाइटी नहीं होता था.'

पहली फिल्म रिलीज होने से पहले मिले ढेरों ऑफर

Advertisement

एक्टर ने बताया कि उनके पास पहली फिल्म की रिलीज से पहले 40 प्रोजेक्ट्स थे. सुनील ने कहा, 'लेकिन जब बलवान के रिपोर्ट्स बाहर निकले और एक्शन के रिपोर्ट्स निकले... मैं तो 40 फिल्में साइन कर चुका था पहली फिल्म की रिलीज से पहले. हम उतनी फिल्में करते थे. हम लोग 25-30 फिल्में एक साल में शूट करते थे. दो दिन, चार दिन, पांच दिन... एक दिन में तीन-तीन फिल्में. पैंट वही है, तीन अलग शर्ट. फिल्मिस्तान में, सेट नंबर 1, सेट नंबर 2, सेट नंबर 3, तीनों मेरे सेट थे. यहां से उधर, वहां से उधर. और वो जो रूम... सेट पर जाने से पहले लेफ्ट में रूम होते हैं. लास्ट में वो रूम मेरा था, मैं 10-10 दिन रहा हूं वहां पर.' 

सुनील शेट्टी ने ये भी बताया कि उन्हें इंडस्ट्री के बारे में जानकारी और ट्रेनिंग नहीं थी. ऐसे में वो स्क्रिप्ट या कहानी नहीं सुनते थे, उन्हें अजीब लगता था. वो फिल्म को लेकर एक-एक लाइन सुनते और हां कर देते थे. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें सपोर्ट किया था. एक्टर ने कहा, 'पापा ने कहा तुम्हें एक जिंदगी मिली है, इसे खुलकर जियो. और पापा ने एक चीज जरूर कही कि केटरिंग इंडस्ट्री से आए हो, मेहनत करना तो तुम सीख ही गए हो.'

Advertisement

सुनील शेट्टी के पिता का नाम वीरपा शेट्टी था, वो रेस्टोरेंट मालिक हुआ करते थे. एक्टर ने इंटरव्यू के दौरान उन्हें लेकर भी बात की. उन्होंने बताया कि पिता की जर्नी की शुरुआत काफी मुश्किल रही थी. वो तीन बच्चों में सबसे छोटे थे. उनके पिता नहीं थे. 9 साल की उम्र में वीरपा शेट्टी घर से भाग गए थे. एक होटल मालिक ने उन्हें पनाह और काम दिया. वो इतने छोटे थे कि एक टेबल साफ करने के लिए उन्हें चार चक्कर लगाने पड़ते थे. इतना ही नहीं, वो चावल की बोरी में घुसकर सोते थे. उनके काम के चलते मालिक ने खुश होकर उन्हें तरक्की भी दी थी. ऐसे ही वो आगे चलकर होटल मालिक बने. सुनील का कहना है कि उनके पिता काफी शांत शख्स थे. वो हमेशा कहते थे कि आपको जो भी करना है उसे पूरी लगन के साथ करो.

Live TV

Advertisement
Advertisement