किसी किताब को उसके कवर से जज नहीं करना चाहिए. परिणीति की साइना के साथ ऐसा ही हुआ था जब मेकर्स ने फिल्म का पोस्टर रिलीज किया. बवाल हुआ, मजाक बना और रिलीज से पहले ही फिल्म का फ्लॉप बता दिया. अब उस कहानी को पीछे छोड़ते हुए 26 मार्च की बात करते हैं जब साइना बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है. क्या परिणीति की साइना ने हर ट्रोल को करारा जवाब दिया है या नहीं, जानते हैं.
साइना की कहानी परिणीति की जुबानी
साइना नेहवाल की जिंदगी को बड़े पर्दे पर दिखाना कोई आसान काम नहीं है. क्रिकेट पर फिल्म बनती है तो लोग पहले से काफी कुछ जानते हैं, मेकर्स के पास भी जानकारी इकट्ठा करने के कई सारे सोर्स होते हैं. लेकिन बैडमिंटन के साथ ऐसा नहीं है. इसे ना तो कभी बड़े लेवल पर कवर किया जाता है और ना ही किसी स्टार प्लेयर को जबरदस्त लाइमलाइट दी जाती है. ऐसे में कह सकते हैं कि परिणीति की फिल्म के जरिए पहली बार हमे साइना नेहवाल की कहानी पता चल रही है. बताया जा रहा है कि साइना नेहवाल वर्ल्ड 1 जरूर बनीं, लेकिन उसके पीछे एक बड़ा संघर्ष है, कई लोगों की दुआ है और मजबूत इच्छाशक्ति है.
कहा से शुरू हुआ था वो सफर, कौन-कौन सी चुनौतियां पहाड़ की तरह सामने आईं, क्या हमेशा चैंपियन रहीं नेहवाल, फेलियर का कैसा सामना किया? डायरेक्टर अमोल गुप्ते ने साइना के जरिए इन चार सवालों का जवाब बड़ी ही डिटेलिंग के साथ दिया है और इन्हीं सवालों पर टिकी है 135 मिनट लंबी परिणीति की ये फिल्म.
साइना ने कमाल किया या निराश?
अगर 'सीधी बात नो बकवास' वाले फंडे पर चलें तो कहना बनता है- परिणीति चोपड़ा की साइना शानदार है, बेहतरीन है और एक अच्छी बायोपिक साबित होने वाले सारे गुण अपने अंदर रखती है. मतलब ना फिल्म को ज्यादा लंबा खींचा गया, ना फिल्म में जरूरत से ज्यादा मेलोड्रामा लगा, ना फिल्म एक बार भी फेक लगी. सबकुछ बिल्कुल सही मात्रा में परोसा गया और देखते ही देखते हमे हल्के-फुल्के अंदाज में भारतीय स्टार बैडमिंटन प्लेयर साइना नेहवाल की कहानी पता चल गई.
एक्टिंग डिपार्टमेंट दमदार
साइना देखने लायक इसलिए बन पाई है क्योंकि फिल्म की स्टारकास्ट ने इसे देखने लायक बना दिया है. सभी ने बढ़िया काम किया है. परिणीति चोपड़ा तो टॉप फॉर्म में चल रही हैं. बैडमिंटन की भाषा में बोले तो कई सारे स्मैश मार दिए हैं और हर स्मैश उन्हें फुल प्वाइंट दे गया है. इसे उनके करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस कह दिया जाए, तो ये अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए. उनकी बस शक्ल साइना नेहवाल से मैच नहीं खाई, बाकी सबकुछ तो सेम टू सेम रहा है. खेलने का स्टाइल, बोलने का लहजा, ड्रेसिंग सैंस, आप कोई भी पहलू उठा लें और परिणीति न्याय करती दिख जाएंगी.
बड़ा प्लस प्वाइंट क्या है?
अब असल जिंदगी में साइना नेहवाल की सफलता के पीछे उनकी मां का बड़ा हाथ रहा है. मेकर्स ने इस बात को बहुत गंभीरता से लिया और उस रोल के लिए मेघना मलिक को कास्ट कर लिया. ये फैसला एकदम सटीक साबित हुआ क्योंकि मेघना ने अपने अनुभव का पूरा फायदा उठा लिया है. हरियाणवी टच के साथ उन्होंने साइना की मां का रोल बखूबी निभा लिया है. पिता के रोल में शुभ्राज्योति बारात भी कमाल का काम कर गए हैं. परिणीति संग तो उनकी बॉन्डिंग गजब की लगी है. फिल्म में मानव कौल को भी कास्ट किया गया है. वे साइना नेहवाल के कोच की भूमिका में दिखाई दिए हैं. उन्होंने कोई एक्टिंग नहीं की है, एकदम नेचुरल दिखे हैं.
कोई कमी रह गई?
साइना का डायरेक्शन सधा हुआ कहा जाएगा. अमोल गुप्ते ने बिना बोर किए एक खूबसूरत कहानी दर्शकों को परोस दी है. तारीफ इसलिए भी बनती है क्योंकि साइना नेहवाल की जिंदगी के साथ जुड़े हर किरदार को पूरी स्पेस दी गई है, निखरने का मौका मिला है. लेकिन एक बात थोड़ी खटकी भी. फिल्म बैडमिंटन पर बनाई गई थी, तो इस लिहाज से दर्शकों को बैडमिंटन के बेहतरीन मैच देखने का मौका मिलना चाहिए था. ऐसा नहीं है कि मैच दिखाए नहीं गए हैं, लेकिन कम हैं और जो दिखे भी हैं उनमें इंटेनसिंटी थोड़ी कम रह गई है.
बड़ी बहन प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम में काम किया था. शानदार लगी थीं. अब छोटी बहन परिणीति ने साइना में काम किया है और वे गदर मचा गई हैं. फिल्म देख डालिए, निराशा नहीं ढेर सारी मोटिवेशन मिल जाएगी.