'साहित्य आजतक कोलकाता 2024' के दूसरे दिन सिंगर, गीतकार, एक्टर और कवि स्वानंद किरकिरे ने कई चीजों पर बात की. उन्होंने बताया कि वो फिल्म इंडस्ट्री में डायरेक्टर बनने आए थे, लेकिन बन गए सिंगर. आज के समय में उनकी गीत, लोगों तक पहुंचे और पॉपुलर हुए, उसके लिए वो शुक्रगुजार हैं. साहित्य आजतक के मंच पर स्वानंद किरकिरे ने कई गाने गुनगुनाए और समा बांधा.
स्वानंद किरकिरे ने कहा कि मैं किसी की एक्टिंग की नकल उतारने में इंट्रस्टेड नहीं हूं. किरदार की आत्मा पकड़ने में मुझे ज्यादा चैलेंजिंग लगता है. मुझे आजकल ओम पुरी साहब के किरदार में ढलने में मजा आ रहा है. मैं शत्रुघ्न साहब भी अभी आकर गए, मुझे वो बहुत पसंद रहे हैं. 12वीं फेल के गाने मैंने लिखे थे. विक्रांत कहीं भी एक्टर नहीं दिखता, वो मनोज कुमार शर्मा ही दिखते हैं. क्योंकि कई महीनों तक विक्रांत ने इस किरदार में ढलने में लगाए हैं. लोग विक्रांत से नहीं, उनके किरदार से प्रेम कर रहे हैं. विक्की कौशल मुझे पसंद हैं. सैम बहादुर बनकर उन्होंने क्या एक्टिंग की है. रणबीर कपूर-रणबीर सिंह दोनों कमाल के एक्टर्स हैं. काफी समय बाद ऐसे टैलेंट सामने आए हैं. जयदीप शानदार एक्टर हैं. उन्हें कुछ भी दे दो, वो कर लेते हैं. इतनी सादगी से कर जाते हैं.
एक्टिंग में आजमा रहे हाथ
कोई भी काम ऐसा करने में मिल जाए जो थोड़ा करने में मजा आए. विलेन भी हो सकता है. एक शो किया है ओटीटी के लिए, उसमें मैंने रास्ते पर गाना गाने वाले का रोल किया है.
मैं सिंगर बनने नहीं आया था फिल्म इंडस्ट्री में. मैं डायरेक्टर बनने आया था जो आजतक नहीं बन पाया मैं. मैं दो फिल्में करना चाहता था. NCC की दुनिया पर एक फिल्म बनाना चाहता था. उस जगह की एक लव स्टोरी मैंने लिखी थी, कोशिश करूंगा कि इसे जल्द बनाऊं. इंदौर की एक लव स्टोरी है तो वो मैं बनाना चाहूंगा. पर पता नहीं कब मैं डायरेक्टर बन पाऊंगा.
सिगरेट के डिब्बे पर लिखे गाने
सिगरेट के पैकेट के पिछवाड़े पर भी गाने लिखे हुए हैं और वो पूरी दुनिया का गाना बन गया. मैंने कई जगह गाने लिखे और पता ही नहीं चला कि वो किस तरह पॉपुलर हो गए. हम इंडियन्स के लिए भावनाएं महत्वपूर्ण होती है. तो हर चीज के लिए गाने चाहिए होते हैं. हर किसी की एक प्लेलिस्ट है. हिंदी सिनेमा के हम जैसे लोग, लोगों को देते हैं. कई गाने हैं जो लोगों को पसंद नहीं आए. कुछ पसंद आए वो लोगों के अबतक साथ हैं.
अच्छा लगता है जब गाने वायरल होते हैं. लोग गाने पर रील बनाते हैं, अच्छी फीलिंग आती है. मैं कार में बैठकर लखनऊ से कानपुर जा रहा था. मैंने एक प्रोग्राम किया था फौजी भाइयों के लिए. मेरे ड्राइवर ने वही कार्यक्रम लगाया हुआ था. ड्राइवर को नहीं पता था कि मैं वही आदमी हूं. उसने आवाज बढ़ाई और सुनने लगा वो गाड़ी चलाते हुए. तो मुजे बहुत अच्छा लगा. कि लोग मेरे काम को पसंद कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर आजकल हम और हमारे गाने रील्स के माध्यम से पहुंच रहे हैं.
टॉयलेट में बैठकर लिखे गाने
मैं जब फिल्म इंडस्ट्री में आया तो गाना लिखने के लिए मुझे एक रिजॉर्ट भेज दिया गया. 7 दिन मैं वहां सोता रहा. वापसी जब लौट रहा था तो ट्रेन में मैंने गाना लिखा. मैं कई बार गाने लिकने के लिए टॉयलेट में जाता था. एक बार जयपुर गया तो वहां भी मैंने टॉयलेट में गाना लिखा. अब मोबाइल पर लिखता हूं. वॉइस रिकॉर्ड करके रख लेता हूं. ये बहुत अच्छा टूल है. रास्ते में भी आ रहा था तो एक ख्याल आया लिख लिया मोबाइल में. सोशल मीडिया और मोबाइल मुझे ये दोनों चीजें अच्छी लगती हैं. लाइफ में शायद बेस्ट हुई हैं.
संगीत लगातार बदल रहा है. इसके अंदर की चीजें बदल रही हैं. हम लोगों को हर तरह की चीजें माननी पड़ेंगी. मुझे रैप म्यूजिक पसंद है. लड़कों की अंदर की भावना रैप गानों से निकलकर बाहर आ रही है. आजकल झोपड़ी के टैलेंट को जगह मिल रही है. और ये चीज अच्छी है. हर किसी को मौका मिलना चाहिए. आज मैं यहां बैठा हुआ हूं तो मैं भी चल रहा हूं. तो मैं भी चल रहा हूं, वो भी चल रहे हैं. रैप म्यूजिक वाले. तो क्या दिक्कत है.
'बंदे में था दम' और 'बावरा मन' के लिए स्वानंद किरकिरे को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. ओटीटी जो आय़ा न वो वेस्टर्न आइडिया लेकर आया. हिंदी सिनेमा की खासियत ये है कि हम बिना गानों के पिक्चर नहीं देखते. मार्केट में पहले गाना आएगा, वो पॉपुलर होगा तो वो फिल्म देखने जाएंगे. ओटीटी के गाने छिप जाते हैं, दब जाते हैं. वो ओटीटी पर आया, इसलिए ज्यादा नहीं दिखा.