प्यार के मामले, रिश्ते और शादियां सामने से जितनी आसान नजर आती हैं, अंदर से उतनी ही मुश्किल भी होती हैं. 'कुछ कुछ होता है' के राहुल ने कहा था कि प्यार एक बार होता है. लेकिन राहुल गलत था, क्योंकि प्यार सिर्फ एक बार नहीं होता. और अगर होता भी है तो ऐसा नहीं है कि कभी खत्म नहीं होता. प्यार में हर कोई एक दूसरे के लिए मरने-मिटने को तैयार नहीं होता, ये फीलिंग और इसके साथ आने वाला रिश्ता और उसकी जिम्मेदारी चांद तारे तोड़ लाने से ज्यादा भारी होती है.
उलझे रिश्तों की कहानी है गहराइयां
एक इंसान का अतीत उसके आज को बनाता है. कहते हैं कि अगर आप अपने डीमन्स से लड़ना नहीं सीखोगे तो फिर जिंदगीभर भागते ही रह जाओगे. अपने अतीत से बाहर आने और प्यार की उलझी कहानी है, शकुन बत्रा की फिल्म गहराइयां. इस फिल्म में प्यार के साथ झूठ है, धोखा है, सच्चाई भी है और रिश्तों में लिपटी उलझने भी.
यूं तो शादी के बाद अफेयर और बेवफाई की कहानियां हम सभी ने बॉलीवुड में कई बार बनते देखी है, लेकिन 'गहराइयां' इस टॉपिक को और गहराई से दिखाती है. फिल्म में एक रिश्ते के होते हुए भी उसके खत्म होने के कारणों पर बात की है. यह फिल्म प्रोग्रेसिव है और साथ ही आप इससे जुड़ भी जाते हैं.
ये कहानी है अलीशा, टिया, करण और जेएन की. अलीशा (दीपिका पादुकोण) अपने अतीत के घाव आजतक भर नहीं पाई है. इसकी वजह से उसका रिश्ता अपने पिता (नसीरुद्दीन शाह) से खराब है. साथ ही अलीशा अपने करियर में भी बड़ी उड़ान नहीं उड़ पा रही है. करण (धैर्य करवा), अलीशा का बॉयफ्रेंड है, जो अपनी नौकरी छोड़ राइटर बन गया है. लेकिन वो भी अपनी किताब को लिखने में स्ट्रगल कर रहा है. टिया (अनन्या पांडे), अलीशा की कजिन है. टिया की जिंदगी ऐश और आराम से भरी है. साथ में है उसका मंगेतर जेएन (सिद्धांत चतुर्वेदी), जो छोटे घर से आने के बाद बिजनेस इंडस्ट्री में अपना बड़ा नाम बना चुका है और करोड़ों का मालिक है.
जेएन और अलीशा भले ही अपनी जिंदगी में पार्टनर्स को पा चुके हैं, लेकिन दोनों फिर भी खुद को अधूरा महसूस करते हैं. दोनों के रिश्ते अपने पार्टनर्स के लिए खास नहीं चल रहे हैं. अलीशा और करण में रोज लड़ाई होती है और जेएन, टिया के लिए अब वैसा महसूस नहीं करता, जैसा कभी किया करता था. ऐसे में जब जेएन और अलीशा एक दूसरे से मिलते हैं तो उन्हें वो मिल जाता है जिसकी दोनों की जिंदगी में कमी थी. लेकिन रिश्ते इतने सीधे होते, तो क्या ही बात थी...
दीपिका पादुकोण ने लूटी महफिल
यह कहानी लव स्टोरी के साथ-साथ सस्पेंस और ड्रामा से भी भरी हुई है. दीपिका पादुकोण ने फिल्म में बेहतरीन काम करके महफिल लूट ली है. दीपिका ने कॉम्प्लिकेटेड किरदारों की नब्ज को ऐसा पकड़ा है कि कमाल करके ही दिखाती हैं. सिद्धांत चतुर्वेदी की परफॉरमेंस में काफी दम तो है. लेकिन उन्हें और पोलिश की जरूरत भी है. धैर्य करवा ने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है. अनन्या पांडे का काम भी ठीक है. फिल्म जैसे जैसे आगे बढ़ती है अनन्या को अपने एक्टिंग टैलेंट को दिखाने का मौका दिया जाता है. नसीरुद्दीन शाह और रजत कपूर जैसे एक्टर्स के काम पर शक तो आप कभी कर ही नहीं सकते.
*ट्रिगर वार्निंग*
फिल्म के कुछ सीन्स आपको असहज महसूस करवा सकते हैं तो आपको ट्रिगर वार्निंग दे रही हूं. साथ ही दीपिका पादुकोण और सिद्धांत चतुर्वेदी के बोल्ड सीन्स में उतना दम नहीं है, जितना इन्हें लेकर शोर हो रहा था.
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शकुन की फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और म्यूजिक इसे लाजवाब बनाता है. साथ ही इस फिल्म की रफ्तार इसकी कहानी को मैच करती है. शकुन ने इस फिल्म को जितना हो सके गहरा बनाया है. अपने किरदारों के इमोशंस को खुलकर दर्शकों के सामने रखा है. उन्होंने सुमित रॉय, आयेशा दावित्रे और यश सहाय के साथ मिलकर इस फिल्म को लिखा है. गहराइयां आपको बहुत कुछ महसूस करवाती है, लेकिन फिर भी इसमें कुछ कमी है. फिल्म में बहुत-सी उलझनें एकदम आसानी से सुलझा दी गई हैं. कुछ कमियों के बावजूद यह कहानी शुरू से अंत तक आपको अपने साथ जोड़े रखने में सफल होती है.
अगर आप इस वीकेंड प्यार की कम्प्लेक्सिटीज की गहराइयों को डूबना चाहें तो दीपिका पादुकोण की इस फिल्म को एक चांस दे सकते हैं.