भारतीय लेखकों की किताबें न सिर्फ भारत में पसंद की जाती हैं, बल्कि
विदेशों में भी भारतीय लेखक काफी डिमांड में रहते हैं. आगे जानिए
ऐसे ही 10 भारतीय लेखकों और उनकी किताबों के बारे में, जिनकी है
पूरी दुनिया में मांग....
द शेडो लाइंस, अमिताव घोष: द शेडो लाइंस को बंगाली लेखक
अमिताव घोष ने लिखा. घोष को इस नॉवेल के लिए साहित्य अकादमी
अवॉर्ड मिला. किताब की पृष्ठभूमि में आजादी से लेकर 1963-64 के
सांप्रदायिक दंगों का जिक्र रहता है.
द वाइट टाइगर, अरविंद अडिग: अरविंद की इस किताब को साल
2008 में बुकर प्राइज से नवाजा गया. अरविंद इस अवॉर्ड को कम उम्र
में जीतने वाले दूसरे युवा थे. किताब में भारत में जाति संघर्ष को
बेहतर तरीके से समझाया गया. अरविंद की ये किताब कई हफ्तों तक
न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर किताबों में शामिल रही.
द गाइड, आरके नारायणन: ये किताब सबसे पहले 1958 में प्रकाशित
हुई थी. इस किताब पर साल 1965 में देवानंद अभिनीत फिल्म भी बन
चुकी है. किताब के लिए आरके नारायणन को साहित्य अकादमी अवॉर्ड
भी मिल चुका है.
द गॉड ऑफ स्मैल, अरुंधित रॉय: अरुंधित को अपने इस नॉवेल के लिए
बुकर प्राइज मिला. अरुंधति ने अब तक सिर्फ एक यही नॉवेल लिखा है.
इस नॉवेल के लिए अरुंधित को तारीफ के साथ काफी आलोचनाओं को
भी सामना करना पड़ा. ये नॉवेल अब तक सबसे ज्यादा बिकने वाले
नॉवेल्स में शामिल है.
द नेमसेक, झुम्पा लाहिरी: पुलत्जिर अवॉर्ड विनर झुम्पा लाहिरी का .ह
पहला नॉवेल था. किताब में जिस तरह झुम्पा ने भावनाएं उकेरी,
उसकी काफी तारीफ की गई. 2006 में मीरा नायर ने इसी किताब पर
एक फिल्म भी बनाई.
ट्रेन टू पाकिस्तान, खुशवंत सिंह: भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला
नॉवेल ट्रेन टू पाकिस्तान को माना जाता है. किताब की कहानी 1947
के दौर में हिंदू मुस्लिम दंगों पर आधारित थी.
मिडनाइट चिल्ड्रेन, सलमान रश्दी: ये किताब भारत-पाकिस्तान के
बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित थी. किताब में कई किरदार थे
लेकिन कहानी सलीम सिनई को केंद्र में रखकर सुनवाई गई. किताब को
1981 में बुकर प्राइज से नवाजा गया.
द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा, अमीश त्रिपाठी: शिवा ट्रायोलॉजी पर
आधारित अमीश का ये पहला नॉवेल था. अमीश की इस फिक्शनल
कहानी को काफी पसंद किया गया. पहली किताब से मिली सफलता
के बाद अमीश ने इस सीरीज की कई और किताबें भी लिखीं.
फाइव प्वॉइंट समवन, चेतन भगत: इस नॉवेल ने चेतन भगत को नई
ऊंचाइयों पर पहुंचाया. नॉवेल के एक हिस्से को राजू हिरानी की फिल्म
फाइव पॉइंट समवन में भी लिया गया.
ए फाइन बेलेंस, रोहिंग्टन मिस्त्री: भारतीय लेखक रोहिंग्टन मिस्त्री का ये
दूसरा नॉवेल था. 1975 से 1984 के बीच किताब की कहानी चार
किरदारों की इर्द-गिर्द घूमती है. किताब को वैश्विक स्तर पर कई बड़े
नाटककारों ने मंच पर दर्शाया.