जहां चाह वहां राह इस कहावत को पूरी तरह से सच साबित करने वाले गुजरात के वड़ोदरा के एक छोटे से गांव के कमलेश पटेल ने अपनी खामियों को कैसे बनाया अपना सबसे बड़ा औजार और डांस की दुनिया में बिना पैरों के ही लिख दिया इतिहास. देश से लेकर विदेश तक जीते तमाम सारे रियलिटी शोज और बन गए डांस गुरु. आजतक से खास बातचीत में कमलेश ने शेयर की अपने स्ट्रगल की प्रेरणादायक कहानी.
जब एक डॉक्टर की गलती से बर्बाद हुई कमलेश की ज़िन्दगी
कमलेश ने कहा, 'मैं तकरीबन 5 साल का था तभी मुझे अचानक बहुत तेज बुखार आया. मेरे मम्मी पापा उस छोटे से गांव में चिकित्सा के अभाव के चलते जो मिला उसी डॉक्टर के पास चले गए. वो बेचारे घबराए हुए थे कि मुझे कुछ होना जाए. मेरी हालत बहुत खराब थी मैं होश में भी नहीं था तभी डॉक्टर ने कहा कि मुझे इंजेक्शन देना पड़ेगा क्योंकी मैं छोटा था इस लिए दवा खा नहीं सकता था. मुझे मेरे परिवार को किसी को नहीं पता था की ये इंजेक्शन बुखार खत्म करने वाला नहीं है बल्कि मुझे जिंदगी भर के लिए अपाहिज बना देने वाला इंजेक्शन है. डॉक्टर ने मेरी गलत नस में इंजेक्शन लगा दिया था. उसके बाद से मैं अपना पैर नहीं हिला पा रहा था.'
'मेरे पेरेंट्स जो मुझे बहुत प्यार करते थे, वो चाहते थे कि मुझे किसी बड़े अस्पताल में दिखाया जाए. लेकिन उस समय हमारी माली हालत ऐसी नहीं थी की हम महंगा उपचार करा पाए. मुझे मेरे कमर के नीचे से लकवा मार गया था मेरे माता पिता बहुत दुखी होते थे कि ये सब उनकी वजह से हुआ. मुझे पता था कि ये उनकी गलती नहीं है. वो तो हमेशा मेरा भला ही चाहते हैं. लेकिन जब मैं समझदार हुआ तो मैंने खुद अपने मम्मी पापा को मोटीवेट करना शुरू किया कि चलो जो बीत गया जाने दो. अब जो आने वाला वक़्त है उसे बेहतर बनाया जाए.'
'जहां चाह वहां राह' मैंने यही सबक सीखा
कमलेश ने कहा, "मुझे डांस का शुरू से शौक था. और मैं ये मानता था कि जब से हम पैदा होते हैं इस धरती पर आते हैं उसी दिन से हमारे साथ चुनौतियां शुरू हो जाती है. और मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी मेरी विकलांगता, मुझे इस बात का जूनून था कि मेरी आवाज सब तक पहुंचनी चाहिए. मैं टीवी और स्टेज शो पर डांस सीखता था मोहल्ले के गणेश पंडाल में परफॉर्म करता था और लोग बहुत पसंद करते थे. तभी मुझे किसी ने कहा कि तुम डांस सीख सकते हो तो मैंने अपने पैरों की जगह हाथ का इस्तेमाल करना शुरू किया.
डांस के लिए तीन पहियों की साईकिल से 15 किलोमीटर रोज करते थे सफर
कमलेश ने आगे कहा, "जी हां मेरे पास सरकार से मिली तीन पहियों की साईकिल थी और मेरे घर से मेरी क्लास 15 किलोमीटर दूर थी और बिल्डिंग में पांचवी मंजिल में मेरी क्लास चलती थी और मुझे रोज ऐसे ही जाना आना पड़ता था. मैं डांस सीख रहा था ये बात मैंने घरवालों को नहीं बताई. मैं कंप्यूटर सीखने के बहाने पढ़ाई के साथ-साथ डांस भी सीख रहा था.''
जब चमकी कमलेश की किस्मत
कमलेश ने बताया, 'एक बार एक डांस कॉम्पटीशन था तो किसी ने कहा कि इसमें मुझे भी परफॉर्म करना है. मेरे पास कोई कॉस्टूयम नहीं थी तो मैंने अपनी एक टी शर्ट को कैंची से काट कर उसे थोड़ा डिजाइनर बनाया और परफॉर्म किया. सामने से आवाज आई वन्स मोर वन्स मोर. फिर लोग मुझे बुलाने लगे शो के लिए और मैं 200- 500 में जो भी मिलता था काम करने लगा.'
जब सरोज खान ने दिया कमलेश को 100 रुपये का नोट
कमलेश ने कहा, 'मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकता जब सरोज खान हमारे शहर में एक डांस कॉम्पटीशन जज करने आई थी. तो मैंने भी कहा कि मुझे भी इसमें भाग लेना है. लेकिन शो के ऑर्गनाइजर्स ने मुझे मेरी डिसबिलिटी के चलते मना कर दिया कि ये प्रतियोगिता मेरे लिए नहीं है. बात सरोज जी के कानों तक पहुंची तो वो आईं और बोली मुझे डांस देखना है चाहे कोई हांथों से करे या पैरों से मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, कमलेश को भाग लेने दिया जाए. आप इनको इग्नोर नहीं कर सकते मैं तो जज करुंगी चाहे वो सोता हुआ करे, खड़ा हो कर करे, मुझे उससे कोई मतलब नहीं है बस डांस चाहिए. बस वहीं से शुरू हुआ मेरे करियर का टर्निंग प्वॉइन्ट और मैंने परफॉर्म किया और जैसे ही मैंने अपने पैरों को अपने कंधे पर डालकर डांस करना शुरू किया तालियां बजने लगी. सरोज जी ने मेरा पूरा एक्ट खड़े होकर और रोते हुए देखा. तभी सरोज जी ने जो हमेशा अपने शागिर्दों को खुश होकर 100 रुपये का नोट देती हैं तो उन्होंने मुझे भी नोट दिया और मैंने वो कॉम्पटीशन जीता.
जब मिथुन दा ने कमलेश को बनाया जज
2009 डांस इंडिया डांस के पहले सीजन में जब मैं गया तो मुझे बहुत पहचान मिली. जो मुझे क्रिटिसाइज करते थे DID के बाद मुझे देखने का सबका नज़रिया बदल गया. मिथुन दा के सामने परफॉर्म करना था जब उन्होंने मेरा एक्ट देखा तो यही कहा भाई तुम इस कॉन्टेस्ट के लेवल के नहीं हो तुम्हारी जगह कहीं और है. ये मंच तुम्हारे लिए छोटा है ये सुन कर मुझे बहुत अच्छा लगा की इतने बड़े लीजेंड खुद मुझे इतनी बड़ी बात कह रहे हैं. मैंने कभी सोचा नहीं था कि जिस शो में मैं पार्टिसिपेंट था उसी शो में मिथुन दा ने मुझे अपने बगल में बैठा कर सम्मान दिया और मुझे एक जज बनने का मौका भी दिया. वहां मिली मुझे तकदीर की टोपी ने मेरी तकदीर बदल दी और फिर मुझे बड़े बड़े शो मिले और मैंने एक चैनल के साथ 2 साल का कॉन्ट्रैक्ट भी किया और देश और विदेश में मैं 1000 से ज्यादा शो कर चुका हूं. और ये सफर जारी रहेगा.
दिव्यांग लोगों के लिए कुछ करना चाहते है कमलेश
कमलेश ने कहा, 'जी हां मैं चाहता हूं की जिस तरह मैंने हार नहीं मानी और अपनी कमी को अपनी ताकत बनाई उसी तरह कई ऐसे लोग भी इस दुनियां में है तो प्रतिभा होने के बावजूद सही मंच न मिल पाने के कारण अपनी योग्यता साबित नहीं कर पाते और उनका टैलेंट वेस्ट हो जाता है. में ऐसे ही लोगो के लिए कुछ करना चाहता हूं क्योंकी मेरा ये मन है की जहां चाह होती है वहां राह खुद ब खुद बन ही जाती है.