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Ghoomer Review: जज्बे की कहानी है अभिषेक बच्चन-सैयामी खेर की 'घूमर', देखकर होंगे इमोशनल

जिंदगी में कई मौके आते हैं जब हम हिम्मत हारकर बैठ जाते हैं, लेकिन यही वो पल भी होते हैं जब हमें खुद को पुश करने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. ऐसा ही कुछ आपको अभिषेक बच्चन और सैयामी खेर की नई फिल्म 'घूमर' से सीखने को मिलता है. इस फिल्म में क्या है खास, जानें हमारे रिव्यू में.

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अभिषेक बच्चन, सैयामी खेर
अभिषेक बच्चन, सैयामी खेर
फिल्म: घूमर
3.5/5
  • कलाकार : अभिषेक बच्चन, सैयामी खेर, शबाना आजमी, अंगद बेदी
  • निर्देशक : आर बाल्की

जिंदगी में कई मौके आते हैं जब हम हिम्मत हारकर बैठ जाते हैं, लेकिन यही वो पल भी होते हैं जब हमें खुद को पुश करने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. ऐसा ही कुछ आपको अभिषेक बच्चन और सैयामी खेर की नई फिल्म 'घूमर' से सीखने को मिलता है. प्रेरणा और लगन की कहानी से भरपूर इस फिल्म को देखकर आपका दिल खुश होने वाला है.

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क्या है फिल्म की कहानी?

'घूमर' की कहानी अनीना (सैयामी खेर) नाम की एक यंग लड़की की है. अनीना क्रिकेट खिलाड़ी है और भारत की नेशनल वीमन्स क्रिकेट टीम में खेलने का सपना देखती है. सबकुछ सही चल रहा होता है जब अचानक एक हादसे में अनीना अपना दायां हाथ खो देती है. उसका क्रिकेट खेलने का सपना टूट चुका है और अब वो मर जाना चाहती है. फिर अनीना के दरवाजे पर पद्म सिंह सोढ़ी उर्फ पैडी सर (अभिषेक बच्चन) नाम का शख्स दस्तक देता है. पैडी एक पूर्व क्रिकेटर है, जो दुनिया और अपनी जिंदगी से नाराज है. साथ ही शराबी भी है. पैडी के साथ मिलकर अनीना अपनी जिंदगी को दूसरा चांस देती है.

घूमर की कहानी असल जिंदगी के एथलीट से काफी हद तक प्रेरित है. इस एथलीट ने अपने हाथ के साथ हुए हादसे के बाद भारत के लिए दो ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते थे. यहां डायरेक्टर आर बाल्की ने बिना देरी किए दर्शकों को अनीना की जिंदगी से रूबरू करवाया है. फिल्म की कहानी जज्बे और हमदर्दी से भरी हुई है. आप इसमें अनीना के स्ट्रगल को देखते हुए परेशान होते हैं तो उसकी मेहनत पर आपका दिल भी खुश होता है. लेकिन फिल्म में किसी भी पल अनीना को मजबूर नहीं दिखाया गया है और ये देखना काफी अच्छा रहा. दूसरी तरफ पैडी के हाल देखकर आपका दिल भी दुखता है. 

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अभिषेक ने किया कमाल

अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म में काफी अच्छा काम किया है. उनका लुक और अंदाज तो अच्छा है ही, साथ ही कभी जीत का स्वाद न चखने पर जो मोमोलॉग उन्होंने दिया है वो भी आपके अंदर तक पहुंचता है और आपकी आंखों को नम कर देता है. कुछ बढ़िया सीन्स में से एक दिवाली वाला सीन भी है, जिसमें पैडी बने अभिषेक, अनीना बनी सैयामी की लिमिट को पुश करते हैं. एक और सीन में अभिषेक अपनी धूल खा रही क्रिकेट जर्सी और खराब हो रहे जूतों को दोबारा पहनकर अनीना को देखने की तैयारी करते हैं. इन सभी सीन्स संग पूरी फिल्म में अभिषेक बच्चन का परफॉरमेंस कहीं डगमगाता नहीं है. डायरेक्टर आर बाल्की आपको इमोशनल करने में भी कहीं नाकाम नहीं होते.

फिल्म की लीडिंग लेडी सैयामी खेर ने अपना काम काफी अच्छे से किया है. एक हाथ खो चुकी लड़की के इस रोल को करना बेहद मुश्किल रहा होगा और सैयामी की मेहनत पर्दे पर साफ झलकती है. हर बार गिरना, गिरकर उठना, दोबारा से नई शुरुआत करना जैसी चीजें देखकर आप सैयामी से प्रेरित होते हैं. मेरा पर्सनल फेवरेट सीन वो है जब अनीना के एक्सीडेंट के बाद उसका दोस्त जीत (अंगद बेदी) अपने प्यार का इजहार उससे करता है और वो गुस्से में उसे भगा देती है. अनीना कहती हैं कि मेरी हालत पर दया खाकर तू खुद को हीरो समझना चाहता है और ये मुझे गंवारा नहीं है. वो नहीं चाहती कि कोई उसे बेचारा समझे.

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फिल्म में अनीना की दादी का रोल शबाना आजमी ने निभाया है. वो एक स्ट्रॉन्ग बच्ची की स्ट्रॉन्ग और समझदार दादी बनी है, जो उसके सपने पूरे करने में उसका साथ देती है. साथ ही उसके स्कोर को भी टैली करती है. शबाना का काम इस फिल्म में बढ़िया है. अंगद बेदी, अनीना के बॉयफ्रेंड जीत के रोल में काफी अच्छे लगे. उनका काम भी तारीफ के लायक है. एक्ट्रेस इवांका दास ने छोटा लेकिन काफी अच्छा रोल निभाया है. उन्हें स्क्रीन पर देखना मजेदार था. ये स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म काफी बढ़िया है, जिसे एक चांस तो आप जरूर दे सकते हैं.

 

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