2010 में एक हॉलीवुड फिल्म Julia's Eyes रिलीज हुई थी. तापसी पन्नू की ब्लर भी उसी की हिंदी रीमेक है. फिल्म को फ्रेम दर फ्रेम स्क्रीन पर उतारा गया है. इससे पहले भी तापसी की पिछली फिल्म दोबारा स्पैनिश फिल्म मिराज से इंस्पायर्ड थी.
कहानी
आइडेंटिकल ट्वीन गायत्री और गौतमी बहनों में गायत्री की डेथ हो जाती है. हालांकि इस डेथ को सुसाइड करार देते हुए पुलिस इस केस को क्लोज करना चाहती है. जबकि गौतमी को शक है कि इस मौत के पीछे किसी का हाथ है. कहानी यहीं से शुरू होती है, अपनी बहन की मौत का पता लगाने में जुटी, तापसी को इस रास्ते में कई शॉकिंग सच्चाईयों का सामना करना पड़ता है. इस बीच तापसी की आंखों का विजन जा रहा होता है. क्या तापसी अपनी आंखें गवां बैठती है, क्या वाकई इस मौत के पीछे कोई और जिम्मेदार है और कौन सी ऐसी सच्चाई है जिसका सामना करना पड़ता है. इन सब सवालों के जवाब आपको फिल्म देखने के दौरान मिल जाएंगे.
डायरेक्शन
अजय बहल के डायरेक्शन में बनी ब्लर कहीं मायनों में कमजोर व बिखरी सी लगती है. कहानी की शुरुआत से ही आप सोचने लगते हैं ये क्या है? और है, तो क्यों है? फिल्म के स्क्रीनप्ले में लॉजिक की कमी बहुत खलती नजर आती है. इंटरवल का पहला हिस्सा फिर भी कुछ सही लगता है लेकिन क्लाइमैक्स जहां स्टोरी आपको बांधकर रखती है, वहां आप गजब बोर होते हो और कई बार पहले-पहले ही सस्पेंस का अंदाजा लगा जाते हो. आखिर के 20 मिनट के दौरान आप फिल्म के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हो. गनीमत है फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर है, जिससे आपको यह पूरी आजादी मिलती है कि फिल्म को फॉरवर्ड कर आगे बढ़ा सकते हैं.
टेक्निकल
मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्मों के बेहतरीन इंपैक्ट के लिए फिल्म का विजुअल हमेशा डार्क चुना जाता है. ब्लर के साथ भी कुछ ऐसा ही है कि फिल्म देखते वक्त कहीं भी आपको धूप या सुबह नजर ही नहीं आती है. पूरी फिल्म एक कलर पैलेट पर नजर सी आती है. वहीं बैकग्राउंड स्कोर भी इतने इंप्रेसिव नहीं हैं कि आपका ध्यान अपनी ओर खींचे. सिनेमैटिकली फिल्म आपको ब्लर की एक डार्क दुनिया में बेशक लेकर जाती है लेकिन कहानी इतनी ऊबाऊ है कि वो दुनिया भी टॉर्चर सी लगने लगती है.
एक्टिंग
तापसी पन्नू का किरदार के प्रति मेहनत साफ नजर आता है. एक अंधी लड़की के किरदार में उन्होंने अपनी जान झोंक दी हैं लेकिन फिर भी फिल्म में कुछ नयापन सा नहीं दिखता है. ऐसा लगता है कि तापसी पिछले कुछ समय में ऐसी फिल्में की हैं. उनकी मेहनत जाया सी लगती है. गुलशन दैवेया एक सशक्त एक्टर होने के बावजूद अपने कमजोर किरदार की वजह से प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं. हां, यहां सरप्राइज करते हैं अभिलाष थपियाल, उनकी अबतक की बेस्ट परफॉर्मेंस रही. अभिलाष अपनी दमदार परफॉर्मेंस से डराते हैं.
क्यों देखें
सस्पेंस थ्रिलर इस फिल्म के शौकीन इसे एक मौका दे सकते हैं. फिल्म में परफॉर्मेंस सबकी बेहतरीन है, उसकी वजह से भी फिल्म देखी जा सकती है, लेकिन हां, अगर आप कुछ यूनिक स्टोरीलाइन या ज्यादा उम्मीदें लेकर देख रहे हैं, तो निराशा हाथ लगेगी.