
कभी सोचा है कि हमसे पहले इस दुनिया में आने और इसको छोड़कर जाने वाले लोगों के लिए जिंदगी कितनी मुश्किल रही है. हम सभी अपने इतिहास के किसी ना किसी हिस्से को जानते हैं, लेकिन उसे गंभीरता से कम ही लेते हैं. और इतिहास से सीख लेने वाले उससे भी कम हैं.
लेकिन कभी सोचा है कि इतिहास के पन्नों में दर्ज जिन लोगों के नाम आज और जिंदगी के किसी भी मोड़ पर हमने पढ़े हैं, वो कभी असली इंसान हुआ करते थे. जीते-जागते, सांस लेते, खुशी और गम को महसूस करते इंसान. जिनमें से कई का जीवन हम सभी से ज्यादा मुश्किलों से भरा था.
आज हम टेक्नोलॉजी की दुनिया में रह रहे हैं और हमारे लिये अपने फोन और कंप्यूटर से बाहर कोई जिंदगी है ही नहीं. जीवन के बारे में सोचना भी हमारे लिए मुश्किल है. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब ये सबकुछ इंसान के पास नहीं था. तब वो असली दुनिया में रहता था, असली और तकलीफ भारी मुश्किलों का सामना करता था.
और इन दिक्कतों का निवारण भी उसे खुद ही सोचना और निकालना पड़ता था. तब लोग बेबस थे. खुद को और अपने अपनों को बचाने के लिए उनके पास जरिए बहुत कम थे और यही चीजें जब आज आप जानते हैं, तो सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि अगर हम उस सिचुएशन में होते तो क्या करते. ऐसी ही गहरी बातों को मिलाकर बनी है वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की फिल्म बवाल.
ये कहानी है अज्जु भैया उर्फ अजय दीक्षित (वरुण धवन) की जिसके लिए उसकी शान ही सबकुछ है. अज्जु भैया के खुद के शब्दों में कहूं तो वो पनीर में पड़ने वाला धनिया है, जिनके होने ना होने से किसी को फर्क नहीं पड़ता. लेकिन उन्होंने माहौल बनाते हुए अपनी इमेज को ऐसा बनाया है कि पूरे लखनऊ शहर में उनके ही चर्चे होते हैं. इसी इमेज के चलते बिना संकोच किए अज्जु भैया ‘पनीर’ लोगों के सामने सिर उठाकर और सीना चौड़ा कर चल पाते हैं. लेकिन कई लोगों की तरह इस झूठी शान और दिखावे वाली जिंदगी से अज्जु खुश नहीं है. ना तो उसे अपनी नौकरी से प्यार है और ना ही परिवार या पर्सनल लाइफ से. तभी तो काम के बाद वो अपने गमों को शराब के नशे में डुबाने दोस्त संग बार चला जाता है.
अज्जु भैया के घर में हैं उनके पिता जी मिस्टर दीक्षित (मनोज पाहवा), उनकी मां मिसेज दीक्षित (अंजुमन सक्सेना) और उसकी बीवी निशा (जाह्नवी कपूर). निशा और अजय की शादी को अभी 9 ही महीने हुए हैं, लेकिन उनके बीच प्यार बढ़ने की बजाए दूरियां ही आई हैं. दोनों एक दूसरे से प्यार तो दूर एक दूसरे के बारे में छोटी-बड़ी चीजें जानते भी नहीं हैं. दूसरी तरफ अजय की एक हरकत के चलते अब उसकी नौकरी पर बन आई है. इसी बीच अजय अपनी बीवी निशा को यूरोप की ट्रिप पर ले जाने का फैसला करता है. यहां से वो अपने स्कूल के बच्चों को वर्ल्ड वॉर 2 के बारे में शिक्षा देगा. लेकिन अज्जु भैया को नहीं पता कि ये ट्रिप उनकी जिंदगी बदल देगी.
वरुण धवन में बढ़िया एक्टिंग करने का पोटेंशियल है ये बात सभी लोग जानते हैं. इस फिल्म ने भी उन्होंने बढ़िया काम किया है. मस्तमौला और झूठी शान वाले अज्जु भैया से समझदार और सेंसीटिव अजय दीक्षित बनने की उनकी जर्नी देखने वाली है. वहीं जाह्नवी कपूर ने भी अपने निशा दीक्षित के किरदार को अच्छे से निभाया है. वरुण संग उनकी केमिस्ट्री भी सही थी. मनोज पाहवा और अंजुमन सक्सेना का काम मजेदार रहा. उनके अलावा अन्य सपोर्टिंग एक्टर्स का काम भी अच्छा रहा.
डायरेक्टर नितेश तिवारी ने अपनी फिल्म को अलग अंदाज में बनाया है. द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में वो काफी सेंसिटिव तरीके से दर्शकों को सीख देते हैं. वो उस समय मरने मरने वाले हर व्यक्ति को जिंदा इंसान के रूप में आपके सामने खड़ा करने की कोशिश करते हैं. किरदारों की सेल्फ डिस्कवरी जर्नी इससे और भी दिलचस्प हो जाती है. इसे देखते हुए आप समझते हैं कि हम सभी को अपने जीवन में कभी ना कभी कुछ ना कुछ चाहिए होता है, जबकि दुनिया में ऐसे भी लोग रहे हैं जो कभी कुछ पा ही नहीं सके.
इस फिल्म के साथ डायरेक्टर नितेश ने एक सिम्पल लेकिन गहरा मैसेज दिया है कि इतिहास होता ही इसलिए है कि अपनी गलतियों से सीख ली जाए और उन्हें सुधारा जाए. ये फिल्म फ्लॉलेस नहीं है. इसमें कमियां भी हैं, जिनकी वजह से आप इसे देखते हुए अलग ख्वाबों में भी जाने लगते हैं. लेकिन अगर आप इसे एक चांस देना चाहते हैं तो अमेजन प्राइम वीडियो पर ये अवेलेबल है.