scorecardresearch
 

एजेंडा आज तक 2014 : हां, मैं भी शादी कर रहा हूं: सुखविंदर सिंह

सिंगर सुखविंदर ने 'एजेंडा आज तक 2014' के मंच पर शुक्रवार को कहा कि वह छह महीने के अंदर शादी करने वाले हैं. उन्‍होंने कहा, 'अभी बहुत देर नहीं हुई है. अब डबल होने का टाइम हो गया है.'

Advertisement
X
sukhwinder singh in Agenda Aaj Tak Conclave
sukhwinder singh in Agenda Aaj Tak Conclave

सिंगर सुखविंदर ने 'एजेंडा आज तक 2014' के मंच पर शुक्रवार को कहा कि वह छह महीने के अंदर शादी करने वाले हैं. उन्‍होंने कहा, 'अभी बहुत देर नहीं हुई है. अब डबल होने का टाइम हो गया है.' सुख्‍ाविंदर को वैसे तो सब शानदार गायकी के लिए जानते हैं, लेकिन उन्‍होंने 'एजेंडा आज तक' के मंच पर बताया कि वह गाने भी लिख देते हैं.

Advertisement

'मुझे रंग दे', 'छैंया-छैंया' के पीछे की कहानी
सुखविंदर ने बताया, '15 साल पहले ए. आर. रहमान से मुलाकात हुई. उन्होंने पूछा, क्या आप लिखते हैं. मैंने कहा-हां. रहमान ने पूछा, क्या आप कवि हैं. मैंने कहा नहीं.' गोविंद निहलानी ने तब 'तक्षक' फिल्‍म की कहानी सुनाई थी. उन्हें मैंने अपना गाना 'मुझे रंग दे' दिया. आशा भोंसले जी ने इसे गाया. तब मैंने रहमान को बुल्ले शाह का गीत सुनाया. 'थैया-थैया' यह पंजाबी में कविता थी. वो बोला, अब समझाओ इसे. मैंने सोचा कि इतनी अंग्रेजी कहां से लाऊं. मैंने कहा, आप माइक लगाइए और एक्सप्रेशन से समझ जाएंगे कि गाने का मूड क्या है.' इस प्रकार से 'छैंया-छैंया' गाना बना, जो कि 'दिल से' में शाहरुख खान और मलाइका अरोड़ा पर फिल्‍माया गया. सुखविंदर सिंह को स्‍टार सिंगर का दर्जा इसी गीत ने दिलाया.

Advertisement

लता मंगेशकर और आशा भोसले पर भी बोले सुखविंदर
'मुझे आशा जी से प्यार है. लता जी की मैं इज्जत करता हूं. मंगेशकर फैमिली हिमालय और महासागर जैसी है, जो एक ही होता है. मैं जिस बैकग्राउंड से आया था. लोग कह देते थे कि कंजर हैं. हालांकि असल शब्द कांजोर है. जर्मन भाषा में डच लोग इसका इस्‍तेमाल करते थे एक ट्राइबल कम्‍युनिटी के लिए. मनोरंजन के लिए. पंजाब में आकर यह शब्‍द कंजर हो गया. उस जमाने में जब पुरुष भी गाना गाता था, तो उसे समाज हेय नजर से देखता था, लेकिन उस जमाने में भी आशा जी और लता जी ने गायन से सम्‍मान अर्जित किया. इससे हमारे जैसे लोगों को बहुत हौसला मिला.'

ट्रॉफी नहीं, टॉफी का शौक
'टॉफी का शौक मुझे बचपन से रहा है. लोगों को लगा ट्रॉफी का रहा होगा. ये बात मैंने ऑस्कर के दौरान रहमान को भी बताई. मुझे ट्रॉफी मिलती रही, मैं फिर भी टॉफी मांगता रहा.

गानों पर सेंसरशिप चाहते हैं सुखविंदर
सुखविंदर ने 'एजेंडा आज तक' के मंच से आजकल के गीतों पर भी नाराजग जताई. उन्‍होंने कहा, 'अब गानों पर भी सेंसरशिप होनी चाहिए. कैसे गाने थे. 'जिंदगी भर नहीं भूलेगी ये बरसात की रात'. 'सतरंगी रे'. 'दिल से रे' और अब 'हट तेरे की'... और गाली भी आधी देते हैं, ताकि कानूनी लड़ाई भी जीत जाएं.' उन्‍होंने कहा, 'मुझे कभी द्विअर्थी गानों के लिए किसी ने नहीं बोला. शायद फूलों के पास गंदगी नहीं आती. साफ जगह देखकर कभी कोई थूकेगा नहीं.'

Advertisement
Advertisement