हिट एंड रन केस मामले में सलमान खान के वकील श्रीकांत शिवदे ने कोर्ट में कई अहम सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा, 'इस केस में सलमान खान का फिंगर प्रिंट क्यों लिया गया था जब उसे सबूत के तौर पर दिखाना ही नहीं जाना था? जब पुलिस को पता था की गाड़ी में तीन ही लोग थे तो स्टेयरिंग, व्हील और सलमान खान के फिंगर प्रिंट ही क्यों लिए गए?, फिंगर प्रिंट को फॉरेंसिक जांच के लिए क्यूं भेजा गया? और फिर उसकी रिपोर्ट सबूतों के साथ क्यों नहीं लगायी गयी?' सलमान के वकील ने कहा की फॉरेंसिक रिपोर्ट पुलिस केस के पक्ष में नहीं थी इसीलिए रिपोर्ट को अदालत के सामने नहीं लाया गया.
इस मामले में पुलिस ने की कई खामियां
होटल 'जे डब्लू मैरीअट' में वैले पार्किंग टैग के गुम होने और सलमान खान की गाड़ी उस रात जिस वैले ड्राईवर ने पार्क की थी उसका
बयान नहीं लेने की बात भी सलमान के वकील ने अदालत में रखी उन्होंले कहा कि पुलिस की जांच में शुरू से ही कई खामियां थी.
पुलिस ने जब इस मामले में एफआईआर लेते हुए शिकायकर्ता रविन्द्र पाटिल का बयान दर्ज किया था तब कहीं भी रविन्द्र पाटिल ने यह
नहीं कहा था की सलमान ने शराब पी रखी थी. यही वजह थीं की शुरू में ड्रंकन ड्राइविंग की आईपीसी की धाराएं केस में नहीं लगाई गई
थीं. शराब का जिक्र रविन्द्र पाटिल के सप्लीमेंट्री बयान में आया था और उसके बाद ही धारा 304 (2) लगाई गई. शराब का जिक्र
पुलिस की अपनी दिमाग की उपज थी.
शराब पीने के दावे हैं सरासर झूठे
सलमान के वीकल का यह भी कहना है कि 'रेन' बार के जो बिल कोर्ट में बतौर सबूत जमा करवाए गए है वो फर्जी है. इस केस के
मुख्य जांच अधिकारी किशन शेंगल ने उसमे छेड छाड़ की है. मन्नू खान नाम के चश्मदीद और जख्मी गवाह ने कोर्ट को बताया है की
उसका मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत जो बयान दर्ज कराया गया था उस दौरान पुलिस ने उसका लिखित
स्टेटमेंट मजिस्ट्रेट को दिखाया और बाद में उसपर उसके दस्तखत लिए. सलमान के वकील ने अदालत को बताया की 164 के तहत
ऐसे बयान लेकर मजिस्ट्रेट और पुलिस ने कानून का मखौल बनाया है. क्योंकि गवाह ने कहा है कि उसे पता नहीं था की उस स्टेटमेंट
में क्या बातें लिखी हुई है आैर वो सही है या गलत यह भी नहीं पता था. गवाह ने ये भी कहा है की स्टेटमेंट किस भाषा में लिखी गयी थी उसे नहीं मालूम.
164 के बयान लेने की प्रक्रिया का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखा गया है जिसके लिए दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
सरकारी पक्ष ने ना ऐसा कोई सबूत पेश किया न ही किसी गवाह ने सीधे तौर पर कहा की सलमान ने वारदात की रात शराब पी रखी
थी.
जांच अधिकारी ने कोर्ट से छिपाईं बातें
इस केस के पहले जांच अधिकारी ने अपने बयान में कहा है कि उनके जांच छोड़ने तक सलमान गिरफ्तार नहीं हुए थे जबकि सलामन
गिरफ्तार 28 तारीख के सवेरे 11 बजे हुए और पहले जांच अधिकारी ने जांच 29 तारीख को छोड़ी. फिर जांच अधिकारी ने यह बात
कोर्ट से क्यों छिपाई. सलमान के वकील के मुताबिक वह सलमान खान के खून के स्टोरेज और दूसरे सवालों के जवाब नहीं देना चाहते
थे इसीलिए ऐसा कहा. इस केस के मुख्य जांच अधिकारी ने अपने सीनियर अफसरों को खुश करने के लिए गलत बयान और सबूत
तैयार किए ताकि सलमान खान के खिलाफ 304(2) की धारा लगाई जा सके.
डॉक्टर ने दिया झूठा बयान
'जे जे हॉस्पिटल' में सलमान के आने का वक्त 2.25 लिखा गया है और निकलने का वक्त 2.30 लिखा गया है. डॉक्टर के बयान के
मुताबिक इन 5 मिनट में सलमान का बीपी भी चेक कर लिया गया, रेस्पिरेटरी टेस्ट किया गया, खून निकाला गया और सलमान को
चला कर भी देख लिया गया. महज 5 मिनट में ये सारे टेस्ट संभव नहीं है. सलमान के ये टेस्ट हुए ही नहीं थे. डॉक्टर ने झूठ बोला
है.