13 साल पहले आई जेम्स कैमरन की फिल्म 'अवतार' आज तक दुनिया की सबसे कमाऊ फिल्म है. ऑलमोस्ट 3 बिलियन डॉलर कमाने वाली इस फिल्म को देखने के बाद लोग आंखें मलते रह जा रहे थे. तब स्पेशल इफेक्ट्स के मामले में इतनी शानदार फिल्में भी नहीं आती थीं और ऐसे में 'अवतार' में कैमरन ने पंडोरा की जो अद्भुत दुनिया स्क्रीन पर रची उसे देखते लोगों की आंखें नहीं थक रही थीं. यही वजह है कि फिल्म के सीक्वल का इंतजार पूरी दुनिया बेसब्री से कर रही थी.
बीते शुक्रवार फाइनली 'अवतार: द वे ऑफ वाटर' थिएटर्स में रिलीज हो गई. 'अवतार 2' के नाम से पॉपुलर हो रही इस फिल्म को देखने के बाद हर कोई यही कह रहा है कि कैमरन से बेहतर सीक्वल बनाना कोई नहीं जानता. उम्मीद लगाईं जा रही है कि 'अवतार 2' पहली फिल्म से भी बड़ी हिट होगी. लेकिन इस रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन है खुद फिल्म का बजट, जो रिपोर्ट्स के हिसाब से 350 मिलियन से 400 मिलियन डॉलर के बीच बताया जा रहा है. यानी भारत के हिसाब से 2900 करोड़ रुपये के करीब.
जेम्स कैमरन सिर्फ एक स्टोरी टेलर ही नहीं हैं, बल्कि अपने आप में एक बेहतरीन तकनीशियन भी हैं. 'अवतार' के लिए ही उन्होंने फिल्म मेकिंग की तकनीकों को अपने इनोवेटिव तरीके से और डेवलप किया था. 'अवतार 2' के ली वो पिछली बार से भी ज्यादा आगे गए हैं. आइए बताते हैं वो क्या तकनीक हैं जिनकी वजह से 'अवतार 2' में दिख रहा पंडोरा इतना रियल लगता है और फिल्म का बजट इतना बढ़ जाता है:
परफॉरमेंस कैप्चर
पंडोरा में रहने वाले जिन नावी (Na'avi) लोगों को आप स्क्रीन पर देखते हैं, उनके मोशन ग्राफिक्स के जरिए तैयार किए जाते है. इसलिए सबसे जरूरी चीज है उन किरदारों का फिजिकल मोशन. मतलब, वो कैसे हाथ उठाते हैं, कैसे चलते हैं वगैरह. ये काम होता है मोशन कैप्चर से. मोशन कैप्चर के लिए एक्टर्स या आर्टिस्ट्स को स्पेशल बॉडी सूट पहनाए जाते हैं.
इन सूट्स में जो लाल रंग की छोटी-छोटी डॉट्स हैं, वो असल में मार्कर हैं जो इन्फ्रारेड लाइट को, फिक्स कैमरे पर रिफ्लेक्ट करते हैं. इन मार्कर्स के लिए आर्टिस्ट का मोशन रिकॉर्ड होता है.
मोशन कैप्चर नहीं परफॉर्मेंस कैप्चर
अवतार बनाते समय कैमरन चाहते थे कि उनके किरदार भले रियल नहीं वर्चुअल हैं. मगर उनके चेहरे पर बिल्कुल ह्यूमन इमोशन होने चाहिए. तो उन्होंने मोशन कैप्चर के हेड गियर में आगे की तरफ एक छोटा HD कैमरा लगवाया, जो एक्टर्स के एक्सप्रेशन रिकॉर्ड करता है.
आर्टिफीशियल लेकिन ह्यूमन
हेडगियर के साथ कैमरा लगाने का कमाल ये हुआ कि अवतार के किरदारों के इमोशन बहुत रियल थे, एक इंसानी चेहरे की तरह. इस एक चीज ने दर्शकों को सबसे ज्यादा हैरान किया था.
वॉल्यूम कैप्चर
नॉर्मल मोशन कैप्चर आपको कई फिल्मों में देखने को मिलेगा. लेकिन कैमरन ने जो तकनीक इस्तेमाल की, उसमें एक अलग एलिमेंट है जिसे वो 'द वॉल्यूम' कहते हैं. इस फोटो में आपको ऊपर जो फ्रेम दिख रहा है, बताया जाता है कि उसमें 120 स्टेशनरी कैमरे हैं, जो मार्कर को रीड करते हैं.
इससे किसी भी एक जगह पर कैरेक्टर या ऑब्जेक्ट की एक्यूरेसी बहुत बेहतर हो जाती है.
फिजिकल फुटेज
शूट करते समय HD कैमरों से फिजिकल फुटेज भी शूट की जाती है, जो मोशन कैप्चर के साथ एक ग्राफिक संसार को स्क्रीन पर उतारने के लिए ज्यादा क्रिएटिव ऑप्शन देती है.
कैमरन एक खास वर्चुअल कैमरा भी इस्तेमाल करते हैं जो सेट पर मोशन कैप्चर में आ रहे किरदारों को, एक लगभग उसी तरह के सेट एनीमेशन संसार में दिखाता है, जो फाइनली बनाया जाना है.
फ्यूजन 3डी कैमरा
इस स्पेशल कैमरा रिग में दो सोनी F 90 कैमरा होते हैं, एक वर्टिकल और एक हॉरिजॉन्टल. दो अलग कैमरों का ये कॉम्बिनेशन इंसान की दोनों अलग-अलग आंखों के विजन की तरह फुटेज रिकॉर्ड करता है. इस कैमरे से शूट हुई फुटेज इसीलिए ज्यादा रियल लगती है.
ये कैमरा मोशन कैप्चर को, लाइव एक्शन के साथ जोड़ने में भी काम आता है और इस तरह लेयर्स में किरदार और उनका संसार डेवलप होता चला जाता है.
स्विंग कैमरा
कैमरन का ये कैमरा उन्हें कंप्यूटर जेनरेटेड सीन्स के साथ, लाइव एक्शन सीन्स डायरेक्ट करने में हेल्प करता है. यानी उनके सामने जो आर्टिस्ट रियलिटी में मूव कर रहा है, इस कैमरे की स्क्रीन में वो कैमरन को वर्चुअल संसार में दिख रहा है. इसलिए वो आर्टिस्ट के हिसाब से अपना कैमरा एडजस्ट कर सकते हैं.
पूरे शूट का सबसे बड़ा खेल यहीं होता है. ट्रेडिशनल CGI में ग्रीन स्क्रीन के सामने आर्टिस्ट की फुटेज रिकॉर्ड की जाती है और उसे डिजिटली बने संसार में फिट किया जाता है. जबकि यहां आर्टिस्ट के पर्सपेक्टिव में आपको वर्चुअल संसार दिखता है. इसीलिए आपको अवतार दूसरी 3डी फिल्मों से ज्यादा रियल फील होती है.
अंडर वाटर शूट
अधिकतर CGI वाले अंडरवाटर सीन इस तरह शूट हुए कि आर्टिस्ट को हार्नेस से हवा में लटका दिया जाता है. और वो हवा में इस तरह मूव करते हैं जैसे पानी में तैर रहे हों.
मगर जेम्स कैमरन का एजेंडा ही यही है कि उन्हें सबकुछ बहुत ऑथेंटिक चाहिए. तो उन्होंने एक विशाल टैंक बनवाया और उसमें पानी भरकर शूट किया. इस शूट के लिए उन्होंने फिर से एक अलग तरह का कैमरा इस्तेमाल किया. अभी तक अंडरवाटर शूट में जो कैमरा होते थे वो एक बॉक्स जैसे स्ट्रक्चर में होते थे, यानी कैमरे के लिंक के आगे भी एक ग्लास होता था. मगर कैमरन के कैमरे में सीधा लेंस ही बाहर की तरफ होता था, इससे सीन्स में नॉइस कम हुआ.
स्कूबा गियर के बिना पानी में उतरे कलाकार
कैमरन को सीन्स में कोई डिस्टर्बेंस या नॉइस नहीं चाहिए थी. लेकिन अगर स्कूबा गियर के साथ आर्टिस्ट पानी में उतरते तो बबल भी आते. इसका एक ही इलाज हो सकता था कि एक्टर्स सांस रोक कर पानी में उतरें. तो सभी एक्टर्स को खास ट्रेनिंग दिलवाई गई और उन्होंने पानी में सांस रोक कर सीन्स शूट किए.
सांस रोकने का रिकॉर्ड
दुनिया की सबसे पॉपुलर एक्ट्रेसेज में से एक केट विंसलेट ने तो फिल्म शूट के लिए सांस रोकने का रिकॉर्ड ही बना डाला. उन्होंने 7 मिनट 14 सेकंड तक अपनी सांस रोक कर रखी. उनसे पहले ये रिकॉर्ड टॉम क्रूज के नाम था. उन्होंने 'मिशन इम्पॉसिबल- रोग नेशन' के लिए 6 मिनट तक सांस रोकी थी.
अनोखी दिक्कत, इनोवेटिव सॉल्यूशन
टैंक में मोशन कैप्चर करने की दिक्कत ये थी कि पानी के सर्फेस पर लाइट का रिफ्लेक्शन भी पड़ता है. इस कि वजह से आर्टिस्ट के बॉडी सूट के मार्कर गलत रिकॉर्ड होने लगे.
एक बार फिर कैमरन की टीम ने एक अनोखा तरीका निकाला. पानी पर वाइट प्लास्टिक की छोटी-छोटी बॉल्स बिछा दी गईं. अब पानी के अंदर रौशनी तो जा रही थी, लेकिन रिफ्लेक्शन गायब हो गया.