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Film Review: गुरु नानक की शिक्षाओं का संकलन है 'नानक शाह फकीर'

डायरेक्टर सरताज सिंह पन्नू ने सिखों के पहले गुरु 'गुरु नानक' की शिक्षाओं पर आधारित फिल्म बनाने की कोशिश की है जिसमें जन्म से महान गुरु 'गुरु नानक' कहलाने तक की सारी छोटी छोटी बातों को दर्शाया गया है.

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फिल्म का पोस्टर
फिल्म का पोस्टर

फिल्म का नाम: नानक शाह फकीर
डायरेक्टर: सरताज सिंह पन्नू
स्टार कास्ट: आरिफ जकारिया, पुनीत सिक्का, आदिल हुसैन, अनुराग अरोड़ा, श्रद्धा कौल
अवधि: 145.10 मिनट
सर्टिफिकेट: U

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डायरेक्टर सरताज सिंह पन्नू ने सिखों के पहले गुरु 'गुरु नानक' की शिक्षाओं पर आधारित फिल्म बनाने की कोशिश की है जिसमें जन्म से महान गुरु 'गुरु नानक' कहलाने तक की सारी छोटी छोटी बातों को दर्शाया गया है.

कहानी
पंजाब के तलवंडी (जो अब पाकिस्तान में है) में एक खत्री परिवार में जन्म होता है 'नानक जी' का. जन्मपत्री के अनुसार उन्हें भगवान का अवतार कहा गया. वो अपने गुरु के एक सवाल पूछे जाने पर दो नए सवाल रख दिया करते थे. बचपन से ही उनकी बहन 'नानकी' को अपने भाई नानक के फकीरी मिजाज का पता था जिसके कारण हमेशा वो नानक को बहुत ही सुरक्षित रखती थी.

नानक जी का सुल्तानपुर बाजार (पंजाब) जाकर काम करना, सच्चा सौदा करके साधुओं को भोजन कराना, मरजाना को मरदाना नाम देना, शासक दौलत खान को सच की राह दिखाना, बच्चों श्रीचंद और लक्ष्मीचंद को उनकी मां के पास छोड़कर संसार को सच्चाई की राह पर चलने की शिक्षा देना, अलग अलग जगहों जैसे बनारस, सयैदपुर , बोध गया, जगन्नाथपुरी, तिब्बत, पानीपत जाकर लोगो से मिलना ; यह सब कुछ इस फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है. साथ ही 'लंगर' लगने की प्रथा के बारे में भी यह फिल्म में दिखाया गया है.

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डायरेक्शन और एक्टिंग
फिल्म में अभिनेता आरिफ जकारिया, आदिल हुसैन और बाकी के किरदारों ने अच्छी एक्टिंग की है. वहीं डायरेक्टर ने बड़े ही अच्छे ढंग से बचपन से लेकर आखिर तक 'गुरु नानक' जी को एक 'दिव्य ज्योति' के रूप में दिखाया है. इस वजह से उनकी बातों और उपदेशों को महसूस किया जा सकता है. डायरेक्टर ने उस जमाने के रहन सहन और लिखावट का भी विशेष ध्यान रखा है. जैसे स्याही से लिखना, डोली में शादीशुदा लड़की का जाना.

डायलॉग और संगीत
इस फिल्म के संवाद भी काफी अहम हैं और 'गुरु नानक' के उपदेशों का ही संकलन है जैसे 'धरती के नीचे असंख्य पाताल और ऊपर असंख्य आसमान ' और 'नब्ज शरीर का रोग बताती है, मन का नहीं.'

फिल्म का संगीत उत्तम सिंह ने तैयार किया है जिसे सुनकर आप उस दौर में चले जाते हैं. संगीत पर विशेष देख रेख खुद ए आर रहमान ने की है. पंडित जसराज, भाई निर्मल सिंह खालसा ने गानों को अपनी आवाज दी है.

क्यों देखें फिल्म?
अगर गुरु नानक देव और उनके उपदेशों के बारे में जानने की जिज्ञासा है तो ये फिल्म जरूर देखें.

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