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सुशांत के बूढ़े बाप, 4 बहनों पर उछाला जा रहा कीचड़, 773 शब्दों में परिवार का दर्द

सुशांत के बूढ़े बाप, 4 बहनों पर उछाला जा रहा कीचड़, 773 शब्दों में परिवार का दर्द
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एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में जैसे-जैसे समय बीत रहा है, न्याय की आस लगाए बैठे परिवार के सब्र का बांध टूट रहा है. परिवार ना सिर्फ अपने बेटे के लिए न्याय मांग रहा है, बल्कि दोषियों के लिए कड़ी सजा भी चाहता है.
सुशांत के बूढ़े बाप, 4 बहनों पर उछाला जा रहा कीचड़, 773 शब्दों में परिवार का दर्द
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सुशांत के परिवार ने 9 पेज की एक भावुक कर देने वाली चिट्ठी रिलीज की है. चिट्ठी के जरिए परिवार ने सुशांत की जिंदगी के बारे में भी बताया है और ये भी बताया है कैसे उनकी मौत के बाद उन्हें धमकी मिल रही है.
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परिवार ने चिट्ठी की शुरूआत एक शेर से की है. लिखा है- तू इधर-उधर की ना बात कर ये बता कि काफिला क्यूं लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं तेरी रहबरी का सवाल है. इस एक शेर के जरिए परिवार ने बता दिया है कि उन्हें मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं है.
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सुशांत केस में कई लोग एक्टर की वकालत करने को आगे आ रहे हैं. कई ऐसे भी हैं जो शायद पहले कभी एक्टर के लिए कुछ नहीं कहते थे, लेकिन अब लगातार बयान दे रहे हैं. अब सुशांत के परिवार ने उन लोगों को बताया है कि एक्टर के परिवार होने का क्या मतलब होता है.
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परिवार ने चिट्ठी में लिखा है- सुशांत के माता-पिता कमाकर खाने वाले लोग थे. उनके हंसते-खेलते पांच बच्चे थे. उनकी परवरिश ठीक हो इसलि‍ए नब्बे के दशक में गांव से शहर आ गए. रोटी कमाने और बच्चों को पढ़ाने में जुट गए. एक आम भारतीय माता-पिता की तरह उन्होंने मुश्किलें खुद झेलीं. बच्चों को किसी बात की कमी नहीं होने दी. हौसले वाले थे सो कभी उनके सपनों पर पहरा नहीं लगाया
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सुशांत की मौत लेकर ये भी कहा जा रहा है कि वे मानसिक तनाव में थे. एक्टर का परिवार इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता है. उन्हें इस बात का दुख है कि हत्यारों को ढूंढने के बजाय रखवाले उसके मृत्यु शरीर की फ़ोटो प्रदशर्नी लगाने लगते हैं. उनकी लापरवाही से सुशांत मरा. मानसिक बीमारी चला सिर्फ उसके चरित्र को खराब करने की कोशिश हो रही है.
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कुछ लोगों की बयानबाजी से भी परिवार को काफी दुख हुआ है. चिट्ठी में जोर देते हुए कहा गया है- सुशांत से उनके संबधों पर सवाल उठाया जा रहा है. तमाशा करने वाले और तमाशा देखने वाले ये ना भूलें कि वे भी यहीं हैं. अगर यही आलम रहा तो क्या गारंटी है कि कल उनके साथ ऐसा ही नहीं होगा? हम देश को उधर लेकर क्यों जा रहे हैं जहां अपने को जागीरदार समझने वाले अपने गुर्गों से मेहनतकशों को मरवा देते हैं और सुरक्षा के नाम पर तनख़्वाह लेने वाले खुलेआम बेशर्मी से उनके साथ लग लेते हैं?
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अब सुशांत के जाने के बाद परिवार यहां कह रहा है कि उन्हें धमकी दी जा रही है. चिट्ठी में लिखा है- सुशांत के परिवार, जिसमें चार बहनें और एक बूढ़ा बाप है, सबको सबक़ सिखाने की धमकी दी जा रही है. एक-एक कर सबके चरित्र पर कीचड़ उछाला जा रहा है.
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