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Yaariyan 2 Review: भाई-बहन के रिश्तों पर एक फ्रेश ट्रीटमेंट है 'यारियां 2', म्यूजिक का भरपूर डोज

Yaariyan 2 Review: बॉलीवुड में भाई-बहन, खासकर कजिन के रिश्तों पर काफी कम फिल्में एक्सप्लोर की गई हैं. दिव्या खोसला की फिल्म 'यारियां 2', इसी अनोखे बॉन्डिंग पर बात करती है.

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यारियां 2
यारियां 2
फिल्म:यारियां 2
3/5
  • कलाकार : दिव्या खोसला, मिजान जाफरी, पर्ल वी पूरी, यश दासगुप्ता, लिलिट दूबे
  • निर्देशक :राधिका राव, विनय सप्रू

आज से लगभग दस साल पहले एक दिव्या खोसला के निर्देशन में यारियां आई थी. फिल्म यूथ, कॉलेज, रोमांस और दोस्ती के इमोशन को समेटे हुई थी. वहीं दिव्या खोसला एक बार फिर इसी टाइटल के साथ तैयार हैं. हालांकि इसमें थोड़ा ट्विस्ट है, पहला ये कि फिल्म को दिव्या डायरेक्ट नहीं बल्कि इसमें एक्ट कर रही हैं और दूसरा ट्विस्ट इसमें दोस्तों के बारे में नहीं बल्कि भाई-बहन और उनकी यारियों की बात हो रही है. 

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कहानी
शिमला की रहने वाली लाडली (दिव्या खोसला) बचपन से ब्यूटी क्वीन बनने का सपना देखा करती थी. हालांकि उनकी सिंगल मां (लिलेट दुबे) चाहती हैं कि वो अपना घर बसा ले. लव मैरिज के सपने देखने वाली लाडली की अरेंज मैरिज कर दी जाती है. शादी के बाद लाडली अपने पति (यश दासगुप्ता) के साथ मुंबई शिफ्ट हो जाती हैं. यहां उसके दो कजिन बजरंग (पर्ल वी पूरी) और शिखर रंधावा (मीजान जाफरी) भी अपने-अपने काम के सिलसिले में इसी शहर में शिफ्ट हो जाते हैं. मुंबई में इनकी निजी जिंदगी में बहुत भंयकर बदलाव आते हैं. ऐसे में एक दूसरी की मदद करते हुए ये भाई-बहन कैसे अपनी यारियां निभाते हैं, कहानी का सार यही है. 

डायरेक्शन 
इस बार फिल्म का डायरेक्शन विनय सप्रू और राधिका राव ने संभाला है. फिल्म की खासियत इसका फ्रेश कंटेंट है. दरअसल भाई-बहन के रिश्तों को डेडिकेट करते हुए आस-पास के सालों में शायद ही कोई फिल्म बनी हो. डायरेक्टर ने डायलॉग्स भी आज के दौर के यूथ और उनकी सिचुएशन को ध्यान में रखते हुए लिखा, जिससे दर्शकों की रिलेटिबिलिटी बढ़ती है. हालांकि इसके स्क्रीनप्ले पर अगर थोड़ा और काम किया होता, तो फिल्म का पक्ष और भी मजबूत हो जाता. दरअसल फर्स्ट हाफ तक कहानी पूरी उलझी हुई सी नजर आती है.

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चारों ट्रैक की बैकस्टोरी बनाने के चक्कर में पहला हिस्सा खिचड़ी सा लगता है. हालांकि सेकेंड हाफ में फिल्म के उलझे धागे खुलते जरूर हैं, ट्रैक पर कहानी चलती है और तमाम तरह के इमोशन को बखूबी स्क्रीन पर प्रेजेंट भी करती है. दोनों ही हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी सी महसूस होती है. कई बार कुछ सीन्स बिना वजह ठूंसे हुए से भी लगते हैं. एडिटिंग की अदद जरूरत थी. किरदारों की भी ओवर डिटेलिंग दिखाना भी थोड़ा बोरिंग लगता है. हालांकि टुकड़ों पर कई सीन्स बेहद ही इमोशनल लगते हैं. कई बार फिल्म देखते वक्त महसूस होता है कि कोई एल्बम वीडियो चल रहा हो, यह एक्सपेरिमेंट दर्शकों के लिए थोड़ा फ्रेश हो सकता है. ओवरऑल फिल्म एंटरटेनिंग है, हर तरह के इमोशन से सराबोर हैं. 

टेक्निकल ऐंड म्यूजिक 
फिल्म का मजबूत पक्ष इसका म्यूजिक है. अमूमन कहानी में जब गानें आते हैं, तो कई बार रूकावट से लगते हैं, इस फिल्म के हर पांच से दस मिनट में गाने हैं, लेकिन आप उसे खलल न मानते हुए इंजॉय करते हैं. गानों का सिलेक्शन बहुत उम्दा है और हर फ्रेम म्यूजिक वीडियो वाला फील देता है. सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म की कमाल की रही. हां, कुछ क्लोजअप शॉट्स में फेस पर कलर करेक्शन और एडिटिंग का काम उभर कर दिखता है. स्क्रीन पर फिल्म बहुत खूबसूरत लगती है.

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परफॉर्मेंस 
इस फिल्म के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सभी एक्टर की परफॉर्मेंस ने चौंकाया है. दिव्या का काम बेहतरीन रहा है. बतौर एक्ट्रेस दिव्या ने खुद को बहुत ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा काम करना चाहिए. मीजान ने अपने बाइक रेसर किरदार को भी बहुत बखूबी इमोट किया है. मीजान में एक मास वाले हीरो की वो सारी क्वालिटी नजर आती है. कल को अगर मीजान नैशनल क्रश बन जाएं, तो इसमें हैरानी नहीं होगी. पर्ल वी पूरी भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करते नजर आते हैं. यहां सरप्राइज किया है, यश दासगुप्ता ने. उनके ट्रैक को बहुत ही दिलचस्प तरीके से लिखा गया है और उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से उसे जस्टिफाई भी किया है. 

क्यों देखें 
भाई-बहन के रिश्ते पर एक फ्रेश कहानी का ट्रीटमेंट है. इमोशन के सारे डोज भरपूर मात्रा में मिलेंगे. खासकर म्यूजिक इस फिल्म का सबसे मजबूत पहलू है. इस वीकेंड अपने कजिन के साथ इस फिल्म का लुत्फ उठा सकते हैं. सिनेमालवर्स इसे एक बार मौका दे सकते हैं. 

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