मुंबई में सीबीआई की लगातार चौथे दिन भी जांच जारी रही. केस से जुड़े चार चश्मदीदों से तीन दिनों से पूछताछ हो रही है. सुशांत के घर की दो-दो बार पड़ताल की गई. और पूरे सीन को रीक्रिएट किया गया. अब सवाल ये है कि चश्मदीदों की गवाही और सुशांत के घर की पड़ताल क्या अकेले इस केस को उसके अंजाम तक पहुंचा सकता है? तो जवाब है नहीं. इसके लिए सीबीआई को फॉरेंसिक सबूतों की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी. पर क्या सीबीआई के पास फॉरेंसिक सबूत हैं?
मुंबई पुलिस ने सुशांत का विसरा जांच के लिए कलीना के फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी में भेजी. तब विसरा की करीब 80 फीसदी सैंपल जांच में इस्तेमाल कर लिए. अब कलीना एफएसएल में सुशांत के विसरा की करीब 20 फीसदी सैंपल बचे हैं. मान लीजिए सीबीआई विसरा की दोबारा जांच कराना चाहे तो उसे इन 20 फीसदी बचे हुए विसरा के नमूने पर ही निर्भर रहना पड़ेगा.
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कलीना के फॉरेंसिक लैब के सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस ने सुशांत की विसरा के जो नमूने भेजे थे, उनमें से 80 ऑर्गन के नमूने एनालिसिस के दौरान इस्तेमाल किए गए थे. सुशांत के खून के नमूने डीएन के जांच के लिए इस्तेमाल किए गए थे. उसी तरह बाकी अंगों के नमूने भी अलग-अलग फॉरेंसिक जांच में इस्तेमाल किए गए. लेकिन इसके बावजूद सुशांत की विसरा के करीब 20 फीसदी नमूने अब भी कलीना के फॉरेंसिक लैब में मौजूद हैं.
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अगर सीबीआई चाहे तो वो इन नमूनो को अपने कब्जे में ले सकती है. विसरा के अलावा कलीना के फॉरेंसिक लैब में सुशांत के कमरे से मिले कुछ दवाइयों के स्ट्रीप और सिगरेट के बड्स भी मिले हैं. इनकी भी जांच की गई है.
अब सवाल ये है कि क्या विसरा के बाकी बचे 20 फीसदी सैंपल सीबीआई के किसी काम आ सकते हैं? तो जवाब हैं - हां. कलीना के फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक विसरा के बाकी बचे नमूनों से भी सीबीआई सच्चाई का पता लगा सकती है. यानी अगर सीबीआई की फॉरेंसिक टीम को विसरा रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नजर आती है, तो वो दूसरी राय लेने के लिए बाकी बचे बीस फीसदी विसरा के नमूने की जांच कर सकती है.
सुशांत केस में मौका ए वारदात के ज्यादातर सबूत और निशान नष्ट हो चुके हैं. ऐसे में सुशांत के घर से कोई सबूत मिले, इसकी उम्मीद कम है. केस से जुड़े सीधे या फिजिकल सबूत या तो खत्म हो चुके हैं या उनके साथ छेड़छाड़ हो चुकी है. ऐसे में ये केस जब अदालत में पहुंचेगा, तो फॉरेंसिक सबूत ही सबसे अहम साबित होंगे. मौका ए वारदात से सबूतों और निशानों की गैर मौजदूगी में सीबीआई को इस केस पर पूरी तरह परिस्थितिजन्य सबूत पर ही निर्भर रहना पड़ेगा.
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सीबीआई की टीम शनिवार को ही कूपर अस्पताल भी गई. वहां से सुशांत केस से जुड़े फॉरेंसिक के बाकी सबूतों को अपने कब्जे में लिया. सुशांत का पोस्टमार्टम इसी कूपर अस्पताल में हुआ था. लेकिन सीबीआई ने अभी तक कलीना फॉरेंसिंक लैब से बचे हुए विसरा के नमूने नहीं लिए. ऐसा इसलिए कि इसकी जरूरत फिलहाल नहीं है. एम्स फॉरेंसिक टीम की जांच के बाद अगर लगेगा तो विसरा रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट आधी अधूरी है, तो सीबीआई ज़रूर दोबारा विसरा की जांच करवा सकती है.