बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर की नई फिल्म गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल के कई पोस्टर्स जारी हो चुके हैं. फिल्म में वह देश की पहली एयरफोर्स महिला ऑफिसर गुंजन सक्सेना की भूमिका में नजर आएंगी. फिल्म में पंकज त्रिपाठी, जाह्नवी कपूर के पिता के रोल में दिखेंगे. फिल्म अगले साल 20 मार्च को रिलीज होगी. लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं जिस गुंजन सक्सेना पर ये फिल्म बन रही है वो आखिर है कौन? उन्होंने देश के लिए क्या काम किया है? आइए जानते हैं गुंजन सक्सेना के जज्बे और शौर्य की कहानी के बारे में.
पांच साल की उम्र में गुजन ने पहली बार कॉकपिट देखा था और तभी ठान लिया था एक दिन वह देश के लिए फाइटर जेट उड़ाएंगी. गुंजन सक्सेना के पिता और भाई भी सेना में थे. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. उस दौरान उन्होंने महिला पायलटों की भर्ती के लिए अप्लाई किया और एसएसबी पास कर वायुसेना में शामिल हो गईं.
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उस वक्त महिलाओं को वॉर जोन में जाने की इजाजत नहीं थी और ना ही फाइटर प्लेन उड़ाने की अनुमति नहीं थी. लेकिन जब 1999 में करगिल युद्ध हुआ तो गुंजन सक्सेना ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो शायद उस समय किसी महिला के लिए कर पाना नामुमकिन सा था. दरअसल, जब युद्ध हो रहा था तो वायुसेना को पायलटों की तत्काल जरूरत थी और भारतीय वायुसेना ने महिला पायलटों को बुलाया.
उस समय सबसे आगे गुंजन सक्सेना थीं. उन्होंने लड़ाई के दौरान कई घायल सैनिकों की जान बचाई और सैन्य साजो सामान को सीमा पर ले जाने का काम किया. गुंजन सक्सेना को साहस और बहादुरी भरे काम के लिए भारत सरकार की ओर से शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के जरिए भारत को करगिल युद्ध में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. पायलटों ने 32,000 फीट की ऊंचाई से घुसपैठियों पर हमला किया था और उन पर आग बरसाई थी. इस ऑपरेशन के बीच गुंजन सक्सेना ने ऐतिहासिक काम करते हुए अपने विमान से करगिल के युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरी थी और दुश्मनों को धूल चटाया था.