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'The Last Hour' review: पहाड़ों की खूबसूरती में होती मौतों का सस्पेंस, 'वक्त' के खेल में फंसी द लास्ट आवर

देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नए-नए कॉन्सेप्ट को अपनाया जा रहा है, इसी के तहत एक बेव सीरीज आई है, जिसे आप टाइम ट्रैवल कह सकते हैं. मोटामोटी ऐसे समझिए कहानी के बीच कहानी, आगे जाकर पीछे आने की कहानी. वेब सीरीज का नाम है द लास्ट आवर. आइए जानते हैं आखिर क्या द लास्ट आवर ऐसी वेब सीरीज है, जिसे 6-7 घंटे दिए जा सकते हैं या नहीं...

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The Last Hour Poster
The Last Hour Poster

वक्त के साथ बाजीगरी, ये कॉन्सेप्ट फिल्म-वेब सीरीज मेकर्स के लिए एक नई स्टोरी लाइन मिली है. रोमांस, एक्शन, फैमिली ड्रामा, कॉमेडी मसाला जैसी फिल्में बनाने में बॉलीवुड माहिर है, लेकिन इस कॉन्सेप्ट में अभी तक बहुत कुछ नहीं हुआ है. कुछ हुआ भी है जैसे- एक्शन रिप्ले आदि फिल्में तो वो प्यार के भंवर में उलझकर फ्लॉप ही रही हैं. हालांकि, हॉलीवुड इसमें मास्टर रहा है, हालिया रिलीज टेनेट हो या फिर इंस्पेशन, एज ऑफ टुमारो जैसी कई बेहतरीन टाइम ट्रैवल मूवीज मिल चुकी हैं. मार्वल साइंस फिक्शन फिल्में भी अब इसी के आसपास घूम रही हैं. 

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अब देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नए-नए कॉन्सेप्ट को अपनाया जा रहा है, इसी के तहत एक बेव सीरीज आई है, जिसे आप टाइम ट्रैवल कह सकते हैं. मोटामोटी ऐसे समझिए कहानी के बीच कहानी, आगे जाकर पीछे आने की कहानी. वेब सीरीज का नाम है द लास्ट आवर. आइए जानते हैं आखिर क्या द लास्ट आवर ऐसी वेब सीरीज है, जिसके  लिए 6-7 घंटे दिए जा सकते हैं या नहीं... 

क्या है कहानी?
सीरीज में संजय कपूर (अरूप) एक पुलिस अफसर की भूमिका में हैं, जिसकी पोस्टिंग मुंबई से नॉर्थ ईस्ट में होती है. अरूप की एक बेटी है, जिसका नाम परी (Shaylee Krishen) है. वहीं उनकी पत्नी नईमा (राइमा सेन) की एक हादसे में मौत हो जाती है. नॉर्थ ईस्ट में अरूप की मुलाकात देव (कर्मा तकापा) से होती है, जो कि एक झाकरी है. नॉर्थ ईस्ट, नेपाल जैसे पहाड़ी इलाकों में पाए जाने वाले एक तरह के तांत्रिक. सीरीज में दिखाया गया है कि देव धरती से लौटने वाली आत्माओं से बात कर सकता है. प्यार के साथ यहां कहानी तांत्रिकों के बीच अपनी परंपरा को लेकर भी है. किसके पास कौन सी विद्या रहेगी और उसका उपयोग वो कैसे करता है, कहानी इसी के वर्चस्व को लेकर है. 

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पहले एपिसोड से आखिरी तक सीरीज में किसी न किसी की मौत होती रहती है और पूरी कहानी में समय को फोकस में रखा गया है. अब वेब सीरीज का टाइल द लास्ट आवर उससे कैसे कनेक्ट करता है, ये वेब सीरीज में देखें तो ज्यादा अच्छा है. खैर आगे बाते करते हैं अरूप, देव की मदद से केसेज सॉल्व करता है. लिपिका (Shahana Goswami) जो कि एक पुलिस इंस्पेक्टर हैं पूरी सीरीज में अरूप के साथ केसेज में असिस्ट करती हैं. कहानी में कई बार ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं. अब देव की मदद से अरूप केस सॉल्व कर पाता है या नहीं, और इन पूरी कहानी में अरूप की बेटी परी और पत्नी नईमा का क्या रोल है, ये सब जानने के लिए आपको वेब सीरीज देखनी पड़ेगी. 

एक्टिंग 
सबसे पहले बात एक्टिंग की करते हैं. संजय कपूर 26 सालों से इंडस्ट्री में एक्टिव हैं, लेकिन अपने भाई अनिल कपूर जैसी सफलता पाने में नाकामयाब रहे हैं. फिलहाल वो ओटीटी पर काफी एक्टिव हैं, फिल्मों और वेब सीरीज में वो साइड रोल निभाते दिखते हैं. इस सीरीज में उन्हें लीड रोल मिला है फिर भी वो साइड रोल में ही सिमट कर रहे हैं. 

वेब सीरीज में अगर एक्टिंग के मामले देखा जाए तो कर्मा तकापा ने अच्छा काम किया है. उन्होंने अपने रोल को बड़ी इंटेंसिटी के साथ निभाया है. शहाना गोस्वामी ने भी अपने किरदार को अच्छे से पकड़े रखा. राइमा सेन को इस सीरीज में मुश्किल से दो डायलॉग मिले हैं, अगर उनकी जगह कोई और भी ये रोल निभाता तो खास फर्क नहीं पड़ता. शाइली, परी के रोल में मिसफिट नजर आईं. 

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शूटिंग, लोकेशन और पहाड़ की बात 
वेब सीरीज में नॉर्थ ईस्ट की खूबसूरती को बेहतरीन तरीक से दिखाने की एक अच्छी कोशिश की गई है. ग्राफिक्स का अच्छा इस्तेमाल किया है. बादलों की हलचल से लेकर पहाड़ों पर गिरी बर्फ तक, सुकून देने वाला है. वेब सीरीज में कई ऐसे डायलॉग जो वहां के लोगों के बारे में पूर्वाग्रह के तहत बोले जाते हैं. इस ओर भी राइटर ने ध्यान दिया है. 

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वेब सीरीज का डारेक्शन
वेब सीरीज को अमित कुमार ने डायरेक्ट किया है. अमित कुमार का डायरेक्शन सीरीज में ठीक रहा है. अमित इससे पहले इरफान खान की बायपास, नवाजुद्दीन की मॉनसून शूटआउट जैसी फिल्में बना चुके हैं. द लास्ट आवर की बात की जाए तो अमित कुमार के पास काफी स्कोप था इसमें एक्सपेरिमेंट करने का जिससे सीरीज को और इंटरेस्टिंग बनाए जा सके. कई जगह पर वेब सीरीज बोरिंग हो गई थी. कहानी को अगर 8 एपिसोड की जगह 5 या 6 में एपिसोड में भी पूरा किया जा सकता था. कहानी खिंच गई. ऐसा लगा कि वेब सीरीज खुद ही समय के खेल में फंस गईं. अमित कुमार वेब सीरीज में प्यार-रोमांस को भी फिल्माने में असफल रहे. ओवर ऑल ठीक-ठाक स्टारकास्ट के साथ एक थकी हुई कहानी, जिसमें सस्पेंस बनाने की कोशिश की गई है, पर कई जगह पर आप खुद ही पहले बता दें कि आगे क्या होने वाला है, जोकि एक सस्पेंस या थ्रिलर वाले कंटेंट के साथ नहीं होना चाहिए.

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अच्छी और नई चीज
वेब सीरीज की खासियत रही नॉर्थ ईस्ट एक्टर्स को मौका देना. इसमें कई नॉर्थ ईस्ट के स्टार्स आपको देखने को मिलेंगे, जो आपको एक फ्रैशनेस देंगे. कहानी भी पूरी तरह से नॉर्थ-ईस्ट के इर्द-गिर्द घूमी, जो आपको बॉलीवुड के मसालेदार कंटेंट से इतर कुछ अच्छा फील देगा. 

वेबसीरीज जहां खत्म होती है वहां से कहानी जरूर आगे बढ़ेगी और कहानी आगे बढ़ाने के चक्कर में मेकर इसका प्रॉपर अंत नहीं कर पाया है. 

क्यों न देखें?
सबसे पहले तो जिन्हें स्लो कंटेंट देखने में दिलचस्पी नहीं है और जो सलमान खान की ताल पर सीटीमारने के लिए बेसब्र रहते हैं उनके लिए ये वेब सीरीज नहीं है. तो वन टाइम वॉच है. 


 

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