मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की एक पीएचडी स्टूडेंट केट डीबियास्की (जेनिफर लॉरेन्स) बहुत बड़ी वाली दूरबीन से आसमान ताकती रहती है. ये उसकी पढ़ाई का हिस्सा है. वो खगोलशास्त्री डॉक्टर रैंडेल मिंडी (लियोनार्डो डिकेप्रियो) की देख-रेख में काम कर रही है. एक दिन उसे मालूम पड़ता है कि एक बहुत बड़ा उल्कापिंड धरती की ओर बढ़ रहा है. कितना बड़ा? जितना बड़ा माउंट एवरेस्ट है, उतना बड़ा.
चूंकि विज्ञान का मामला था इसलिये केट और मिंडी ने मिलकर ये भी पता लगा लिया कि वो ठीक कितने दिन और कितने मिनटों में आकर धरती से टकराएगा. अनुमान ये था कि धरती से उसके टकराते ही धरती तबाह हो जाएगी और इंसानों की पूरी नस्ल जड़ से खत्म हो जाएगी. इन दोनों के ऊपर ज़िम्मेदारी होती है दुनिया को सचेत करने की. इस जिम्मेदारी से ये जी नहीं चुराते हैं और वो सरफुड़ौव्वल जो इस फ़िल्म 'डोंट लुक अप' की कहानी बनती है.
हकीकत से ताल्लुख रखती है फिल्म
डायरेक्टर ऐडम मैकाय की ये फिल्म मौजूदा हालात की एक तस्वीर पेश करती है. फिल्म भले ही दुनिया के नष्ट होने और इंसानों के खात्मे से डील कर रही होती है लेकिन इसमें भरपूर कॉमेडी है. और यही इस फिल्म को बेहद डार्क बना देती है. 'डोंट लुक अप' के पोस्टर पर आपको लिखा दिखता है - संभावित सत्य घटनाओं पर आधारित (Based on truly possible events). और ये वाकई सच है. ये सारी घटनाएं (या ऐसी घटनाएं) यदि अभी नहीं घटी हैं तो बहुत ही जल्द घटती दिखेंगी.
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'डोंट लुक अप' एक डार्क सटायर है जिसमें ऐडम मैकाय और पत्रकार डेविड सिरोटा (दोनों इस फ़िल्म के लेखक हैं) ने झोला भर के मौजूदा मीडिया-सोशल मीडिया-पत्रकारिता-राजनीति के कॉकटेल पर तंज कसे हैं. फिल्म में डिकेप्रियो और जेनिफर लॉरेन्स के अलावा रिकॉर्ड 21 बार एकेडमी अवॉर्ड के लिये नामांकित हो चुकीं एक्ट्रेस मेरिल स्ट्रीप भी हैं. मेरिल अमरीकी राष्ट्रपति जेनी ऑरलीन के रोल में हैं जो 'डोंट लुक अप' मूवमेंट की शुरुआत करती हैं. फिल्म की कहानी के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति एक बहुत बुरे दौर से गुजर रही है और खुद को बचाने, अपनी सत्ता को बचाने के क्रम में वो इस आपदा का पूरा दोहन करने की हर संभव कोशिश करती दिखती हैं.
कैसे राजनीति का उठाया जाता है फायदा?
'डोंट लुक अप' मूवमेंट उनके ही दिमाग की उपज है जिसे उनके चीफ ऑफ स्टाफ जेसन ऑरलीन (जोनाह हिल का किरदार) का भरपूर समर्थन मिलता है. असल में राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ उनके बेटे ही हैं. संभव है (?) कि ये ऐंगल ऐडम मैकाय ने पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल से उठाया है जहां ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर बगैर किसी पूर्व राजनीतिक अनुभव के, राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार बन गए और उन्हें खाड़ी देशों की बड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपी गयीं.
पूरी फिल्म इस एक बात को दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे अंत के मुंहाने पर खड़ी इंसानी जमात उस खतरे के इर्द-गिर्द होने वाले खिलवाड़ का शिकार बन जाती है. इस खिलवाड़ की शुरुआत और उसे एक ठोस रूप देने वाले मुट्ठी भर लोग, जिनके पास सही पहुंच और पैसा रुपी ताकत है, अपने-अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने में लगे होते हैं. और इस पूरे कार्यक्रम के दौरान, हर घटते मिनट के साथ, पूरी दुनिया उस अंतिम पूर्ण विराम के नजदीक बढ़ती जा रही है. फोन बनाने वाली एक कंपनी को जहां उस उल्कापिंड में मौजूद तमाम धातुओं का लोभ रहता है (जिसे वो राष्ट्रहित में इस्तेमाल करते हुए देश को चीन से आगे निकालने की बात कहता है), वहीं राष्ट्रपति एक वयोवृद्ध दक्षिणपंथी रिटायर्ड सैनिक को सांकेतिक हीरो बनाने का कार्यक्रम आयोजित कर अपनी साख पर लगे सभी दाग धोने की कोशिश करती हैं.
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इस कार्यक्रम में राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने सरीखी बातें संलग्न होती हैं और दसियों हजार किलोमीटर दूर बैठे हम हिन्दी-भाषी इससे पूरी तरह से कनेक्टेड महसूस कर लेते हैं. इसी कार्यक्रम में 'डोंट लुक अप' का नारा दिया जाता है जो इस फिल्म का सूत्रवाक्य है अपने अंदर बहुत कुछ समेटे हुए है. फिल्म में पत्रकारिता, सोशल मीडिया की पत्रकारिता और ब्लॉग कल्चर और उसके असर को भी बखूबी दिखाया गया है. यहां फिर से याद दिला दिया जाए कि फिल्म के लेखक डेविड सिरोटा खुद एक पत्रकार हैं (और द गार्डियन के कॉलमनिस्ट हैं, जिसने इस फिल्म को 'disaster' बताया है).
कैसी रही एक्टिंग?
घबराहट से जूझने वाले एक वैज्ञानिक की भूमिका में लियोनार्डो डिकेप्रियो ने चौका मारा है. कितने ही दृश्यों में वो भयानक कन्विंसिंग लगे हैं और कहीं भी मामला ढीला पड़ता नहीं दिखता. गांजा पीने की शौकीन, गैर-ट्रेंडी लुक वाली मुंहफट पीएचडी स्टूडेंट केट डीबियास्की के रूप में जेनिफर लॉरेन्स जब स्क्रीन पर गुस्से से फटती हैं तो वो फ़्रस्ट्रेशन एकदम सच मालूम देती है और यहीं उनको सारे नंबर मिल जाते हैं. मेरिल स्ट्रीप तो मेरिल स्ट्रीप हैं, उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिये. (ये मेरा बायस दिखाता है, लेकिन चलेगा). जोनाह हिल को उनकी तबीयत के हिसाब से रोल मिला है और वो एकदम फिट बैठे दिखते हैं. आप चाहते हैं कि वो स्क्रीन पर और दिखें. मनीबॉल का महानर्ड पीटर ब्रैंड 21 जम्प स्ट्रीट होते हुए वुल्फ ऑफ वॉल स्ट्रीट पहुंचा और वहां से राष्ट्रपति का बेटा बन बैठा है. टाइमिंग के मामले में जोनाह हिल का कोई सानी नहीं दिखता. फिल्म शानदार कलाकारों का एक मोंटाज है जिसमें कोई भी उन्नीस नहीं मालूम देगा.
ब्लैक कॉमेडी के लिये जाने जाने वाले ऐडम मैकाय ने अपने बार को एक लेवल और ऊपर उठाया है. ऐंकरमैन से शुरू हुआ सफर वाइस और अब 'डोंट लुक अप' पर आया है और वो एक के बाद एक बढ़िया चोट करते जा रहे हैं.
यदि आप सोशल मीडिया पर आंख-नाक-कान खोलकर समय बिताते हैं, मीडिया का 'कॉन्टेंट' समझते हैं और राजनीतिक परिदृश्य पर नजर रखते हैं तो इस फिल्म के एक-एक किरदार, एक-एक समीकरण और एक-एक सीक्वेंस से खुद को जुड़ा हुआ पायेंगे. कितनी जगहों पर, किरदारों की बेवकूफी, उनकी कही बातों, उनके किये कर्मों के चलते खुद का सिर पीटने का मन करेगा, लेकिन आप पायेंगे कि वाकई ये फिल्म संभावित सत्य घटनाओं पर आधारित है. 'डोंट लुक अप' फिल्मी-ग्लैमरस दुनिया का मजाक उड़ाते हुए, उसी फिल्मी-ग्लैमरस दुनिया में आयी है और एक अच्छा, ठोस स्टेटमेंट जारी कर रही है.