फिल्म रिव्यू: रमैया वस्तावैया
पांच में से दो स्टार
अगर आपका कूची कूची रोमांस चल रहा है, गर्लफ्रेंड टैडी बीयर देने पर खुश हो जाती है, बॉयफ्रेंड फिल्म के लिए हां बोलते ही मुस्कुराने लगता है, तो प्रभु देवा की फिल्म रमैया वस्तावैया आपको कुछ काम की लग सकती है. तमाम यंग कपल क्लासेस बंक करके, मम्मी से झूठ बोलकर और दोस्तों को गोली देकर फिल्म देखने पहुंच रहे हैं. जब पर्दे पर श्रुति हसन रंगीन सूटों और लहंगों में चहकती हैं, तो लड़कियां खुश हो जाती हैं. जब रईस मगर जमीनी सोच वाला गिरीश अपनी चुहल से उसे सताता और फिर हंसाता है, तो वे और भी खुश हो अपने बॉयफ्रेंड की तरफ देखने लगती हैं. मगर जब फिल्म खत्म हो जाती है, तो वे भी बोर हो जाती हैं. तो जो इस जमात में नहीं हैं, उनका क्या हाल होगा, आप समझ ही सकते हैं.
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शानदार मसाला फिल्में बनाने वाले प्रभु देवा ने टिप्स के मालिक कुमार तोरानी के बेटे गिरीश को लॉन्च करने के फेर में अपना ट्रैक रेकॉर्ड खराब कर लिया. फिल्म देख सकते हैं, अगर किसी के गिरने से, किसी के फिसलने से आपको हंसी आती है, मिल्स एंड बून मार्का रोमांस पसंद है और मैंने प्यार किया या दिल या फिर प्यार किया तो डरना क्या जैसी फिल्में ज्यादा नहीं देखी हैं. गाने आधे अच्छे हैं, आधे जबरन हैं और एक्टिंग के नाम पर ऐसी तबाही मचाई गई है कि आंख मूंद लेने का मन करता है.
कहानी के नाम पर जो नकल परोसी गई
मैंने प्यार किया याद करिए. राजश्री के सूरज बड़जात्या को स्थापित करने वाली फिल्म. कबूतर इसके पहले नवाबों के लिए जंग लड़ते थे, मगर इसके बाद प्यार का प्रतीक बन गए. सड़कों पर इनके स्टीकर और गुच्छों की भरमार हो गई. बहरहाल, फिल्म की कहानी ऐसी थी कि रईस लड़का, गरीब मगर सुंदर और सुशील लड़की. मुलाकात, झगड़ा, दोस्ती और फिर प्यार. इसे मुमकिन बनाने के लिए एक वैंप टाइप की लड़की, एक विलेन टाइप का लौंडा और जिद पर अड़े लड़के के मां या बाप.लड़की के भाई या बाप की बेइज्जती. लड़के की माफी और ये साबित करने के लिए कि वह लड़की से सच्चा प्यार करता है, मेहनतकश जिंदगी.आप सोच रहे होंगे कि ये घिसीपिटी कहानी क्यों सुना रहा हूं और इसका रमैया वस्तावैया से क्या लेना देना. जी, असल में यह इस फिल्म की भी कहानी है.और आखिर तक मैं यह नहीं समझ पाता कि फिल्म का नाम यह क्यों रखा गया.
एक्टिंग वगैरह कैसी है हीरो हीरोइन की
गिरीश इतने भी बुरे नहीं लगते, जितने की उम्मीद थी. शरारत और रोमांस में कहीं कहीं छुअन महसूस करते हैं दर्शक. श्रुति खूबसूरत हैं, मगर ऐसा लगता है, जैसे उन्हें सांस की तकलीफ हो और आवाज बड़ी मुश्किल से आ रही हो.सोनू सूद को भुजा दिखाते, आंख तरेरते रोल में हम पहले भी देख चुके हों और इस तरह की रेंज उन्होंने जोधा अकबर में ही हासिल कर ली थी. इस फिल्म से सबसे बड़ी शिकायत है, बेहद उम्दा एक्टर्स को भद्दे जोकरों जैसे रोल में खर्च करने को लेकर. गोविंद नामदेव, जाकिर हुसैन, नासार जैसे शानदार अभिनेताओं को बंदर की तरह अजीब हरकतें करने को कह दिया गया है. धिक्कार है ऐसे मसाला सिनेमा पर. और सर्कस के एक बौने की तरह परेश गनात्रा हैं, जिन पर गमला गिरता है, चाय गिरती है और फिर भी सब हंसते रहते हैं. करंट लगाऊ, कमर फटकाऊ फूहड़ कॉमेडी की भरमार है. रणधीर कपूर को न एक्टिंग आती थी न आएगी. सतीश शाह खल चरित्र करते हैं, तो मुंह में कंकर फंसता है. यही हाल पूनम ढिल्लो का भी है.
देवा रे देवा ये क्या किया तुमने
प्रभु देवा की फिल्म. मतलब कुछ फनी टोन्स, मजाक, एक्शन और चीकी शालीमार टॉकीज टाइप डायलॉग्स. यहां इनमें से काफी कम डिलीवर हुआ. एक्शन हो या कहानी का अंत, सब कुछ अनुमान की पगडंडी पर सरपट भागता है. कुछ गाने अच्छे हैं, मगर रॉम कॉम के फेर में गाने कुछ ज्यादा ही हैं. इस चक्कर में जो अच्छे हैं, उनके हिस्से का क्रेडिट भी घट जाता है. फिल्म में कहीं कहीं असल कॉमेडी की झलक दिखती है. मसलन एक एक्टर जो हमेशा फोन पर रहता है और उस वक्त ऐसी बात बोल रहा होता है, जो सबकी पोल खोलती दिखती है. पर ये बहुत नाकाफी है.और फिल्म की पोल खुलने से बचा नहीं पाता.