काजोल स्टारर फिल्म सलाम वैंकी की इन दिनों चर्चा है. इस फिल्म में काजोल डीएमडी जैसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित बेटे वैंकी के मां के किरदार में हैं. बता दें, वैंकी के रोल को सहजता से परदे पर दिखाने वाले विशाल जेठवा भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. विशाल हमसे अपनी जर्नी और फिल्म प्रोजेक्ट्स पर बातचीत करते हैं.
बैकग्राउंड डांसर से की शुरुआत
मुंबई में पले-बढ़े विशाल बचपन में डांसर बनने का सपना देखा करते थे. हालांकि कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि डांसिंग से वो बोर हो चुके हैं. फौरन अपना गियर बदलते हुए विशाल एक्टिंग में अपना लक आजमाने लगे. विशाल बताते हैं, सारेगामापा लिटिल चैंप शो के दौरान 2009 में जब अजय देवगन, सलमान खान अपनी फिल्म लंदन ड्रीम्स के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे, तो उस वक्त मैं वहां बतौर बैकग्राउंड डांसर परफॉर्म किया करता था. उस वक्त डांस पर ही फोकस था, लेकिन आगे चलकर समझ आया कि मैं इससे बोर हो रहा हूं और फिर मैंने एक्टिंग की ओर रुख किया. इसके बाद मैंने टीवी पर महाराणा प्रताप में अकबर का किरदार निभाया. इसके साथ ही पैसे कमाने के लिए छोटे-छोटे किरदार भी कर लिया करता था. आज संयोग देखें, जिस स्टेज से अपने बैकग्राउंड डांसर करियर की शुरूआत की थी, मैं बीते दिन वहीं बतौर स्पेशल गेस्ट पहुंचा था. अपनी जर्नी देखकर मैं कई बार इमोशनल भी हो जाता हूं.
सलाम वैंकी पर गर्व
अपनी लाइफ के टर्निंग पॉइंट पर बात करते हुए विशाल बताते हैं, मर्दानी-2 फिल्म मेरी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा है. इस फिल्म में मेरे निगेटिव किरदार ने मुझे बतौर एक्टर स्टैबलिश किया है. इसके बाद मैं ह्यूमन में भी नजर आया था. यहां भी मेरा काम लोगों को पसंद आया था. जब आपके काम को पसंद किया जाता है, तो एक एक्टर के तौर पर आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. वहीं सलाम वैंकी के लिए जब कॉल आया और मुझसे कहा गया कि काजोल मैम और रेवती मैम हैं, तो मेरे लिए न कहने की कोई वजह ही नहीं थी. यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसे मैं आगे चलकर गर्व से कहूंगा कि मैं सलाम वैंकी का हिस्सा रहा हूं. इस फिल्म को हामी भरने की दूसरी वजह यह भी थी कि मेरी निजी जिंदगी में औरतों का बहुत बड़ा इंफ्लूएंस रहा है. पापा नहीं हैं, नाना, बड़े पापा और दादा जी मेरे घर पर अब कोई मर्द नहीं हैं, मैं अपनी मां, दादी, नानी, बहन, बड़ी मम्मी के बीच एकलौता लड़का हूं. इसलिए मैं यह फिल्म अपनी मां को डेडिकेट भी करना चाहूंगा.
मेरे साथ है लेडी लक
करियर की शुरुआत में ही काजोल, रानी मुखर्जी जैसी सुपरस्टार संग काम करने के मौके पर विशाल कहते हैं, मुझे लगता है कि लेडी लक मेरे साथ हमेशा बना हुआ है. ऑफस्क्रीन भी और ऑनस्क्रीन भी, मेरे सामने महिला सशक्तिकरण के बड़े एग्जाम्पल हैं. काजोल मैम संग काम करना मजेदार रहा है. हालांकि उनके साथ काम करने से डर भी लगता है. उनकी यही कोशिश होती है कि सामने वाला आर्टिस्ट कंफर्टेबल रहे. हालांकि कई सीन्स में मैं असहज हो गया था. एक सीन के दौरान वो मेरा पैर पकड़कर एक्सरसाइज करवाती हैं, मुझे बहुत अजीब लग रहा था. दिमाग में कहीं न कहीं यही चल रहा था कि भई ये काजोल हैं. मेरी तो उतनी उम्र नहीं, जितना उनका एक्टिंग एक्स्पीरियंस है. पहली मीटिंग के दौरान मैंने पूरे क्रू से कह दिया था कि मेरा इंट्रो काजोल मैम से अच्छे से करवा देना. वहीं रानी मुखर्जी मैम भी गजब की कलाकार हैं, कैमरे के ऑन होते ही, वो एक अलग इंसान बन जाती हैं.
फिल्म के लिए की पूरी रिसर्च
अपने किरदार की तैयारी पर विशाल कहते हैं, DMD बीमारी बहुत रेयर है, इसकी कोई जानकारी नहीं थी. मैंने बहुत कुछ रिसर्च किया है. मैंने इस बीमारी से जुड़ी 20 डॉक्यूमेंट्री देखी हैं. मैं कई पेशेंट से मिला भी. मेरी बस यही कोशिश रही कि मैं इस किरदार के फील को पकड़ पाऊं. ऐसा किरदार जो कम उम्र में मर जाता है. ऐसे में मृत्यु के सच को अपनाना कितना मुश्किल होता है. इसके जवाब में विशाल कहते हैं, मुझे लगता है कि आप जैसे ही रिएलिटी को एक्सेप्ट कर लेते हैं, उससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है. आपकी कमजोरी ही आपकी मजबूती बन जाती है. जैसे मेरी इंग्लिश बहुत खराब है. मैं पहले बहुत डरता था लेकिन मैंने इसे एक्सेप्ट कर लिया है कि मेरी टूटी-फूटी इंग्लिश है. अब मैं अपनी इसी कमी के साथ कॉन्फिडेंटली लोगों से मिलता हूं और बातें करता हूं.