भारतीय सिनेमा आज विश्वभर में किसी पहचान का मोहताज नहीं है. फिल्म इंडस्ट्री में कई सारी ऐसी फिल्में बनी हैं जो अलग अलग तरीके से समाज की कड़वी सच्चाई को बयां करती है. कोई काफी प्रबलता के साथ जटिल मुद्दों का सामना करता है तो कोई हल्के फुल्के अंदाज में अपनी बात रखता है.
डार्क कॉमेडी की केटेगिरी में ऐसी ही फिल्में शामिल की जाती हैं. बॉलीवुड समेत भारतीय सिनेमा में ऐसी कुछ शानदार फिल्में बनी हैं, जिनके मुद्दे डार्क हैं मगर उन मुद्दों को पेश करने का तरीका मजाकिया होता है. हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में.
जाने भी दो यारों- ये फिल्म साल 1983 में रिलीज हुई थी. फिल्म को काफी पसंद किया गया था. इस फिल्म के माध्यम से बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर वार किया गया था. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर, सतीश कौशिक और रवी बासवानी अहम रोल में थे.
पुष्पक- ये फिल्म साल 1987 में रिलीज हुई थी. कमल हासन और अमाला के अभिनय से सजी ये फिल्म बेहद खूबसूरत तरीके से फिल्माई गई थी. फिल्म के जरिए एक बेरोजगार शख्स की नजर से समाज दिखाया गया था. किस तरह वो अपनी गरीबी को नजरअंदाज करता है मगर एक दिन सच्चाई उसके सामने इस तरह आ कर खड़ी हो जाती है कि उसे मजबूरन इसका सामना करना पड़ता है. और वो तमाम चीजों की कीमत समझता है.
ओए लकी लकी ओए- इस फिल्म में अभय दोओल ने जो रोल निभाया किया था वो शायद उनके करियर के सबसे शानदार रोल्स में से एक है. फिल्म में किस तरह वे मजबूरन चोर बन जाते हैं और पकड़े जाने के बाद पूरे देश को ये संकेत देते हैं कि एक चोर के अंदर भी नेक दिल हो सकता है और सराफत की चादर ओढ़े उन लोगों की सच्चाई कोई नहीं जान पाता जो ना जाने किस हद तक करप्शन में डूबे हुए हैं.
डेली बेली- इस फिल्म का निर्देशन अक्षत वर्मा ने किया था. फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला तो वहीं इसके गानों पर काफी बवाल भी हुआ. फिल्म की कहानी एक जर्नेलिस्ट ताशी, फोटोग्राफर नितिन और कार्टूनिस्ट अरुप की थी, जो मुश्किल परिस्थितियों में रहने के बाद भी खुद को निकाल ले जाते हैं.
कालाकांडी- फिल्म कालाकांडी में सैफ अली खान ने एक ऐसे व्यक्ति का रोल निभाया था, जो पेट के कैंसर की आखरी स्टेज से गुजर रहे हैं. अंदर से टूट जाने के बाद भी वो जीवन के प्रति अलग दृष्टिकोण रखने लगता है और तरह-तरह के नशे करने लग जाता है. फिल्म को बहुत खूबसूरती से बनाया गया है.