केजीएफ फिल्म फ्रैंचाइजी ने रॉकिंग स्टार यश को कन्नड़ सिनेमा के साथ-साथ देश और दुनियाभर में अलग पहचान दी है. कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा नाम रहे यश ने केजीएफ में रॉकी भाई का किरदार निभाकर पूरे भारत में नाम कमाया. इसके अलावा दुनियाभर में भी उनके काम को खूब सराहा गया. लेकिन 2018 में जब यश अपनी फिल्म को प्रमोट करने पहली बार मुंबई आए थे तब माहौल कुछ अलग था.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2022 में यश ने इस बारे में बात की. इवेंट के दौरान यश से बोला गया कि वह वैल्यू लेकर आ रहे हैं. केजीएफ चैप्टर 1 के हिन्दी डब वर्जन ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 40 करोड़ रुपये की कमाई की थी. जबकि केजीएफ चैप्टर 2 के हिन्दी वर्जन ने 400 करोड़ से ज्यादा कमाए हैं. तो वह 10 गुणा मुनाफा दे रहे हैं. इसपर यश ने कहा कि उनके लिए वो 40 करोड़, इस 400 करोड़ से ज्यादा मायने रखते हैं. साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि उस समय उन्हें कहा गया था कि वो अपने पैसे मुंबई में फिल्म को प्रमोट करने में बर्बाद कर रहे हैं.
'मेरे लिए पहले के 40 करोड़ हैं जरूरी'
यश कहते हैं, 'मुझे लगता है कि मेरे लिए वो 48 करोड़ रुपये की कमाई इस 400 करोड़ रुपये से ज्यादा है, क्योंकि तब समय अलग था. जब मैं उस समय में मुंबई आया था तब हमें जिस तरह का रिस्पॉन्स मिला करता था, वो आज के समय के एकदम अलग था. उस समय कई लोगों ने मुझे कहा था कि तुम यहां क्या कर रहे हो? तुम्हें ये 10 करोड़ रुपये वापस भी नहीं मिलेंगे, जो भी तुम फिल्म की पब्लिसिटी और प्रमोशन में लगा रहे हो. तो वो मेरे लिए बड़ी अचीवमेंट थी, ये नहीं. ये तो फॉलोअप है. मैं 400 करोड़ के रिकॉर्ड को सेलिब्रेट नहीं कर रहा हूं. आने वाले समय में कोई भी आसानी से इसको तोड़ देगा. लेकिन वो शुरुआती चीज जरूरी है.'
कन्नड़ इंडस्ट्री के बारे में लोगों को नहीं थी खबर
यश से पूछा गया कि जब वो 2017-2018 में अपनी फिल्म केजीएफ को प्रमोट करने के लिए आए थे, तब हिन्दी फिल्म डिस्ट्रिब्यटर्स उनसे क्या कहा करते थे? इसपर उन्होंने कहा, 'बहुत लोगों को पता ही नहीं था कि केजीएफ नाम से कोई फिल्म भी है. तो हमें उन्हें बताना पड़ा था कि ये केजीएफ नाम से एक फिल्म है जो हम बना रहे हैं. जबकि ये कर्नाटक में बनी सबसे बड़ी फिल्म थी. सभी इसे लेकर उत्साहित थे. केजीएफ से पहले मैं वहां बड़ा स्टार था, मेरी फिल्म 'मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी' बहुत बड़ी हिट हुई थी और उसने बड़ी कमाई की थी. तब भी यहां बहुत लोगों को कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के बारे में पता ही नहीं था.'
उन्होंने आगे बताया, 'लोग बोलते थे- 'अच्छा, कन्नड़ इंडस्ट्री... 5 करोड़ में फिल्म बनाते हैं, 10 करोड़ में कलेक्शन होता है'. मैंने कहा, नहीं यार 50 करोड़ में. पॉइंट ये है कि हम जुड़े हुए नहीं थे. किसी को नहीं पता था कि कहां क्या हो रहा है. सारी बातें नंबर की हैं. नंबर ही आपको वैलिडेशन देते हैं. आज कन्नड़ इंडस्ट्री पर सबकी नजर हमारे बनाए नंबर की वजह से ही है. मैं किसी को इसके लिए गलत नहीं मानता, ये एक मौका था जो हमें मिला.'