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एजेंडा आजतक: निर्भया की मां का सवाल- सरकार ने देखा, उनके कानून लागू हुए या नहीं?

अभी जब कि हम सभी बैठकर इस मुद्दे पर विमर्श कर रहे हैं देश के किसी कोने में किसी लड़की के साथ रेप की घटना हो रही होगी. तो सवाल फिर वही है कि ये सब कब रुकेगा? इसे हम कब तक ठीक करेंगे? हम ऐसे ही बातें कब तक करते रहेंगे?

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आशा देवी, निर्भया की मां (फोटो-चंद्रदीप कुमार/इंडिया टुडे)
आशा देवी, निर्भया की मां (फोटो-चंद्रदीप कुमार/इंडिया टुडे)

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  • 'हजार कानून बने लेकिन जब तक अमल ही नहीं होगा क्या फायदा?'
  • 'अच्छा हुआ निर्भया मर गई, जिंदा होती तो बार-बार रेप की पीड़ा सहती'

एजेंडा आजतक के मंच पर आए तमाम गेस्ट बीजेपी नेता और यूपी कैबिनट में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, अनुप्रिया पटेल (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री एवं अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष) और सुष्मिता देव (सांसद, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष) ने रेप जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा की और सजा में होने वाली देरी को लेकर अपना पक्ष रखा. वहीं निर्भया की मां आशा देवी ने कई गंभीर सवाल भी उठाए. उन्होंने कहा कि मंच पर विराजमान लोगों ने बहुत अच्छी-अच्छी बातें की. सुनने में यह सब बहुत अच्छा लगा लेकिन सवाल यह है कि सात साल पहले भी बहुत सी महिलाओं के साथ रेप की घटना हुई थी और निर्भया वाली गैंगरेप की घटना के बाद के सात सालों में भी ऐसी कई घटनाएं घटीं लेकिन क्या हम उनमें से किसी एक को भी सजा दे पाए?

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 अभी जब कि हम सभी बैठकर इस मुद्दे पर विमर्श कर रहे हैं देश के किसी कोने में किसी लड़की के साथ रेप की घटना हो रही होगी. तो सवाल फिर वही है कि ये सब कब रुकेगा? इसे हम कब तक ठीक करेंगे? हम ऐसे ही बातें कब तक करते रहेंगे? देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में दोषियों की अपील खारिज कर दी लेकिन अब तक मामला अटका हुआ है.  मैं सरकार और कोर्ट के बीच में फंस गई हूं कि फैसला कौन करेगा?

आपने हजार कानून बनाए लेकिन जब तक उसपर अमल ही नहीं होगा उसका क्या फायदा? ये कौन देखेगा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो कानून बने वो लागू भी हुआ कि नहीं. इस बातचीत के दौरान निर्भया की मां आशा देवी ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि रेप पीड़िता और उसके मां-बाप को बार-बार यह बताना पड़ता है कि उसके साथ हादसा कैसे हुआ. इस तरह हर बार वो महिला या लड़की उस रेप की प्रताड़ना को सहती है. अच्छा हुआ कि निर्भया मर गई क्योंकि अगर वो जिंदा होती तो उसे बार-बार रेप की पीड़ा सहनी होती.   

 जब भी समाज में इस तरह की घटना होती है कानून बदलने की मांग होती है या फिर फास्ट ट्रैक कोर्ट लाने की बात होती है और शायद बनती भी होगी. लेकिन क्या इन सबके बावजूद समस्या का समाधान मिला? क्या हमारा सिस्टम हमारे अंदर यह भरोसा बना पाया कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा. पिछले 15 सालों में सिर्फ एक रेपिस्ट को फांसी की सजा मिली है. लेकिन इस दौरान कितनी बच्चियों के साथ रेप की घटना को अंजाम दिया गया. हमारा एजेंडा आज भी वही है कानून सख्त होगा, फस्ट ट्रैक कोर्ट आएगा, मेरा सवाल है कि ये सब कब आएगा?

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निर्भया की मां ने राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज करने का किया आग्रह

केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार द्वारा राष्ट्रपति से 2012 के निर्भया के दुष्कर्म और हत्या मामले में एक दोषी द्वारा दायर दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश करने के बाद पीड़िता की मां ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है और दया याचिका को खारिज करने की अपील की है. हरिजन सेवक संघ के माध्यम से अग्रसारित याचिका में मां ने आरोप लगाया कि दोषी विनय शर्मा मौत की सजा से बचने की कोशिश में लगा है.

उन्होंने याचिका में कहा, "दोषियों में से एक विनय शर्मा द्वारा दायर दया याचिका जानबूझकर मौत की सजा से बचने और न्याय को रोकने की कोशिश है."

याचिका में कहा गया, "इसलिए बेहद सम्मान के साथ प्रार्थना है कि उक्त दया याचिका को खारिज कर दिया जाए."

रविवार को दिल्ली सरकार ने शर्मा की दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश की थी.

क्या है मामला?

16 दिसंबर, आज ही के दिन निर्भया के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था. इस घटना को सात साल गुजर गए हैं लेकिन अब भी सभी दोषियों को सज़ा नहीं मिली है. इस केस में कुल 6 आरोपी थे. जिनमें से एक दोषी जो नाबालिग था वो तीन साल की सजा काट कर रिहा हो चुका है. वहीं एक ने आत्महत्या कर ली थी. जबकि चार अन्य दोषी विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार को फांसी पर चढ़ाए जाने का इंतजार है.

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