80 के दशक से बदलती हवा, देश के हालात, जो कला, संगीत में भी दिख रहे थे, एसे में अचानक अपने सुरो के साथ, जिंदगी के गूढ़ मतलब को समझाता एक अल्हड़ पंजाबी नौजवान आया, अपनी मिट्टी की खुशबू गीतो में लेकर, जो हर किसी के दिल मे बस गई.... किसने सोचा था, कि तब से लेकर अब पांचवें दशक तक वो उस गूढ़ समझाइश, जिंदगी के फलसफे, मिट्टी की खुशबू, भाषा का सम्मान, देश का प्यार सबको वो वैसे ही सहेज कर अपने सुरो में रखेगा! देखिए खास बातचीत गुरदास मान से.