पिछले कुछ समय से लगातार फ्लॉप फिल्म और जबरदस्त निगेटिविटी से गुजर रहे बॉलीवुड को वाकई किसी ब्रह्मास्त्र की जरूरत है, जो इस डूबती हुई इंडस्ट्री को एक उम्मीद की किरण दिखा सके. शायद यही वजह भी है कि पूरी इंडस्ट्री की नजर फिल्म ब्रह्मास्त्र पर टिकी है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इस फिल्म की सक्सेस व फ्लॉप कहीं न कहीं एक दिशा तय जरूर करने वाली है. अब यह ब्रह्मास्त्र वाकई निशाने पर लगी है या फिर चूक गई है? पढ़ें इस रिव्यू में...
डायरेक्टर अयान मुखर्जी और रणबीर कपूर के खून, पसीने, वक्त की निचोड़ है ब्रह्मास्त्र. फिल्म को बनाने में लगभग 10 साल से लगे हैं. फिल्म की कहानी को जानने से पहले इसके प्लॉट को समझना जरूरी है. सदियों पहले महान ज्ञानी ऋषि मुनियों को हिमालय की शरण में घोर तपस्या के दौरान उन्हें एक वरदान के रूप में एक ब्रह्म शक्ति दी जाती है. इस ब्रह्म शक्ति से अस्त्रों का जन्म होता है. ऐसे अस्त्र जो प्रकृति की अलग-अलग शक्तियों से भरे हुए हैं, जैसे वानरास्त्र, नंदी अस्त्र, प्रभा अस्त्र, अग्नि अस्त्र. और अंत में जन्म होता है उस अस्त्र का जिसमें ब्रह्म शक्ति समा जाती है. ऋषि मुनि इस अस्त्र को ब्रह्मास्त्र नाम देते हैं. ऋषि मुनी जो ब्रह्मांश के नाम से जाने जाते हैं उनका परम कर्तव्य है इस ब्रह्मास्त्र की रक्षा करना.
कहानी
डीजे के रूप में काम कर रहे शिवा (रणबीर कपूर) दुर्गा पूजा के दौरान ईशा (आलिया भट्ट) से पहली नजर में प्यार कर बैठते हैं. क्लास में डिफरेंस होने के बावजूद ईशा और शिवा की प्रेमकहानी आगे बढ़ती है. शिवा को ब्रह्मांश की दुनिया में होने वाली कुछ घटनाओं के सपने आते हैं लेकिन ब्रह्मांश के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है. इस पहेली को सुलझाते हुए शिवा और ईशा नंदी अस्त्र के मालिक अनीस (नागार्जुन) और ब्रह्मांश के गुरू(अमिताभ बच्चन) पास पहुंचते हैं. इस बीच शिवा को एहसास होता है कि वह खुद एक अग्नि अस्त्र है. वहीं दूसरी ओर बुरी शक्ति के रूप में अंधेरी की रानी जुनून (मौनी रॉय) इस ब्रह्मास्त्र को हथियाना चाहती है. अब शिवा, ईशा और ब्रह्मांश के सदस्य किस तरह ब्रह्मास्त्र की सुरक्षा करते हैं और कहानी क्या रुख लेती है, इसे जानने के लिए थिएटर जाएं.
डायरेक्शन
वेकअप सिड, ये जवानी है दीवानी जैसी फिल्मों में अपने डायरेक्शन का लोहा मनवाने के बाद एक लंबे समय के अंतराल में अयान मुखर्जी सबसे महंगी फिल्म ब्रह्मास्त्र लेकर आए हैं. अयान ने इस कहानी के जरिए माइथॉलजी और आज के कंट्रेप्ररी दौर को ब्लेंड कर बड़ी ही खूबसूरती से परोसा है. मसलन शिवा और ईशा को भगवान शिव और पार्वती के प्रतिकात्मक रूप में प्रस्तुत करना, पांच तत्वों को शक्ति के रूप में दर्शाना वाकई भव्य लगता है. फिल्म की जान है उसका वीएफएक्स और जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस, जिसकी वजह से स्क्रीन पर आप आंखें टिकाए बैठते हैं. वहीं कहानी का पक्ष थोड़ा सा कमजोर नजर आता है. अगर इस फिल्म की कहानी और क्लाइमैक्स पर ध्यान दिया जाता, तो इस फिल्म का हमारी इंडियन सिनेमा के कल्ट फिल्मों में शुमार होना तय था. फिल्म विजुअली जितनी स्ट्रॉन्ग है, डायलॉग्स के मामले में उतनी ही ढीली नजर आती है. ऐसी भव्य फिल्म में डायलॉग्स पर खासकर फोकस किया जाना चाहिए था, जहां अयान की चूक साफ नजर आती है. अगर इतने दमदार फिल्म में डायलॉग्स सपाट हों, तो फिल्म के इंपैक्ट पर जाहिर सी बात है फर्क पड़ता है. हालांकि कुछ रोमांचक दृश्य और दो सुपरस्टार्स की मौजूदगी आपको सरप्राइज जरूर करेगी. फर्स्ट हाफ में रणबीर-आलिया की लव केमिस्ट्री को स्टैबलिश करने के चक्कर में फिल्म थोड़ी सी खिंची जान पड़ती है. वहीं नंदी बैल की शक्ति लिए नागार्जुन का फाइट सीक्वेंस और वानर अस्त्र की शक्ति लिए सुपरस्टार(स्पॉइलर अलर्ट) की दिलचस्प लड़ाई देख कर वाकई आप तालियां बजाने पर मजबूर होंगे. पहले हाफ की तुलना में सेकेंड हाफ थोड़ी सुस्त व प्रेडिक्टिबल है. हालांकि कहानी को जिस मोड़ पर खत्म किया है, वहां आपमें अगले सीक्वल को लेकर उत्सुकता जरूर जगेगी. शिव के बाद आप 'देव' की दुनिया में प्रवेश करने के लिए तैयार रहें.
टेक्निकल और म्यूजिक
वीएफक्स को लेकर फिल्म पर पैनी निगाह रखी जा रही थी कि क्या ये हॉलीवुड को टक्कर दे पाएगी. इसमें कोई शक नहीं कि अयान इसमें कमतर साबित नहीं हुए हैं. इंडियन सिनेमा में इस कदर का वीएफएक्स दर्शकों के लिए ट्रीट है. दावा है कि इसका मजा केवल थिएटर में ही लिया जा सकता है. वीएफएक्स टीम और अयान का डेडिकेशन साफ नजर आता है. क्रोमा में शूटिंग का ड्रॉ-बैक यह होता है कि कई बार दर्शकों से गलतियां पकड़ ली जाती हैं लेकिन यहां आप गलतियां खोजने में असफल होते हैं. पूरी टीम को बधाई क्योंकि विजुअली फिल्म इंटरनैशनल एवेंजर्स जैसी फिल्मों के टक्कर की है. सिनेमैटोग्राफी की भी तारीफ की जानी चाहिए, यहां बनारस, मुंबई, हिमाचल प्रदेश को फ्रेम दर फ्रेम खूबसूरती से दिखाया है. वहीं एडिटिंग का पार्ट भी डिसेंट रहा है. हालांकि कुछ सीन्स ड्रैग जरूर लगे हैं, जिसे एडिट कर फिल्म को और क्रिस्प किया जा सकता था. बैकग्राउंड स्कोर फिल्म में जान डालते हैं. बेशक गाने रिलीज से पहले चार्टबस्टर पर रूल कर रहे हों, लेकिन फिल्म के दौरान फिल्म की रफ्तार पर खलल डालते महसूस होते हैं.
एक्टिंग
इस फिल्म का मजबूत पक्ष स्टार्स की परफॉर्मेंस भी है. गुरू के रूप में महानायक वाकई अपनी प्रभावशाली एक्टिंग से गुरू ही लगते हैं. रणबीर कपूर ने किरदार में जान डाल दी है. शिवा के रूप में आग से खेलते रणबीर की एक्टिंग जबरदस्त रही है. आलिया भट्ट ने अपना काम मजबूती से किया है. मौनी रॉय की एक्टिंग सरप्राइज करती है. हालांकि कुछ एक सीन में उनकी आइकॉनिक किरदार नागिन की झलक मिलती है. नंदी की शक्ति लिए नागार्जुन अक्किनेनी जब भी स्क्रीन पर आते हैं, उन्हें देखकर तालियां बजाने का मन जरूर करता है. दो सुपरस्टार्स (जिनका नाम रिवील नहीं किया जा सकता) कम समय पर लेकिन अपना प्रभाव जरूर छोड़ जाते हैं. हां, यहां एक बात जो खलती है, वो आलिया-रणबीर की केमिस्ट्री. रियल लाइफ कपल्स होने के बावजूद आलिया-रणबीर की केमिस्ट्री वो मैजिक क्रिएट नहीं कर पाती है. हालांकि उनकी परफॉर्मेंस जबरदस्त रही है, लेकिन वो स्पार्क की कमी महसूस होती है.
क्यों देखें
इस फिल्म का मजा केवल बड़े पर्दे पर ही लिया जा सकता है और खासकर 3डी पर फिल्म देखने के दौरान आप खुद को उस दुनिया से जुड़ा पाते हैं. विजुअल इफेक्ट्स और जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस इस फिल्म का प्लस पॉइंट है जिसे सिनेमा लवर्स एक स्टडी के रूप में देख सकते हैं. बॉलीवुड इंडस्ट्री के पावर कपल पहली बार स्क्रीन पर साथ नजर आ रहे हैं. तो ऐसे में 'रालिया' के फैंस के लिए इससे बड़ी ट्रीट क्या हो सकती है. कई सरप्राइजिंग एलिमेंट्स से जुड़ी यह फिल्म एक सिनेमैटिक राइड पर लेकर जाती है, ऐसे में एक मौका देना, तो जरूर बनता है.