भारतीय इतिहास में कला को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में राजा रवि वर्मा का योगदान अतुल्य है. यहां देखिए राजा रवि वर्मा की ऐसी पेटिंग्स, जिन्होंने इतिहास और खासतौर पर महिलाओं का बखूबी चित्रण किया.
उर्वशी और राजा पुरुरवा की पहली मुलाकात को राजा रवि वर्मा ने अपने जादुई हाथों से कुछ इस तरह पेंटिंग के रूप में उकेरा.
राजा रवि वर्मा की इस पेंटिंग में अर्जुन को सन्यासी के रूप में दिखाया गया है. सन्यासी रूप में
अर्जुन अपनी पत्नी सुभद्रा से मिलते हुए.
राजा रवि वर्मा की इस पेंटिंग में शकुंतला पैर से कांटा निकालने के बहाने राजा दुष्यंत को देखते हुए दिख रही हैं.
इस पेंटिंग में राजा रवि वर्मा ने केरल की एक महिला को दिखाया है. इस पेंटिंग में महिला
चमेली के फूलों से अपने बाल संवारते हुए.
राजा रवि वर्मा की इस पेंटिंग में रावण के सीता हरण के वक्त जटायू के संघर्ष को
दिखाया गया है. जटायू ने सीता को बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे. वर्मा ने इस
पेंटिंग में वो प्रकरण बखूबी दिखाया है.
इस पेंटिंग में राजा रवि वर्मा ने हरिशचंद्र को उनकी पत्नी तारामती के साथ दिखाया. इस पेंटिंग
में श्मशान घाट के उस किस्से को दिखाने की कोशिश की गई है, जिसमें राजा हरिशचंद्र के बेटे
की मौत हो गई थी.
इस पेंटिंग में राजा रवि वर्मा ने द्रौपदी को इंसाफ के लिए विराट की अदालत में गुहार लगाते हुए
बिल्कुल जीवंत चित्रण किया है.
राजकुमारी दमयंती की शाही हंस से बात करते हुए एक खूबसूरत पेंटिंग. इस
पेंटिंग में दमयंती राजा नला के बारे में हंस से बात करते हुए दिख रही हैं.
राजा रवि वर्मा ने ऋषि विश्वकर्मा को बच्चे का तिरस्कार करते हुए भी एक पेंटिंग में दिखाया.
राजा रवि वर्मा ने भारतीय कला के इतिहास में नए आयाम गढ़े. राजा रवि वर्मा का यह 108वां जयंती वर्ष है. वर्मा की पेंटिंग्स में इतिहास के किरदारों को कला के जरिए फिर से जीने की कोशिश की गई.