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Torbaaz Review: तबाही से बचे अफगानी बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बने संजय दत्त

संजय दत्त की फिल्म तोरबाज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. अफगानिस्तान के रिफ्यूजी कैंप और उसमें रहने वाले बच्चों के जीवन को दिखाती इस फिल्म की कहानी में क्या है खास और क्यों आपको देखनी चाहिए यह फिल्म, जानिए हमारे रिव्यू में.

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फिल्म तोरबाज में संजय दत्त
फिल्म तोरबाज में संजय दत्त
फिल्म:तोरबाज
3.5/5
  • कलाकार : संजय दत्त, नरगिस फाखरी, राहुल देव
  • निर्देशक :गिरीश मलिक

कभी कभी बहुत सी चीजें आपके जीवन में ऐसी आती हैं, जिनके बारे में आप भले ही कितनी बढ़िया सोच रखें, उसका अंजाम वही होता है जो होना होता है. फिल्म तोरबाज में भी आपको कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा. इस फिल्म के साथ संजय दत्त दूसरी बार हमारे मोबाइल/लैपटॉप की स्क्रीन पर नजर आए हैं. इत्तेफाक से इस बार भी वह ऐसे इंसान का किरदार निभा रहे हैं, जो खुद किसी को खोने के बाद कुछ पाने में दूसरों की मदद कर रहा है.

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क्या है फिल्म की कहानी?

तोरबाज कहानी है एक एक्स आर्मी डॉक्टर नसीर खान (संजय दत्त) की जो एक बॉम्ब ब्लास्ट में अपने बच्चे और बीवी को खो चुका है. उसके परिवार को गए भले ही कई साल हो गए हैं लेकिन नसीर का दर्द अभी भी ताजा है. नसीर के परिवार की जान अफगानिस्तान में एक सुसाइड बॉम्बर बच्चे की वजह से गई थी. सालों बाद जब वो इस 'मुर्दों की बस्ती' में वापस लौटता है तो उसके गम भी हरे हो जाते हैं. लेकिन फिर उसे मिलता है रिफ्यूजी कैंप के बच्चों का साथ.

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दुनिया में यूं तो बहुत से खेल हैं, लेकिन अफगानिस्तान में क्रिकेट का अपना महत्व है. इसी महत्व को समझते हुए नसीर खान रिफ्यूजी कैंप के बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देना शुरू करता है. नसीर का मकसद इन बच्चों को अच्छा भविष्य देना है. लेकिन उसकी राह का रोड़ा खुद तालिबान है, जो बच्चों को सुसाइड बॉम्बर बनाना चाहता है. अपने मकसद में नसीर कामयाब होता है या तालिबान यही देखने वाली बात है. 

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परफॉरमेंस 

फिल्म में संजय दत्त ने अच्छा काम किया है. दर्द में जीते हुए उम्मीद की किरण को देखना और फिर बच्चों का भला करने वाले इंसान का किरदार उन्होंने काफी बढ़िया तरीके से निभाया है. संजय दत्त के चेहरे का दर्द और बच्चों के साथ उनकी मस्ती, दोनों ही आपके दिल तक पहुंचते हैं. एक्ट्रेस नरगिस फाखरी ने इस फिल्म में आयेशा का किरदार निभाया है और उनका काम भी ठीक था. फिल्म में परफॉरमेंस राहुल देव की देखने लायक थी. राहुल तालिबान के लीडर कजार के रोल में हैं और उन्होंने बढ़िया काम किया है. फिल्म में जावद मलिक और रेहान शेख जैसे चाइल्ड आर्टिस्ट ने काम किया है. इन बच्चों ने इस फिल्म को और बेहतर बनाया. 

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इस फिल्म का निर्देशन गिरीश मलिक ने किया है. इससे पहले उन्होंने फिल्म जल को बनाया था, जिसे काफी पसंद किया गया था. तोरबाज में गिरीश आपको अफगानिस्तान के हाल दिखाने की कोशिश करते हैं, जिससे आपको एक अलग दुनिया में झांकने का मौका मिलता है. क्रिकेट के नाम की उम्मीद देते हैं, लेकिन फिर भी फिल्म में थोड़ी कमी रह ही जाती है. तोरबाज और बेहतर फिल्म हो सकती थी, लेकिन फिर भी यह आपको प्रेरित जरूर करती है. 

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