'साहित्य आजतक 2022' के दूसरे दिन की शुरुआत हंस राज हंस के गीत से हुई. इस दौरान उन्होंने गायक जगजीत सिंह को याद करते हुए शानदार परफॉर्मेंस दीं. साहित्य आजतक का सिलसिला जारी रहा और इसी के साथ कंपोजर, गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर कौसर मुनीर ने फिल्म इंडस्ट्री में कंपोजर्स और सिंगर्स की लाइफ से जुड़ी परेशानियों के बारे में बात की. साथ ही बताया कि आजकल की फिल्मों में किस तरह आइटम नंबर होना कितना जरूरी हो गया है.
कौसर मुनीर ने कही यह बात
कौसर मुनीर ने बतौर गीतकार टीवी शो 'जस्सी जैसा कोई नहीं' के टाइटल ट्रैक से की. इसके बाद कौसर मुनीर ने 'टशन' का सुपरहिट गाना 'फलक तक' लिखा. इसके अलावा कौसर मुनीर ने 'इश्कजादे', 'धूम 3', 'एक था टाइगर', 'बजरंगी भाईजान', 'डियर जिंदगी' जैसी फिल्मों के गाने लिखे हैं. कौसर मुनीर ने आइटम नंबर को लेकर कहा, "युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा कॉन्टेंट कन्ज्यूम करती है. हमें युवा पीढ़ी की भाषा को समझना होगा. फिल्मों में अगर आइटम सॉन्ग्स की बात करें तो वह तो गुलजार साहब ने भी लिखे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गानों का मतलब खत्म कर दिया जाए. जो यंग लोग इंडस्ट्री में आ रहे हैं, उन्हें पुराने गीतकारों से सीखना चाहिए. शब्दों पर पकड़ बनानी चाहिए. अगर आप कर सकें तो एक ऐसी हवा चलाइए कि वह सोचकर चले कि हां गाने के बोल सही हैं."
आजकल रीमिक्स का जो दौर है, वह आजकल कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रहा है. क्योंकि क्लासिकल गाने पसंद करने वाले लोगों को यह पसंद आएगा ही नहीं. वह कहेंगे ही कि यह क्या है. सिंगर कहेगा कि हमारा गाना खराब कर दिया. कॉन्ट्रोवर्सी चलेगी. मुझे लगता है कि रीमिक्स कल्चर पर जितनी भी डिबेट होती है, वह अच्छी है या बुरी है, मैं नहीं जानती, लेकिन गाने के बोल सही होने चाहिए, यह महत्वपूर्ण है.
कौसर मुनीर ने बताया कि सिंगिंग की दुनिया में जितने भी गायक, कलाकार या संगीतकार होते हैं, वह भी पार्टी करते हैं. एक-दूसरे से बातचीत करते हैं, लेकिन पार्टी करने की शर्त एक यही होती है कि गाने से जुड़ा कोई किस्सा या उसपर बात कोई भी नहीं करेगा. सभी हंसी-मजाक के साथ पार्टी को एन्जॉय करेंगे.