बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन ने इंडस्ट्री में अपने दम पर पहचान बनाई है. उन्होंने सीरियल्स से लेकर फिल्मों तक में अपनी एक्टिंग का परचम लहराया है. लेकिन विद्या को अक्सर उनके फैशन और लुक के लिए ट्रोल किया गया है. फिर उन्होंने लेजेंड्री एक्ट्रेस रेखा की तरह साड़ियों को अपना स्टाइल स्टेटमेंट बनाया और लोगों के मुंह पर ताला लगाया.
हाल ही में दिल्ली टाइम्स को दिए इंटरव्यू में विद्या बालन ने अपने पर्सनल स्टाइल और साड़ियों के लिए अपने प्यार के बारे में बात की. एक्ट्रेस ने साथ ही अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में खुद की खोज के दौरान सबसे बड़ी सीख के बारे में भी बताया.
विद्या के लिए फैशन के मायने क्या?
विद्या कहती हैं कि, 'मेरे लिए फैशन एक पर्सनल स्टाइल है क्योंकि ये दर्शाता है कि हम कौन हैं? मुझे ऐसा लगता है कि हम सभी का अपना एक पर्सनल स्टाइल होता है और हम वही चुनते हैं जो हमें हम जैसा बनाता है. कांजीवरम मेरी सबसे पसंदीदा साड़ी है. जब मैं 18 साल की थी, तब मेरे माता-पिता ने मुझे मेरी पहली कांजीवरम साड़ी दिलवाई थी. उनके साथ मेरी ये डील थी कि मेरे हर जन्मदिन पर वो मुझे कांजीवरम साड़ी गिफ्ट करेंगे. काफी लंबे समय तक उन्होंने ये किया भी, लेकिन कुछ साल पहले जब मैंने उनसे कहा कि अब हमें ये बंद करना चाहिए, तब जाकर ये सिलसिला खत्म हुआ.
''इसे बंद करने की वजह ये थी कि मुझे बहुत कम चांस मिलता है साड़ुियों को रिपीट करने का. कांजीवरम पर जो काम किया होता है वो बहुत बेशकीमती होता है, वो सिर्फ अलमारी में रखने लायक नहीं होता है. इसलिए जब मैं साड़ी पहनती हूं तो मेरे इर्द-गिर्द जो भी लोग मौजूद होते हैं, जैसे मेरे दोस्त या कलीग्स, मैं उन सबसे पूछ लेती हूं कि जो मैंने पहना है, अगर उसमें से आप लोगों को कुछ भी चीज पसंद है तो बता दो, जिससे मैं वो उनको दे दूं और रखे-रखे खराब न हों.
फैमिली सपोर्ट से आसान हुई जर्नी
करियर और परिवार के साथ के बारे में बात करते हुए विद्या कहती हैं कि, 'मैं चाहती हूं कि ये सबको पता चले कि जब आपको सच्चे मन से कुछ चाहिए होता है तो पूरी कायनात उसे करने के लिए मिल जाती है. इसलिए कायनात को अपना काम करने दो, ये मत सोचो कि कैसे होगा. हम सब सपना देखते हैं, उस सपने को तुम कैसे पूरा करोगे इसकी चिंता मत करो. सिचुएशन ऐसी बनेंगी कि तुम्हें अपने आप उस सपने तक ले जाएंगी. पर उस सपने को हमेशा देखते रहना और किसी भी चीज को तुम्हें उस सपने से दूर मत करने देना. मैं इस बात में बहुत स्ट्रॉन्गली बिलीव करती हूं.
''अपने करियर के शुरुआती साल में मैंने बहुत से रिजेक्शन देखे हैं. मैं एक नॉन-फिल्म फैमिली से आई थी, और मुझे नहीं पता था कि मैं कभी एक्टर बन पाऊंगी या नहीं. पर एक के बाद एक चीजें होती गईं. मेरी फैमिली बहुत सपोर्टिव थी, जो मेरी सबसे बड़ी हिम्मत थी. मेरे माता-पिता, मेरी बहन, मेरा देवर और मेरे पति सिद्धार्थ एक पिलर की तरह हैं, जिसपर मैं खड़ी रहती हूं. इसलिए मुझे ऐसा लगता है मेरी जर्नी उन लोगों के मुकाबले काफी आसान रही है जिनके पास फैमिली सपोर्ट नहीं है.''
''दो कहानियां एक नहीं होती क्योंकि दो अलग लोग एक जैसे नहीं होते. इसलिए मैं कहूंगी कि 'अपनी जर्नी की यूनीकनेस की सराहना करें'. आसान रास्ते को तलाशने की जगह अपना रास्ता खुद बनाएं, ये रास्ता कठिन लग सकता है, पर मैं इस एक खूबसूरत मंत्र में बहुत मानती हूं कि- भगवान तुम्हें यहां तक लाए हैं, तो वो ही तुम्हें इससे आगे भी ले जाएंगे.'
सोशल मीडिया पर फेक इमेज
सोशल मीडिया पर अपनी इमेज को फेक बताते हुए विद्या ने कहा कि, 'मेरी सोशल मीडिया की इमेज मेरी ऑनस्क्रीन दिखने वाली छवि से बहुत अलग है. बात ऐसी है कि मुझे कॉमेडी पसंद है, पर मुझे स्क्रीन पर वो करने का मौका नहीं मिल रहा है. तो मैं अपने इस शौक को पूरा करने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करती हूं. वैसे मैं सोशल मीडिया को सीरियसली नहीं लेती. मुझे पता है ये बहुत पावरफुल मीडियम है, लेकिन इसे पावर मैं देती हूं, ये मुझे पावर नहीं देता. मैं ऐसा मानती हूं कि मेरे ऊपर कोई ताकत नहीं है. मैं हुक्म देती हूं तब ये परफॉर्म करता है. जैसे कि, लोग मेरे बारे में कितना जानते हैं? ये हुक्म मैं सोशल मीडिया के जरिए देती हूं. मैं अपने पोस्ट पर किए कोई कमेंट्स भी नहीं पढ़ती हूं. तो अगर आप वहां मेरे लिए कुछ अच्छा लिख रहे हैं तो भी अच्छा है और अगर आप गलत लिख रहे हैं तो भी अच्छा है.'