पिछले दिनों सोशल मीडिया पर भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह अपने फीस को लेकर सुर्खियों में थीं. अक्षरा के अनुसार अब वे भोजपुरी इंडस्ट्री की हाइयेस्ट पेड एक्ट्रेस बन चुकी हैं. हालांकि भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी इससे इत्तेफाक नहीं रखती हैं.
आजतक डॉट इन से बातचीत के दौरान रानी ने बताया कि अक्षरा का यह दावा झूठा है. रानी ने हमसे भोजपुरी इंडस्ट्री में एक्ट्रेसेस को मिलने वाली फीस और उसके स्ट्रक्चर पर खुलकर बातचीत की है. रानी बताती हैं, मैं नहीं जानती कि ये न्यूज कहां से आई है और कौन क्लेम कर रहा है. लेकिन जहां तक मुझे पता है, जिस बजट तक मैं पहुंची हूं, उस बजट का रिकॉर्ड किसी ने नहीं तोड़ा है. मुझे लगता है, कि यह रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल भी होगा क्योंकि मैं उस वक्त के बजट की बात कर रही हूं, जब थिएटर का जमाना था. अभी वापस से मैंने कुछ फिल्में साइन की हैं, जहां खुद के ही फीस रिकॉर्ड मैं तोड़ रही हूं.
एक्टर लेते हैं 50 लाख, एक्ट्रेस को नहीं मिलता 15 लाख से ज्यादा
मैं कुछ न्यूज पढ़ रही थी, जहां एक्ट्रेसेज के बारे में कहा जा रहा है कि फलां ने तीस लाख में फिल्म साइन की है. मैं सच बताऊं, तो यह न्यूज पूरी तरह से फेक है. हमारी इंडस्ट्री में, हीरो के बजट ही 40 से 50 लाख तक पहुंच पाते हैं. एक्ट्रेसेज को 25से 30 तो कोई देता ही नहीं है. मैं सोलो हीरोइन हूं और मेरे दम पर फिल्में चलती हैं, मैं खुद तीस के बजट पर पहुंच ही नहीं पाई हूं. मेरे हायेस्ट पेड की बात करूं, तो मेरी फिल्म थी राउडी रानी जो 2014 में रिलीज हुई थी. उसके लिए मैंने 15 लाख लिए थे. वो मेरा उस वक्त का सबसे मंहगा फीस था. अभी तो सवाल ही नहीं उठता कि कोई हीरोइन 15 लाख तक भी पहुंच जाए. मैंने तीन फिल्में साइन की हैं, वो भी हेवी बजट का है. यहां मैंने खुद की फीस के रिकॉर्ड को ब्रेक किया है.
रानी ने बताया अक्षरा के दावे का सच
मैं यह नहीं कह रही कि अक्षरा को पैसे दोगुना नहीं मिला होगा. उसकी बजट का दोगुना हो सकता है, लेकिन वो मेरी बजट से तो जरूर कम ही है. मुझे नहीं लगता है कि कोई प्रोड्यूसर किसी एक्ट्रेस को इतने पैसे देगा. यह बात किसी को हजम नहीं होने वाली है.
हीरो हीरोइन की फीस में होता है भेदभाव
भोजपुरी इंडस्ट्री में फीस के डिस्क्रीमिनेशन पर रानी कहती हैं, मैं बहुत निराश रहती हूं. जब भी कोई फिल्म हिट हो जाती है, तो एक्टर का बजट तुरंत बढ़ जाता है, लेकिन एक्ट्रेस के बजट में कोई बदलाव नहीं आता है. यहां हमारे हीरो को 50 लाख मिलते हैं, वहीं पर उन्हीं के लेवल की फिल्में दी हैं और हिट भी रही है फिर भी मैं 15 लाख के ऊपर नहीं जा पा रही हूं. ये जो पैसों का भेदभाव है, वो यहां बहुत ज्यादा है. देखें कोई भी हीरोइन अपना बजट शो नहीं करती है, लेकिन मुझे सच्चाई बताने में कोई एतराज नहीं है. अब मेरी पहली फिल्म थी, ससुरा बड़ा पैसे वाला, फिल्म डायमंड जुबली साबित हुई थी. इससे ही मैंने और मनोज तिवारी ने अपना डेब्यू किया था. मेरा रोल बहुत स्ट्रॉन्ग था, बावजूद फिल्म के हिट के बाद मनोज तिवारी को 50 लाख दे दिया गया और मुझे पांच लाख तक नहीं मिले. उसके बाद मुझे खुद की फीस बढ़ाने के लिए 50 फिल्में करनी पड़ी और कई हिट्स देने पड़े हैं, तब जाकर 15 लाख तक पहुंची हूं.
फिल्म हिट कराने का क्रेडिट भी हीरो को मिलता है
हमारे एक्टर के लिए यह आसान है कि एक हिट दे दो और पचास लाख के हीरो बन जाओ. सक्सेस का सारा क्रेडिट तो हमारे हीरो ही ले जाते हैं. अब बॉलीवुड में ही देख लें, भूल भूलैया 2 में कार्तिक के साथ-साथ तब्बू जी का रोल कितना स्ट्रॉन्ग था, लेकिन भूषण जी ने गाड़ी तो केवल कार्तिक को दी. यह भेदभाव तो हर जगह है.
हीरो बनने के बाद भूल गए खेसारी, पवन, निरऊआ, गर्लफ्रेंड को दी तरजीह
रानी आगे कहती हैं, यहां बदलाव एक्ट्रेस ही ला सकती हैं. अगर अक्षरा ने फीस बढ़ाई है, तो यह अच्छा कदम है. जब आप अपने बजट से समझौता नहीं करते हैं, तो चार काम छोड़ने पड़ते हैं. यहां पर हमारे जो हीरो हैं, वो ऑप्शन देखने लगते हैं. खेसारी, पवन, निरऊआ जब नए थे, तो मैंने उनके साथ काम किया है. हिट होने के बाद उन्होंने मुझे मौका नहीं दिया है. जहां एक्ट्रेस ने फीस बढ़ाने की मांग शुरू की, तो ये ऑप्शन ढूंढने लग जाते हैं. ये एक्ट्रेसेज को रिप्लेस कर गर्लफ्रेंड ले आते हैं. यहां कंपीटिशन एक एक्ट्रेस का एक्ट्रेस के साथ है ही नहीं, यहां कंपीटिशन तो मेरा एक्टर्स की गर्लफ्रेंड से रहा है. ये एक्टर जैसे ही स्टार बन जाते हैं, उन्हें गर्लफ्रेंड नजर आने लगती है और रानी कहीं दिखती नहीं. मेरी सबके साथ ब्लॉकबस्टर रही हैं, लेकिन फीस डिमांड की वजह से जोड़ी कभी रिपीट नहीं की गई है.