
एक अच्छी फिल्म की परिभाषा हर नई फिल्म, कहानी, किरदार के साथ बदलती रहती है. लेकिन एक अच्छी फिल्म की खासियत ये होती है कि वो बड़े तबके पर छाप छोड़ते हुए अपने भीतर छिपी कई कहानियों को बताने का माद्दा रखती है. अमेजन प्राइम वीडियो (Prime Video) पर हाल ही में बॉक्सिंग से जुड़ी दो फिल्में रिलीज हुई हैं, पहली तूफान और दूसरी सारपट्टा परंबरै (Sarpatta Parambarai). हम यहां पर दूसरी फिल्म की बात करेंगे, जो तमिल फिल्म (Tamil Movie) है.
पी. रंजीत की ये फिल्म मद्रास की कहानी है, जहां पर बॉक्सिंग (Boxing) का जुनून सवार है. फिल्म 1970 के दशक में सेट है, जहां बॉक्सिंग क्लब के दो गुटों के बीच संघर्ष चल रहा है. एक युवा बॉक्सर की लड़ाई, गुरु का सपना, पारिवारिक संबंध इन सब मुद्दों को छूते हुए, ये कहानी आपको 70 के दशक की राष्ट्रीय राजनीति की झलक भी दिखाती है और इमरजेंसी के काले दिन का खौफ भी दर्शाती है. यही कारण है कि इस फिल्म में एक कहानी में कई कहानियां छिपी हुई हैं.
कहानी की शुरुआत और अंत...
तो कहानी ऐसी है कि 70 के दशक में मद्रास में फैक्ट्री में एक लड़का (Kabilan) काम कर रहा है, शिफ्ट खत्म होने का इंतजार करते ही वो लोकल बॉक्सिंग मैच देखने जाता है, क्योंकि बॉक्सिंग उसका जुनून है. लेकिन वो इसे करियर इसलिए नहीं बना पाया क्योंकि उसके पिता भी बॉक्सर थे और इसी लाइन में रहते हुए गुंडागुर्दी में उतरे और मारे गए. ऐसे में मां ने इस लड़के को बॉक्सिंग में नहीं आने दिया.
यहां बॉक्सिंग के दो गुट बने हुए हैं, सारपट्टा और इडियप्पा. बस सारा संघर्ष इन दोनों के बीच का ही है. अपने जमाने के दो कोच सिर्फ अपनी टीम को जिताना चाहते हैं. फिल्म का हीरो Kabilan सारपट्टा ग्रुप का है, जो लंबे वक्त से बॉक्सिंग टाइटल नहीं जीता है. सारपट्टा ग्रुप का गुरु रंगन कई लोगों को आजमाने के बाद किसी तरह Kabilan को लड़ाने पर राजी होता है और एक बार जीत तक पहुंचकर मौका चूक जाता है.
इस पूरी कहानी के बीच फिल्म में इमरजेंसी (Emergency) के दौर को भी दिखाया गया है, जहां तमिलनाडु में डीएमके की सरकार का जोर है. डीएमके के समर्थक चारों ओर फैले हुए हैं. और इंदिरा गांधी की सरकार की आलोचना की जा रही है. अखबार-रेडियो में लगातार इमरजेंसी को लेकर चर्चा जोरो पर है. बीच में तमिलनाडु की सरकार बर्खास्त होती है, लोग जेल में भर दिए जाते हैं. इस दौर में ये बिल्कुल नहीं लगता है कि फिल्म एक बॉक्सिंग की कहानी को लेकर शुरू हुई थी. इसी सबके बीच दोनों गुटों के बीच का गैंगवॉर भी दिखाई देता है, यानी बॉक्सिंग से शुरू हुई फिल्म आपको इमरजेंसी, गैंगवार और पारिवारिक संघर्ष को दिखाएगी.
फिल्म अभी रिलीज हुई है, प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है ऐसे में यहां पर इतनी ही कहानी का ज़िक्र करना ठीक रहेगा. ताकि आप फिल्म भी देख पाएं.
फिल्म में काम और नाम...
फिल्म में आर्या मुख्य किरदार यानी Kabilan को निभा रहे हैं. एक बॉक्सर के लिए जो तैयारी उन्हें करनी थी, वो उनके शरीर को देखकर फिल्म में लगती है. इसके अलावा पारिवारिक संघर्ष, बॉक्सिंग छोड़ फिर गैंगवॉर और दोबारा बॉक्सिंग में लौटने के दौरान बॉडी का शेप जो बदला, उसमें बेहतरीन काम किया गया है. साथ ही इमोशनल और फाइटिंग सीन में आर्या बेहतरीन लगे हैं.
हीरो से अलग फिल्म की सबसे बेहतरीन कड़ी कोच रंगन का किरदार निभाने वाले पशुपति हैं, जिन्हें आपने कई साउथ फिल्मों में ज़रूर देखा होगा. पूरे किरदार के लिए जिस इंटेंस की ज़रूरत थी, वो पूरी फिल्म के दौरान दिखा है. जिसमें एग्रेसिव व्यक्ति और खड़ूस कोच का रुख है, खास बात ये कि रंगन का लुक आपको के. कामराज की याद दिला सकता है.
इन दो मुख्य किरदारों से इतर Kalaiyarasan का कैरेक्टर आपको सबसे बेहतर लगेगा, जो गुरुजी का बेटा है. मेहनती होने के बावजूद वो जो चाहता है, उसे नहीं मिलता है. बीच में किरदार के लिए आपको कुछ सिम्पैथी भी लगेगी, लेकिन तुरंत गायब भी हो जाएगा.
क्यों एक अच्छी फिल्म साबित हुई सारपट्टा परंबरै?
अगर निष्कर्ष पर पहुंचें, तो फिल्म सिर्फ एक स्पोर्ट इवेंट बनकर नहीं रह जाती है और यही इसकी खासियत है. क्योंकि किसी भी मूमेंट तक पहुंचने से पहले जिस कहानी की आप उम्मीद करते हो वो यहां पर दिखाई पड़ती है. पहले हाफ में भले ही बॉक्सर की जिंदगी आसानी से चलती दिख रही हो, लेकिन दूसरे हाफ में इतना संघर्ष सामने आता है कि वो पहले की भरपाई कर देता है.
फिल्म में राजनीतिक तंज कसे गए हैं, 70 के दशक की राजनीति समझा दी गई है, एक खेल के प्रति कैसे इलाकों की जंग चल रही है उसे समझाया गया है. साथ ही इस सबके बीच मानवीय पहलू को दिखाया गया है, जो बॉक्सर का मां और पत्नी संग रिश्ता, पिता को खोने का दर्द, गुरु से रिश्ता, गुरु और उसके बेटे का मनमुटाव को साथ जोड़ा गया है.
ऐसे में तमिल भाषा में आई इस फिल्म को देखना आपके लिए एक बुरा अनुभव नहीं होगा. वो भी तब जब हाल ही में बॉक्सिंग से जुड़ी फिल्म तूफान सामने आई और उससे लोगों को बड़ी निराशा हाथ लगी थी.