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भूपेन हजारिका को भारत रत्न, इन गानों को सजाया अपने हुनर से

Bhupen Hazarika Bharat Ratna भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान के लिए भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने की घोषणा की है. उनके साथ भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भी ये सम्मान मिलेगा.

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भूपेन हजारिका
भूपेन हजारिका

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ख्यात संगीतकार भूपेन हजारिका को भारत सरकार ने सर्वोच्च नागर‍िक सम्मान भारत रत्न देने की घोषणा की है. उन्होंने कला के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. उन्होंने असम की संस्कृति को कला के जरिए से लोगों तक पहुंचाया. संगीतकार, गायक, एक्टर और फिल्म निर्देशन के रूप में वे सक्रिय रहे.

समाज के तमाम गंभीर मुद्दों को उन्होंने फिल्मों और संगीत के माध्यम से पेश किया. तमाम पुरस्कारों के बाद अब वे भारत रत्न से नवाजे जाएंगे. उनके साथ भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और समाज सेवक नाना जी देशमुख को भी भारत रत्न से नवाजने की घोषणा की है. इस खास मौके पर हम जिक्र कर रहे हैं भूपेन हजारिका के कुछ चुनिंदा गीतों के बारे में जो उन्हें एक महान गीतकार की फेहरिस्त में लाकर खड़ा कर देते हैं.

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ओ गंगा तुम बहती हो क्यों- भारतवर्ष की सबसे पवित्र नदी, गंगा की हो रही दुर्दशा पर भूपेन हजारिका का ये गीत रौंगटे खड़े कर देता है. गाने में खुद गंगा मां से पूछा जा रहा है कि मानवता के नष्ट और भ्रष्ट होने के बाद भी क्यों बह रही हो. वे गंगे के निरलज्ज भाव से बहने की बात कहते हैं भूपेन के एक एल्बम का ये गाना आज भी काफी पॉपुलर है.

दिल हूम हूम करे-  रुदाली फिल्म में गुलजार के लिखे हुए इस गीत को भूपेन ने अपनी आवाज में अमर कर दिया. गाने के दोनों हिंदी और असामी वर्जन को खूब पसंद किया गया. गाने का म्यूजिक भूपेन ने ही दिया था. इसके अवाला गाने के फीमेल वर्जन को लता मंगेशकर ने गाया था.

आमी एक जाजाबार- भूपेन की ये एक सबसे बड़ी खासियत थी कि वे असाम से होने के बावजूद वे देश के हर कोने में फैली संस्कृति को आत्मिक रूप से समझते थे और अपनी कला में उसे शामिल करते थे. उनकी बंगाली एल्बम का ये गाना भी काफी लोकप्रिय है.

डोला हो डोला- असामी और हिंदी, दोनों भाषों में भूपेन के इस गीत को पसंद किया गया. गाने में भूपेन की विविधता साफ झलकती है. गाने को फास्ट बीट्स पर काफी खूबसूरती से कंपोज किया गया है. सात ही भूपेन की आवाज में ये और मधुर लगता है.

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समय ओ धीरे चलो- रुदाली फिल्म का ये एक और गीत भले ही ज्यादा पॉपुलर ना हुआ हो पर अपने ठहराव और लिरिक्स की संवेदनशीलता के मेल से ये गाना अपने आप में खास है. भूपेन ने इसका म्यूजिक दिया था और गाया भी था. गाने के बोल गुलजार ने लिखे थे.

दुनिया पराई लोग यहां बेगाने- कल्पना लाजमी की फिल्म दर्मियां थर्ड जेंडर के मुद्दे पर बनी चुनिंदा फिल्मों में से एक है. फिल्म 1997 में रिलीज की गई थी. फिल्म का ये गाना दर्शाता है कि एक ट्रांसजेंडर को जीवन में किन-किन मुश्किल परिस्थितियों से होकर गुजरना पड़ता है और कैसे समाज सदियों से उन्हें नकारता रहा है.

शाम ढली वन में- मिल गई मंजिल मुझे फिल्म के इस गाने की मधुरता का कोई सानी नहीं. भूपेन हजारिका के म्यूजिक में इस गीत को उदित नारायण और कविका कृष्णमूर्ती ने गाया है. इसकी लिरिक्स भी शानदार हैं.

फूले दाना दाना- असाम की बिहू पर बना ये गाना वहां की संस्कृति, सभ्यता और रहन-सहन की एक खूबसूरत छवि पेश करता है. गाने का म्यूजिक भूपेन हजारिका ने दिया है साथ ही भूपेन संग इसे भूपेंद्र सिंह और नितिन मुकेश ने अपनी आवाज दी है.

एक कली दो पत्तियां- गुलजार की लिरिक्स में ये गाना वाकई में असाम की आवाम की तस्वीर दिखाता है. बिना वीडियो के भी गाने को लिरिक्स के साथ सुनते हुए वहां के कल्चर के बारे में इमेजिन करना अद्भुत लगता है. गानें का म्यूजिक भूपेन ने दिया और गाया भी उन्होंने ही था.

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ये किसकी सदा है- गुलजार के साथ भूपेन की शानदार बॉन्डिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दोनों के नॉन पिल्मीं गानें लोगों तक बड़ी मात्रा में भले ना पहुंच पाए हों मगर वे सारे अपने आप में काफी खूबसूरत हैं और कानों को आराम देनें के साथ समाज को अच्छा संदेश भी देते हैं.

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