
अब्दुल हमीद मुहम्मद फाजिल, जिन्हें अधिकतर लोग फाजिल के नाम से ही जानते हैं, साउथ इंडियन सिनेमा में एक आइकॉन का दर्जा रखते हैं. स्वर्गीय फाजिल नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर थे. लेकिन ये किस्सा तब का है जब वो डायरेक्टर नहीं बने थे, राइटर ही थे. केरल के शुरूआती फिल्म स्टूडियोज में से एक नवोदय स्टूडियो के साथ फाजिल काम करते थे.
1980 में स्टूडियो की एक बड़ी बजट फिल्म हिट होने के बाद, अगले प्रोजेक्ट Manjil Virinja Pookkal (मंजिल विरिंजा पूक्कल) के लिए डिस्कशन चल रहा था. फाजिल ने सलाह दी कि इसे कम बजट में नए एक्टर्स के साथ बनाते हैं. उनकी बात मानते हुए स्टूडियो ने उन्हें ही डायरेक्शन का काम सौंपा और इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी.
फिल्म के लिए ऑडिशन होने लगे. ऑडिशन लेने वाली टीम में फाजिल के साथ तीन और बड़े डायरेक्टर थे जो उस समय स्टूडियो के साथ जुड़े थे. इसी ऑडिशन में एक यंग एक्टर ने भी हाथ आजमाया, जिसकी एप्लीकेशन उसके दोस्तों ने भेज दी थी. फाजिल और एक डायरेक्टर को तो इस एक्टर का काम खूब पसंद आया, लेकिन 4 में से दो डायरेक्टर्स ने इस एक्टर को 100 में से 5-7 नंबर ही दिए. कहा जाता है कि इन दो डायरेक्टर्स को इस एक्टर का अपीयरेंस नहीं पसंद आया था.
आखिरकार इस एक्टर को फिल्म में नरेन्द्रन के निगेटिव रोल के लिए सेलेक्ट कर लिया गया. ये एक्टर मोहनलाल थे, जो आज 400 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं और इंडियन सिनेमा में एक आइकॉन हैं. जिन दोस्तों ने मोहनलाल को एप्लीकेशन भेजी थी, उनके साथ वो 1978 में एक फिल्म बना चुके थे जो ऑलमोस्ट 25 साल रिलीज ही नहीं हो सकी. फाजिल की Manjil Virinja Pookkal ही मोहनलाल की ऑफिशियल डेब्यू फिल्म बनी.
यही मोहनलाल आगे चलकर सुपरस्टार बने और इन्हें मॉडर्न मलयालम इंडस्ट्री का एक मजबूत पिलर कहा जाता है. पांच नेशनल अवॉर्ड जीत चुके मोहनलाल को भारत सरकार ने पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया है. साउथ की सभी इंडस्ट्रीज में उन्होंने बड़ी हिट्स दी हैं, मलयालम तो उनकी होम इंडस्ट्री है ही, साथ ही तमिल, तेलुगू और कन्नड़ में भी मोहनलाल ने खूब काम किया है.
लेकिन कम ही लोगों को ये बात याद रहती है कि वो हिंदी फिल्मों में भी हाथ आजमा चुके हैं. इतना ही नहीं मोहनलाल को उनकी बॉलीवुड फिल्म में एक्टिंग परफॉरमेंस के लिए अवॉर्ड भी मिले थे. आइए बताते हैं उनकी हिंदी फिल्मों के बारे में...
कंपनी (2002)
हिंदी दर्शक जब भी अजय देवगन की सबसे अच्छी परफॉरमेंस, या फिर विवेक ओबेरॉय की दमदार एक्टिंग को याद करते हैं तो 'कंपनी' का जिक्र जरूर आता है. रामगोपाल वर्मा की बेहतरीन गैंगस्टर फिल्मों में से एक 'कंपनी' में मोहनलाल का रोल लोगों को एकदम से याद नहीं आता.
आपको याद दिला दें कि जहां अजय और विवेक ने फिल्म में गैंगस्टर्स का रोल निभाया था, वहीं अंडरवर्ल्ड को निपटाने वाले आईजी वीरापल्ली श्रीनिवासन का रोल मोहनलाल ने किया था. 'कंपनी' में एक्टिंग परफॉरमेंस के लिए मोहनलाल को बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल कैटेगरी में IIFA अवॉर्ड भी मिला था.
आग (2007)
राम गोपाल वर्मा की 'शोले' रीमेक, 'आग' को आज किसी अच्छी वजह से शायद ही लोग याद करते हों. मगर इस फिल्म की कास्टिंग में कुछ बहुत बड़े नाम थे. अमिताभ बच्चन और अजय देवगन के साथ फिल्म में मोहनलाल भी थे. फिल्म में उनका किरदार नरसिम्हा, ऑरिजिनल 'शोले' के ठाकुर पर बेस्ड था.
हल्ला बोल (2008)
अजय देवगन और विद्या बालन की इस फिल्म में मोहनलाल कैमियो करते नजर आए थे. फिल्म में अजय ने एक एक्टर का किरदार निभाया था और एक अवॉर्ड शो के दौरान स्क्रीन पर मोहनलाल नजर आते हैं.
तेज (2012)
अजय देवगन, अनिल कपूर, कंगना रनौत और जाएद खान जैसे कलाकारों की फिल्म 'तेज' बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फ्लॉप रही थी. इस फिल्म में मोहनलाल ने पुलिस ऑफिसर शिवन मेनन का रोल किया था. ये एक कैमियो नहीं था बल्कि अच्छा खासा लंबा स्पेशल रोल था.
वैसे, एक मजेदार फैक्ट ये भी है कि मोहनलाल ने जिन चार हिंदी फिल्मों में काम किया है, उन सभी में अजय देवगन भी थे. मलयालम इंडस्ट्री में मोहनलाल की बड़ी हिट 'दृश्यम' का जब हिंदी रीमेक बना तो उसमें हीरो अजय ही बने.